🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩🚒कौन बचाएगा ? 🤗🔔*
*🔔तीर्थंकर प्रभु के पंचकल्याणक की सूचना🔔*
*1.🤗आज 25 मई 2022 बुधवार , ज्येष्ठ कृष्ण दशमी को 13 वे तीर्थंकर 1008 श्री विमलनाथजी भगवान का गर्भ कल्याणक महोत्सव 25 मई 2022 बुधवार को है ।*
*🔔तीर्थंकर प्रभु के पंचकल्याणक की अग्रिम सूचना🔔*
*2.🤗 27 मई 2022 गुरुवार ,ज्येष्ठ कृष्ण बारस को 14 वे तीर्थंकर 1008 श्री अनंतनाथजी भगवान का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव ।*
एक समय की बात है किसी गाँव में एक साधु रहता था, वह भगवान का बहुत बड़ा भक्त था और निरंतर एक पेड़ के नीचे बैठ कर भगवान के नाम का जप किया करता था | उसका भागवान पर अटूट विश्वास था और गाँव वाले भी उसकी इज्ज़त करते थे|
⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्माबंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो संस्था को दान करें।जो पुण्य को बढ़ाना चाहते है वे भी संस्था को दान करें।✍️*
*✍️➡️👨👩👧👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवासस्थान लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️
एक बार गाँव में बहुत भीषण बाढ़ आ गई | चारो तरफ पानी ही पानी दिखाई देने लगा, सभी लोग अपनी जान बचाने के लिए ऊँचे स्थानों की तरफ बढ़ने लगे | जब लोगों ने देखा कि साधु महाराज अभी भी पेड़ के नीचे बैठे भगवान का नाम जप रहे हैं तो उन्हें यह जगह छोड़ने की सलाह दी| पर साधु ने कहा-
” तुम लोग अपनी जान बचाओ मुझे तो मेरा भगवान बचाएगा!”
धीरे-धीरे पानी का स्तर बढ़ता गया , और पानी साधु के कमर तक आ पहुंचा , इतने में वहां से एक नाव गुजरी|
मल्लाह ने कहा- ” हे साधू महाराज आप इस नाव पर सवार हो जाइए मैं आपको सुरक्षित स्थान तक पहुंचा दूंगा |”
“नहीं, मुझे तुम्हारी मदद की आवश्यकता नहीं है , मुझे तो मेरा भगवान बचाएगा !! “, साधु ने उत्तर दिया.
नाव वाला चुप-चाप वहां से चला गया.
कुछ देर बाद बाढ़ और प्रचंड हो गयी , साधु ने पेड़ पर चढ़ना उचित समझा और वहां बैठ कर ईश्वर को याद करने लगा | तभी अचानक उन्हें गड़गडाहत की आवाज़ सुनाई दी, एक हेलिकोप्टर उनकी मदद के लिए आ पहुंचा, बचाव दल ने एक रस्सी लटकाई और साधु को उसे जोर से पकड़ने का आग्रह किया|
पर साधु फिर बोला-” मैं इसे नहीं पकडूँगा, मुझे तो मेरा भगवान बचाएगा |”
उनकी हठ के आगे बचाव दल भी उन्हें लिए बगैर वहां से चला गया |
कुछ ही देर में पेड़ बाढ़ की धारा में बह गया और साधु की मृत्यु हो गयी |
मरने के बाद साधु महाराज की आत्मा यमराज के पहुचे और बोले -. ” हे न्यायकर्ता मैंने पूरी लगन के साथ भगवान के नाम की आराधना की… तपस्या की पर जब मै पानी में डूब कर मर रहा था तब मुझे बचाने कोई नहीं आया, ऐसा क्यों ?
यमराज बोले , ” हे साधु महात्मा भक्ति व जाप से तुम्हारी रक्षा करने एक नहीं बल्कि तुम्हें तीन बार मौका दिया , पहला, ग्रामीणों के रूप में , दूसरा नाव वाले के रूप में , और तीसरा ,हेलीकाप्टर बचाव दल के रूप में. किन्तु तुम अपने पुण्यफल के इन अवसरों को पहचान नहीं पाए |”
*जो भी व्यक्ति विशेष भगवान को कर्ता मानता है वह व्यक्ति विशेष अभी भगवान की शक्ति को पहचान नहीं सका है।जिस प्रकार कोई भी व्यक्ति जैसा कर्म करता है, उसी कर्म के अनुसार उसे फल प्राप्त होता है।सृष्टि का नियम है कि नीम बोने पर आम की प्राप्ति नहीं हो सकती।भगवान ने हमें सभी मार्ग बताये है, अब हमारा जैसा पुरषार्थ होगा वैसी मंजिल प्राप्त होगी । भगवान में कोई भी शक्ति नहीं है किंतु भगवान के भक्ति में इतनी शक्ति है कि वह भक्त एक दिन भगवान बन जाता है ।उन परम सिद्ध आत्माओं ने हमें बताया है कि हम किस प्रकार इस संसार से मुक्त हो सकते हैं किंतु हम उस रास्ते को न पहचानते हुए अन्य रास्तों में सुख ढूंढ रहे हैं। इसीलिए आज हम सभी दुखी हो रहे हैं।*
*💐💐शिक्षा💐💐*
*महान आत्माओं, इस जीवन में हमारा समिचीन पुरषार्थ हमें कई अवसर देता है , इन अवसरों की प्रकृति कुछ ऐसी होती है कि वे किसी की प्रतीक्षा नहीं करते है , वे एक दौड़ते हुये घोड़े के सामान होते हैं जो हमारे सामने से तेजी से गुजरते हैं , यदि हम उन्हें पहचान कर उनका लाभ उठा लेते है तो वे हमें हमारी मंजिल तक पंहुचा देते है, अन्यथा हमें बाद में पछताना ही पड़ता है|भगवान सृष्टि का कर्ता नहीं है, हमारे कर्म ही हमें जैसा वर्तमान का पुरषार्थ व कर्म का उदय होगा वैसा फल प्राप्त होता है।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम् जयतु शासनम्*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें