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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👑पुरस्कार💐💐*
*🔔अग्रीम सूचना🔔*
*🤗वैशाख शुक्ल षष्ठी को चोथे तीर्थंकर 1008 श्री अभिनंदननाथजी भगवान का गर्भ व मोक्षकल्याणक महोत्सव 7 मई 2022 शनिवार को है । 😇🔔▶️👨👩👧👦आपसभी इस शुभ महोत्सव का सपरिवार इष्टमित्रों सहित लाभ उठायें ।*
*कक्षा में उत्साह और डर का वातावरण था। गणित के अध्यापक को परीक्षा लेनी थी। अध्यापक ने प्रश्नों के सही हल करने वाले को पुरस्कार की घोषणा कर दी थी।*
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सवाल थोड़े कठिन थे। इसलिए पुरस्कार को लेकर तो विद्यार्थियों में उत्साह था, लेकिन सवाल हल नहीं हो पाने के कारण वे डरे हुए थे।
काफी देर विद्यार्थी सवालों को हल करने की कोशिश करते रहे। आखिर में एक विद्यार्थी उठा और अध्यापक को अपनी उत्तर पुस्तिका दिखाई। सवाल सही ढ़ंग से हल किए गए थे और उत्तर भी सही थे। अध्यापक ने उसकी पीठ थपथपाई और पुरस्कार देकर सम्मानित किया।
अन्य विद्यार्थी कमजोर माने जाने वाले विद्यार्थी द्वारा सबसे पहले उठने और सवाल हल कर दिखाने से आश्चर्यचकित थे।
अगले दिन जैसे ही अध्यापक कक्षा में आए पुरस्कार विजेता विद्यार्थी उनके पैरों से लिपट गया और फूट-फूट कर रोने लगा।
अध्यापक ने पूछा- तुम क्यों रो रहे हो। तुमने तो पुरस्कार जीत कर अच्छे विद्यार्थी होने का परिचय दिया है। तुम्हें तो प्रसन्न होना चाहिए।
विद्यार्थी ने कहा- आपके द्वारा दिए गए पुरस्कार का मैं अधिकारी नहीं हूँ। मैंने पुस्तक से नकल करके सवालों का हल किया था। मुझे मेरी गलती के लिए क्षमा कर दें। भविष्य में ऐसी गलती नहीं होगी।
अध्यापक ने कहा- तुम्हें सवालों का सही हल नहीं आता। लेकिन तुम्हें किसी को धोखा देना भी नहीं आता। गलत ढ़ंग से कोई काम करने पर तुम्हारी आत्मा तुम्हें कचोटती रही। तुमने आत्मा की आवाज सुनकर अपनी गलती स्वीकार कर ली। अपनी गलती मान लेने वाले बड़े होकर बड़ा काम और ऊंचा नाम करते हैं।
अध्यापक ने उसे गले से लगा लिया। गलती स्वीकार करके अध्यापक के स्नेह का पुरस्कार पाने वाले वे व्यक्ति गोपाल कृष्ण गोखले थे।
*शिक्षा:-*
जीवन में कुछ प्राप्त करने के लिये और सफलता हासिल करने के लिये जुठ को ज्यादा महत्व देने के बजाय सच को ज्यादा महत्व देना चाहिये क्योंकि आपकी सच्चाई ही आपके कार्य को निर्धारित करती है..!!
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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