शनिवार, 28 मई 2022

दृष्टिकोण

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒दृष्टिकोण का फर्क💐💐*

*🔔तीर्थंकर प्रभु के पंचकल्याणक की  सूचना🔔*
*आज 29 मई 2022   रविवार ,ज्येष्ठ कृष्ण चौदस को 16 वे तीर्थंकर 1008 श्री     शान्तिनाथजी भगवान का जन्म , तप व मोक्ष कल्याणक महोत्सव  हैं।*
*🔔तीर्थंकर प्रभु के पंचकल्याणक की अग्रिम सूचना🔔*
*30  मई 2022 सोमवार ,ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या को दुसरे वे तीर्थंकर 1008 श्री अजितनाथजी भगवान का गर्भ कल्याणक महोत्सव  हैं।*

▶️बहुत पुरानी बात है एक गांव में कुछ मजदूर पत्थर के खंभे बना रहे थे। तभी वहां से एक संत गुजरे। 

*👨‍👩‍👧‍👦🤝👩‍🦰नोट:-महानुभावों आपने इस प्रकार की कहानियां हजारों बार पढ़ ली होगी।फिर भी इस प्रकार की कहानियां आपको बार बार भेजी जा रही है।इसका कारण यह है कि जिन महानुभावों ने कहानियां पढकर अपना आचरण सुधार लिया वे तो धन्य है।जिन महानुभावों ने कहानियां पढकर अपना आचरण नहीं सुधारा कोई बात नहीं, आपके आत्मा पर कहानियों से कुछ धर्म के संस्कार तो पढगये जब वे उदय मे आयेंगे तो नियम से शुभफल की प्राप्ति होगी।हाँ जितना हमारा समीचीन पुरषार्थ होगा उतना ही लाभदायक शुभफल हमें प्राप्त होगा।अतः आप अपने किमती समय का सदुपयोग करते हुए स्वयं की आत्मा पर अच्छे संस्कार डालकर यह मनुष्य भव सफल करें।हाँ आप हमें अपने विचार अवश्य ही भेजे।*

उन्होंने एक मजदूर से पूछा यहां क्या बन रहा है? उसने कहा देखते नहीं पत्थर काट रहा हूं?

 संत ने कहा हां, देख तो रहा हूं। लेकिन यहां बनेगा क्या? 
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मजदूर झुंझला कर बोला मालूम नहीं।

क्या बनेगा? मजदूर बोला देखिए साधु बाबा, यहां कुछ भी बने।
चाहे मंदिर बने या जेल, मुझे क्या।

 मुझे तो दिन भर की मजदूरी के रूप में 70 रुपए मिलते हैं। 

बस शाम को रुपए मिलें और मेरा काम बने। मुझे इससे कोई मतलब नहीं कि यहां क्या बन रहा है। 

साधु आगे बढ़े तो तीसरा मजदूर मिला। 

साधु ने उससे पूछा यहां क्या बनेगा? मजदूर ने कहा मंदिर।
इस गांव में कोई बड़ा मंदिर नहीं था। 

इस गांव के लोगों को दूसरे गांव में उत्सव मनाने जाना पड़ता था। 

मैं भी इसी गांव का हूं। ये सारे मजदूर इसी गांव के हैं। 

मैं एक-एक छेनी चला कर जब पत्थरों को गढ़ता हूं तो छेनी की आवाज में मुझे मधुर संगीत सुनाई पड़ता है। मैं आनंद में हूं।

कुछ दिनों बाद यह मंदिर बन कर तैयार हो जाएगा और यहां धूमधाम से पूजा होगी। मेला लगेगा। कीर्तन होगा। मैं यही सोच कर मस्त रहता हूं। 

मेरे लिए यह काम, काम नहीं है। मैं हमेशा एक मस्ती में रहता हूं। मंदिर बनाने की मस्ती में।

 मैं रात को सोता हूं तो मंदिर की कल्पना के साथ और सुबह जगता हूं तो मंदिर के खंभों को तराशने के लिए चल पड़ता हूं।
बीच-बीच में जब ज्यादा मस्ती आती है तो भजन गाने लगता हूं। 

जीवन में इससे ज्यादा काम करने का आनंद कभी नहीं आया। साधु ने कहा- यही जीवन का रहस्य है मेरे भाई। बस दृष्टिकोण का फर्क है।

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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