मंगलवार, 3 मई 2022

भगवान की भक्ति से

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒भगवान की भक्ति से💐💐* 

*🔔एक दिगंबर  जैनधर्म के भक्त थे। उन्होंने अरिहंत भगवान का निस्वार्थ भाव से नाम जपते व एकान्त मे बैठकर ध्यान करते हुए जीवन बिता दिया, पर अरिहंत भगवान से कभी कुछ नहीं माँगा।*

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एक दिन वे  मंदिर गए। पर यह क्या, वहाँ उन्हें भगवान नहीं दिखे। वे आसपास के अन्य भक्तों से पूछने लगे कि आज भगवान कहाँ चले गए?
सब उनकी ओर हैरानी से देखते हुए कहने लगे- भगवान तो ये रहे। सामने ही तो हैं। तुझे नहीं दिखते? तूं अंधा है क्या?

उन भक्त ने सोचा कि सब को दिख रहे हैं, मुझे क्यों नहीं दिख रहे? मुझे ये सब दिख रहे हैं, भगवान ही क्यों नहीं दिख रहे?

ऐसा विचार कर उनका अंतःकरण ग्लानि से भर गया। वे सोचने लगे- लगता है कि मेरे सिर पर पाप बहुत चढ़ गया है, इसीलिए मुझे भगवान नहीं दिखते। मैं इस शरीर का अन्त कर दूंगा। आखिर ऐसे शरीर का क्या लाभ? जिससे भगवान ही न दिखते हों।नवनीत
ऐसा सोच कर वे यमुना में डूबने चले।

इधर उस मंदिर जी के क्षेत्रपाल महाराज ने एक साधु का वेष बना कर, एक कोढ़ी के पास पहुँचे और कहा कि   एक अरिहंतभक्त यमुना को जा रहे हैं, उनके आशीर्वाद में बहुत बल है। यदि वे तुझे आशीर्वाद दे दें, तो तेरा कोढ़ तुरंत ठीक हो जाए।

यह सुन कर कोढ़ी यमुना की ओर दौड़ा। उन भक्त को पहचान कर, उनका रास्ता रोक लिया। और उनके पैर पकड़कर, उनसे आशीर्वाद माँगने लगा।

भक्त कहने लगे- भाई! मैं तो पापी हूँ, मेरे आशीर्वाद से क्या होगा?

पर जब बार बार समझाने पर भी कोढ़ी ने पैर न छोड़े, तो उन भक्त ने अन्तरमन से अरिहंत को ध्यान करते हुए सच्चेभाव से कह ही दिया- अरिहंतभगवान  की मैंने अगर सच्ची भक्ति की है तो इसका रोग दूर हो ।

ऐसा कहते ही कोढ़ी बिल्कुल ठीक हो गया। पर वे भक्त हैरान हो गए कि यह चमत्कार कैसे हो गया? वे अभी वहीं स्तब्ध खड़े ही थे कि साक्षात क्षेत्रपाल महाराज सामने आ खड़े हुए।

उन भक्त ने क्षेत्रपाल महाराज को देखा तो अपने को संभाल न सके और रोते हुए, भगवान का स्मरण कर क्षेत्रपाल महाराज का धन्यवाद किया। 

वे क्षेत्रपाल महाराज से पूछने लगे- भगवान! यह आपकी कैसी लीला है? पहले तो आप मंदिर में भी दिखाई न दिए, और अब अनायास क्षेत्रपाल महाराज आ पहुंचे।

क्षेत्रपाल महाराज ने कहा- भक्तराज! आपने जीवन भर अरिहंत भगवान का जप किया, पर कभी कुछ माँगा नहीं।
 आपकी भक्ति से असीम पुण्य संचय हो गया था।इसकी चर्चा स्वर्ग में भी हुई ।।इसलिए आपकी परीक्षा केलिये यह खेल खेला गया। 
 आज आपने उस कोढ़ी को आशीर्वाद देकर, अपने पुण्यपुञ्ज में से कुछ माँग लिया। बस आपकी भक्तिवश हम स्वर्ग से कोड़ी बनकर आपकी परीक्षा करने आये थे।

*🔔भव्यआत्माओं, वे भक्त धन्य हैं जो पंचपरमेष्ठी भगवान का नाम तो जपते हैं, पर बदले में भगवान से कभी कुछ नहीं मांगते।ऐसे निर्ग्रन्थ दिगंबर जैन धर्म को तीन लोक के सभी देवी-देवताओं नमस्कार करते है।यही सच्चे जैनधर्म की विशेषता है।वर्तमान में भी इस विश्व में जैनधर्म को मानने वाले अनुयायी संपूर्ण विश्व में है।इस भारत देश को चलाने में आज भारत सरकार सम्पूर्ण भारत के टेक्स मे से  जैनियो के द्वारा 35 से  40% राशि टेक्स के रूप में प्राप्त हो रही है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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