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🕉️🌞वसुनंदी गुरुवे नमः🌞🕉️
🌞🕉️सच्चा साथी🕉️🌞
*⏰😇मेरा चिंतन😇⏰*
*✍जीवन का अर्थ✍*
*जीवन"* का अर्थ है-- *"आशा" और "प्रगति"* । जिसे सही अर्थो में जीवन जीना आ गया, उसे पल भर को भी निराशा और दुःख की भावना उत्पीड़ित नहीं कर सकती । कठिन से कठिन परिस्थितियों में वह *"आशावादी व्यक्ति हँसते-मुस्कराते जीता है"* और अंततः लक्ष्य पा ही लेता है । *"जीवन"* का अभिप्राय है-- *"प्रगति,"* अर्थात प्रतिक्षण अपने भाव संस्थान को गुण, कर्म और स्वभाव को उत्कृष्ट बनाना । *"धन," "वैभव" तथा "अन्य लौकिक ऐषणाएँ तो क्षणजीवी हैं, नश्वर हैं,"* कामनाओं और वासनाओं को अधिकाधिक बढ़ाने वाली हैं, परन्तु जिसने अपनी आत्मा को निर्मल बना लिया, कषाय-कल्मषों से स्वयं को मुक्त कर लिया, *"वही सच्चा सुख प्राप्त करता है ।"*
👉 जिसे जीना आ गया, उसका जीवन स्वतः ही पुष्प जैसा सुंदर, चंदन जैसा शीतल, सुगंधित तथा दीपक जैसा प्रकाशवान बन जाता है । *"वह पुष्प के सदृश हँसता-खिलखिलाता, "सत्यम्-शिवम्-सुन्दरम्" युक्त जीवन व्यतीत करता है ।"* चंदन के समान समीपवर्ती वातावरण को सुगंधित बनाए रखता है तथा घिसे जाने पर भी रोष, विद्वेष की भावना मन में नहीं लाता । दीपक के सदृश वह तिल-तिल जलकर अंधकार से लड़ता है तथा अंतिम बूँद तक दूसरों को प्रकाश देता रहता है ।
🌞✍️ जैनम् जयतु शासनम् ✍️🌞
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