*‼️कंजूस व्यक्ति‼️*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒‼️कंजूस व्यक्ति‼️ ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 वैशाख शुक्ल षष्ठी, सोमवार , 13 मई 2024 कलिकाल के चतुर्थ तीर्थंकर अभिनंदन नाथ भगवान गुरु की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी प्रकार के अरिष्टों को समाप्त करने की शक्ति प्रदान कर उत्तम धर्म को धारण करवा कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाले श्री कुंथुनाथ भगवान जी का गर्भ व मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 वैशाख शुक्ल 8 शाश्वत पर्व, बुधवार , 15 मई 2024 कलिकाल के 15 वें तीर्थंकर धर्मनाथ भगवान बुध की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी प्रकार के अरिष्टों को समाप्त करने की शक्ति प्रदान कर उत्तम धर्म को धारण करवा कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाले श्री धर्मनाथ भगवान जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 वैशाख शुक्ल नवमी, गुरुवार , 16 मई 2024 कलिकाल के 5 वें तीर्थंकर सुमतिनाथ भगवान गुरु की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी प्रकार के अरिष्टों को समाप्त करने की शक्ति प्रदान कर उत्तम धर्म को धारण करवा कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाले श्री सुमतिनाथ भगवान जी का तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔मई माह में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 18 को महावीर स्वामी का ज्ञान व 29 को श्रेयांसनाथ का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*
*👨👨👦👦🔔👉मई माह में शुक्ल पक्ष में अष्टमी तिथि पंद्रह मई को है। चतुर्दशी तिथि बाईस मई को है।*
*🙆इस माह कोई भी विवाह मुहूर्त नहीं है। विवाह मुहूर्त 9 जुलाई से प्रारंभ होकर 15 जुलाई तक ही है।*
*🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
एक समय की बात है एक नगर में एक कंजूस सेठ रहता था।
उसकी कंजूसी सर्वप्रसिद्ध थी वह खाने, पहनने तक में भी कंजूस था।
एक बात उसके घर से एक लौटा गुम हो गया इसी लौटा के दुःख में उस ने तीन दिन तक कुछ न खाया परिवार के सभी सदस्य उसकी कंजूसी से दुखी थे ।
मोहल्ले में उसकी कोई इज्जत न थी, क्योंकि वह किसी भी सामाजिक कार्य में दान नहीं करता था।
⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨👩👧👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️
एक बार उस के मोहल्ले में धार्मिक कथा का आयोजन हुआ वेदमंत्रों व् उपनिषदों पर आधारित कथा हो रही थी उस को सद्बुद्धि आई तो वह भी कथा सुनने के लिए सत्संग में पहुँच गया।
प्रवचन के प्राकृतिक सिद्धांतों को सुनकर उसको भी रस आने लगा क्योंकि प्राकृतिक सिद्धान्त व्यावहारिक व् वास्तविकता पर आधारित एवं सत्य-असत्य का बोध कराने वाले होते है।
कंजूस को और रस आने लगा उसकी कोई कदर न करता फिर भी वह प्रतिदिन कथा में आने लगा।
कथा के समाप्त होते ही वह सबसे पहले शंका पूछता इस तरह उसकी रूचि बढती गई।
सनातन कथा के अंत में नगर भोज का आयोजन था इसलिए कथावाचक ने इसकी सूचना दी कि रविवार को नगर के सभी लोगों के सहयोग से भोजन होगा इसके लिए जो श्रद्धा से कुछ भी लाना चाहे या दान करना चाहे तो कर सकता है।
अपनी-अपनी श्रद्धा के अनुसार सभी लोग कुछ न कुछ लाए कंजूस के हृदय में जो सच्चे देव शास्त्र गुरु के प्रति श्रद्धा पैदा हुई वह भी एक गठरी बांध सर पर रखकर लाया।
भीड़ काफी थी कंजूस को देखकर उसे कोई भी आगे नहीं बढ़ने देता इस प्रकार सभी दान देकर यथास्थान बैठ गए।
अब कंजूस की बारी आई तो सभी लोग उसे देख रहे थे कंजूस को संत की ओर बढ़ता देख सभी को हंसी आ गई क्योंकि सभी को मालूम था कि यह महाकंजूस है।
उसकी गठरी को देख लोग तरह-तरह के अनुमान लगाते ओर हँसते, लेकिन कंजूस को इसकी परवाह न थी।
कंजूस ने आगे बढ़कर संत को प्रणाम किया जो गठरी अपने साथ लाया था, उसे उसके चरणों में रखकर खोला तो सभी लोगों की आँखें फटी-की-फटी रह गई।
कंजूस के जीवन की जो भी अमूल्य संपत्ति गहने, जेवर, हीरे-जवाहरात आदि थे उसने सब कुछ को दान कर घोषणा की इस संपत्ति से नगर में एक संतभवन का निर्माण कार्य किया जाएं। यहां पर संतो का निवास होने से हमें और हमारी पिढ़ी को सच्चे ज्ञान की प्राप्ति होगी । जिससे वे अपने बहुमूल्य वोट का सही इस्तेमाल कर भ्रष्टाचार युक्त राजनीति को समाप्त कर तानाशाही राजनेताओं को आगे बढ़ने से रोका जा सकेगा।
उठकर वह यथास्थान जाने लगा तो संत महात्मा ने कहा, “महाराज! आप वहाँ नहीं, यहाँ बैठिये।”
कंजूस बोला, “संत जी! यह मेरा आदर नहीं है, यह तो मेरे धन का आदर है, अन्यथा मैं तो रोज आता था और यही पर बैठता था, तब मुझे कोई न पूछता था।”
संत महात्मा ने कहा , “नहीं, महाराज! यह आपके धन का आदर नहीं है, बल्कि आपके महान त्याग (दान) का आदर है।
यह धन तो थोड़ी देर पहले आपके पास ही था, तब इतना आदर-सम्मान नहीं था जितना की अब आपके त्याग (दान) में है इसलिए आप आज से एक सम्मानित व्यक्ति बन गए है।
*🎪🔔👨👨👦👦✍️🔑विशेष:-भव्य आत्माओं, मनुष्य को कमाना भी चाहिए और दान भी अवश्य देना चाहिए इससे उसके जीवन में कभी भी दरिद्रता नही आयेगी।समाज में सम्मान और यहलोक तथा परलोक में भी धनवान के घर जन्म मिलता है।
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम जयतु शासनम*
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें