मंगलवार, 10 मार्च 2026

करुणा की सीख

*🎪 सिद्धम नमः 🎪*
*⛳वसुनंदी गुरुवे नमः ⛳*
*🌞✍️सच्चा राही ✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 करुणा की सीख ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 चैत्र कृष्ण अष्टमी, 11 मार्च बुधवार 2026 कलि काल के  10 वें  तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री शीतलनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार  के शीतलता से सम्पन्न  हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर  मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री शीतलनाथ भगवान जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔👨‍👨‍👦‍👦🐎🔑 चैत्र कृष्ण 09 ,12 मार्च गुरुवार 2026 कलि काल के प्रथम  तीर्थंकर   सर्व सुखकारी संस्कार प्रदाता श्री आदिनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार  के शुभ आचरण से सम्पन्न  हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर  मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री आदिनाथ भगवान जी का  जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 मार्च 2026 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 07,08,11,12,18,19,21,23,24,28 व 30 मार्च  को  कल्याणक महोत्सव है। 💯✅विशेष :- 18+18,23,24 व 28 को मोक्ष कल्याणक महोत्सव याने चार दिन में पांच निर्वाण लाडू चढ़ाने का सुअवसर प्राप्त होगा।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔🐎इस मार्च माह में अष्टमी तिथि 11 व 26  फरवरी को है। चतुर्दशी तिथि 17 व 31 मार्च  को है।*
*🔔🐎 सोलह कारण महापर्व 4  मार्च से प्रारंभ है।* 
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 शुद्ध विवाह मुहूर्त 10 व 12  मार्च  में  मुहूर्त है। 🔔👉 वाहन खरीद मुहूर्त   05,06, 08,09 , 16,23, 27 मार्च को है।🏠👉 प्रापर्टी मुहूर्त 02,03,  08, 09,13,  21,26, 27 ,28 फरवरी को है।✅👉 गृह प्रवेश मुहूर्त 04,06,14 मार्च को है।*
*🐎✍️ पंचक  16 से 20 जनवरी को है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*🔔👉प्रकृति हमें हर पल कुछ न कुछ सिखाती है। पेड़, नदी, पर्वत और पक्षी—ये सभी मानो जीवन का कोई गहरा संदेश लेकर हमारे सामने आते हैं। परंतु कई बार हम अपने स्वार्थ में इतने उलझ जाते हैं कि उस सरल सत्य को समझ ही नहीं पाते। जब मन में करुणा जागती है, तभी मनुष्य सच्चे अर्थों में मनुष्य बनता है। किसी ने ठीक ही कहा है—“जहाँ करुणा होती है, वहीं सच्चा धर्म जन्म लेता है।*

⬇️⬇️⬇️✅⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र  रजिस्टर संस्था के  📲 W  9057115335 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️✅⬆️⬆️⬆️

 *👉करुणा की सीख 👈* 
*🔔आइए आज हम इस कहानी के माध्यम से समझते है कि हमारे अंदर करुणा है या नहीं*
एक साधु घने जंगल के बीच एक छोटी-सी कुटिया बनाकर रहता था। वह स्थान अत्यंत रमणीय था। चारों ओर हरियाली ही हरियाली फैली हुई थी। पास ही एक स्वच्छ और शांत नदी बहती थी और दूर पर्वतों की ऊँची-ऊँची चोटियाँ आकाश को छूती प्रतीत होती थीं। उस शांत वातावरण में साधु दिन-रात भगवत भजन और साधना में लीन रहता और बड़ा प्रसन्न रहता था।

किन्तु एक बात उसे बार-बार परेशान कर देती थी। कुटिया के पास उसने थोड़े से अनाज और फल-फूल के पौधे लगाए थे। जंगल के पक्षी और छोटे-छोटे पशु अक्सर चुपके से आकर उन दानों और फलों को खा जाते थे। जब साधु उन्हें देख लेता तो लकड़ी उठाकर उन्हें भगाने लगता। उस समय तो वे डरकर उड़ जाते या भाग जाते, पर कुछ समय बाद फिर लौट आते। यह क्रम यूँ ही चलता रहता।

एक बार साधु तीर्थयात्रा के लिए निकल पड़ा। यात्रा करते-करते एक दिन वह एक गाँव से होकर गुजर रहा था। वहाँ दूर-दूर तक खेत ही खेत फैले हुए थे और उनमें पकी हुई फसल लहलहा रही थी।

साधु की नजर एक खेत पर पड़ी। उस खेत में एक मचान बना था, जिस पर एक वृद्धा माता बैठी थी और फसल की रखवाली कर रही थी। पर आश्चर्य की बात यह थी कि उसकी आँखों के सामने ही बहुत-सी चिड़ियाँ खेत में उतर-उतरकर अनाज के दाने चुग रही थीं।

यह दृश्य देखकर साधु को बड़ा अचरज हुआ। वह तुरंत उस वृद्धा के पास गया और बोला—
“अरे माई! तुम यहाँ बैठी क्या कर रही हो? देखो, चिड़ियाँ तो तुम्हारी फसल चुगती जा रही हैं।”

वृद्धा मुस्कुराई। उसके चेहरे पर संतोष और ममता का अद्भुत भाव था। उसने शांत स्वर में कहा—

“भैया, इन चिड़ियों को भी तो भगवान ने ही बनाया है। इनके घर में कहाँ अनाज भरा रहता है! बेचारी भूखी होती हैं, तभी तो दाने चुगने आती हैं। इनके पेट में थोड़ा-सा अनाज चला भी जाए तो मेरा क्या बिगड़ जाएगा? इनका पेट है ही कितना बड़ा!”

थोड़ा रुककर वह फिर बोली—
“और फिर, अगर हम भूखे को ही न खिलाएँ तो इंसान होने का क्या अर्थ?

इंसानियत तो देने में बसती है, छीनने में नहीं।”
वृद्धा की बात सुनकर साधु कुछ क्षण मौन रह गया। उसकी आँखें जैसे खुल गईं। उसे अपनी कुटिया के वे पशु-पक्षी याद आ गए, जिन्हें वह डंडा लेकर भगाया करता था।

आज उसके मन में उनके प्रति क्रोध नहीं, बल्कि करुणा और प्रेम उमड़ आया। उसे लगा मानो उस वृद्धा ने उसे जीवन का बहुत बड़ा सत्य समझा दिया हो।

उसने मन ही मन सोचा—
“सच्ची साधना वही है, जिसमें सबके लिए करुणा हो।”
और उसे यह भी समझ में आ गया कि

 *“वसुधैव कुटुम्बकम्* — यह पूरी धरती ही हमारा परिवार है।”
*👨‍👨‍👦‍👦💯🐎🌞✅ विशेष:- जो मनुष्य हर प्राणी में ईश्वर का अंश देखता है और दया, करुणा व सहअस्तित्व के साथ जीवन जीता है, वही सच्चे अर्थों में मानवता को समझता है।“धर्म पूजा से नहीं, करुणा से जीवित रहता है।”*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें