*🎪 सिद्धम नमः 🎪*
*⛳वसुनंदी गुरुवे नमः ⛳*
*🌞✍️सच्चा राही ✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 “संस्कार शिक्षा के” ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨👨👦👦🐎🔑 चैत्र कृष्ण 4, 07 मार्च शनिवार 2026 कलि काल के 23 वें तीर्थंकर उपसर्ग विजेता सर्व सुखकारी श्री पार्श्वनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से केतू की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार के वैभव से सम्पन्न हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री पार्श्वनाथ भगवान जी का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔👨👨👦👦🐎🔑 चैत्र कृष्ण पंचमी, 08 मार्च रविवार 2026 कलि काल के अष्टम तीर्थंकर सर्व सुखकारी श्री चन्द्रप्रभ भगवान जी जिनकी आराधना से चंद्र की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार के शुभ आचरण से सम्पन्न हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री चन्द्रप्रभ भगवान जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 मार्च 2026 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 07,08,11,12,18,19,21,23,24,28 व 30 मार्च को कल्याणक महोत्सव है। 💯✅विशेष :- 18+18,23,24 व 28 को मोक्ष कल्याणक महोत्सव याने चार दिन में पांच निर्वाण लाडू चढ़ाने का सुअवसर प्राप्त होगा।*
*👨👨👦👦🔔🐎इस मार्च माह में अष्टमी तिथि 11 व 26 फरवरी को है। चतुर्दशी तिथि 17 व 31 मार्च को है।*
*🔔🐎 सोलह कारण महापर्व 4 मार्च से प्रारंभ है।*
*👨👨👦👦🔔👉 शुद्ध विवाह मुहूर्त 10 व 12 मार्च में मुहूर्त है। 🔔👉 वाहन खरीद मुहूर्त 05,06, 08,09 , 16,23, 27 मार्च को है।🏠👉 प्रापर्टी मुहूर्त 02,03, 08, 09,13, 21,26, 27 ,28 फरवरी को है।✅👉 गृह प्रवेश मुहूर्त 04,06,14 मार्च को है।*
*🐎✍️ पंचक 16 से 20 जनवरी को है।*
*🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
*🔑“संस्कार शिक्षा के”🔑*
*👨👨👦👦धन जीवन को साधन देता है, पर उद्देश्य नहीं। वैभव सुविधा दे सकता है, पर संतोष नहीं। सच्ची अमीरी तब जन्म लेती है जब मनुष्य अपनी संपन्नता को दूसरों की मुस्कानों से जोड़ देता है। कभी-कभी एक साधारण-सी मुलाक़ात हमारी पूरी सोच बदल देती है।*
महानगर की चकाचौंध में पला-बढ़ा आर्यमान सिंघानिया एक बड़े उद्योगपति राजवीर सिंघानिया का इकलौता पुत्र था। आलीशान गाड़ियाँ, महँगे शौक, देर रात तक चलने वाली पार्टियाँ—यही उसकी दुनिया थी। उसे लगता था कि जिंदगी का असली आनंद खर्च करने और दिखाने में है।
राजवीर जी अक्सर समझाते—
“बेटा, पैसा साधन है, साध्य नहीं।”
पर आर्यमान के लिए ये शब्द बस हवा की तरह थे।
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एक बरसाती शाम, सिग्नल पर उसकी गाड़ी रुकी। उसकी नज़र फुटपाथ के किनारे पड़ी—कुछ बच्चे टिमटिमाती स्ट्रीट लाइट के नीचे बैठकर पढ़ रहे थे। सामने खड़ी थी एक युवती—नंदिनी प्रकाश।
नंदिनी का व्यक्तित्व अत्यंत साधारण था—सादे सूती सलवार-कुर्ते में, बिना किसी आडंबर के। पर उसके चेहरे की सौम्य सुंदरता और आँखों का आत्मविश्वास उसे असाधारण बना रहे थे। उसकी आवाज़ में अपनापन था और शब्दों में दृढ़ता।
वह बच्चों से कह रही थी—
“गलतियाँ करना बुरा नहीं, कोशिश न करना बुरा है।”
आर्यमान अनायास गाड़ी से उतर आया।
“आप ये सब क्यों कर रही हैं? इससे क्या बदल जाएगा?”
उसने कुछ हल्के व्यंग्य से पूछा।
नंदिनी ने शांत मुस्कान के साथ उत्तर दिया—
“मैं पास की ही सोसायटी में रहती हूँ। एम.बी.ए. कर रही हूँ… पर डिग्री से पहले इंसान बनना जरूरी है। यहाँ आती हूँ क्योंकि अगर मेरे थोड़े-से समय से किसी एक बच्चे की भी दिशा बदल जाए, तो मेरी पढ़ाई सफल हो जाएगी।”
फिर उसने गंभीर होकर कहा—
“ मुझे पता है सब कुछ संभव नही, पर मेरी कोशिश से कुछ तो संभव है।”
उसकी बातों में बनावट नहीं थी—सिर्फ विश्वास था।
उस रात आर्यमान बेचैन रहा। आलीशान कमरे में भी उसे खालीपन महसूस हुआ। पहली बार उसने सोचा—“मेरे पास सब कुछ है, पर क्या मैं सच में खुश हूँ?”
अगले दिन वह फिर उसी स्थान पर गया। इस बार दर्शक नहीं, सहभागी बनकर।
धीरे-धीरे वह बच्चों को पढ़ाने में सहयोग करने लगा। किताबें लाया, स्टेशनरी बाँटी, अपने मित्रों को भी जोड़ा।
समय के साथ उसमें परिवर्तन स्पष्ट दिखने लगा।
अब उसकी रातें पार्टियों में नहीं, योजनाओं में बीतने लगीं।
अब उसका पैसा दिखावे में नहीं, बच्चों की शिक्षा में लगने लगा।
एक दिन उसने अपने पिता से कहा—
“पापा, मैं आपकी विरासत को आगे बढ़ाना चाहता हूँ… पर एक नई दिशा में।”
राजवीर जी ने बेटे की आँखों में पहली बार जिम्मेदारी की चमक देखी।
उन्होंने स्नेह से कहा—
“आज तुमने सच में मेरा नाम रोशन किया है।”
कुछ ही महीनों में आर्यमान और नंदिनी ने मिलकर एक संस्था की स्थापना की—
*“प्रेरणा दीप”।*
जहाँ सैकड़ों जरूरतमंद बच्चों को निःशुल्क शिक्षा, मार्गदर्शन और आत्मविश्वास का पाठ पढ़ाया जाने लगा।
नंदिनी का सरल सौंदर्य और दृढ़ संकल्प, तथा आर्यमान की संसाधन-सम्पन्नता—दोनों ने मिलकर उस छोटे-से प्रयास को एक बड़े अभियान में बदल दिया।
*🎪💖👨👨👦👦🔔🔑विशेष:-असली विरासत धन नहीं, संवेदनशीलता है।सच्ची सुंदरता रूप में नहीं, आत्मविश्वास और उद्देश्य में होती है। और जब संपन्नता सेवा से जुड़ जाती है, तब समाज में परिवर्तन की ज्योति अवश्य जलती है। हम संकल्प करते है कि आज से ही हम अपने परिवार से यह लाभकारी योजना आज से ही शुरू करेंगे।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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