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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒जल ही जीवन है ✍️🐒*
_हम सभी इस बात से भली भांति परिचित है कि जल है तो ही जीवन है। जल के बिना सब सूना है। सभी जीव-जंतु, इंसान अपनी प्यास बुझाने के लिए पानी पर ही आश्रित रहते हैं। इसके अभाव में वो कुछ दिन तक ही जीवित रह पाएंगे। लेकिन पूरा विश्व स्वच्छ पानी की समस्या से जूझ रहा है। विश्व की एक बड़ी आबादी को पीने योग्य पानी नही मिल पाता है।_
_यह सच है कि पृथ्वी पर बहुत जल है। इसका 71% भाग पानी से डूबा हुआ है। लेकिन पीने योग्य पानी की मात्रा बहुत कम है। पीने का शुद्ध पानी मात्र 1% ही है। यह ताजा और पीने योग्य पानी ग्लेशियर की जमी बर्फ से मिलता है लेकिन बढ़ती गर्मी और प्रदूषण के कारण ग्लेशियर भी पिघल रहे हैं, जिसकी वजह से पानी जरूरत से ज्यादा व्यय हो रहा है।_
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हमारे जिंदगी में पानी कितना महत्वपूर्ण है पढ़कर आप भी चिंतन कीजिये:-
*एक लोटा पानी*
"मुझे नहाने के बहाने पानी बर्बाद करने, नल खुला छोड़ देने या पानी पीने के नाम पर थोड़ी-थोड़ी देर में पानी फेंकने की बुरी आदत थी। समझ बढ़ रही थी लेकिन मेरी इस आदत में कोई सुधार नहीं हो रहा था, जबकि इस बुरी आदत के कारण कई बार पिताजी से मार खाई थी। मां भी इस हरकत से इतनी तंग थीं कि हर रोज पानी बचाने की नसीहत देती थीं। मां की बातों का भी मुझ पर कोई असर नहीं पड़ता था। मैं तो पानी बर्बाद करने में ही खुश होता था। कक्षा 9 में पढ़ने के दौरान मेरी परीक्षाएं बोर्ड परीक्षाओं के बाद हुईं। इसके बाद विद्यालय बंद हो गए। मैंने छुट्टियों में नानी के घर जाने की बात कही। पिताजी मेरी बात मान गए। अंत में वह दिन आ गया जब मैं पिताजी के साथ मोटर साइकिल से नानी के घर जाने के लिए निकला।
गर्मी की तपती दोपहरी थी और हम लोग आधा सफर पार कर चुके थे कि अचानक मोटर साइकिल लड़खड़ाई। देखा तो पता चला कि अगला टायर पंचर हो गया था। यह घटना ऐसी जगह हुई थी, जहां एक भी दुकान नहीं थी।अब पैदल चलने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं था। गर्म हवाओं भरी तेज धूप में लगभग दो किमी पैदल चलने के बाद मेरा शरीर पसीने से भींग गया। प्यास के मारे गला सूख रहा था। चारों तरफ सिर्फ जंगल ही जंगल था। न कोई नल और न ही कोई मकान। मैंने पिताजी से कहा कि अब मुझसे चला नहीं जा रहा है तो उन्होंने हिम्मत बंधाते हुए कहा कि बस थोड़ी दूर की बात है। फिर पानी मिल जाएगा। बड़ी हिम्मत से मैं कुछ दूर चल पाया और लड़खड़ाकर बैठ गया।
पिताजी समझ गए कि अब अगर इसे पानी नहीं मिला तो यह बेहोश हो जाएगा। उन्होंने एक बार फिर मेरी हिम्मत बढ़ाई लेकिन मैं तो जैसे बेजान हो चुका था। तभी पिताजी को दूर खेतों में एक झोपड़ी दिखाई पड़ी।उन्होंने मुझे सड़क पर ही लिटा दिया और झोपड़ी की तरफ पानी लेने के लिए दौड़े। झोपड़ी के करीब एक
हेन्ड पंप था। हिम्मत करके मैं भी पिताजी के पीछे-पीछे झोपड़ी की ओर गया। हेन्ड पंप के पास पहुंचा तो पिताजी ने हेन्ड पंप चलाया लेकिन दुर्भाग्य की बात थी कि हेन्ड पंप खराब निकला। अब मैं फूट-फूटकर रोने लगा। पानी की क्या कीमत होती है, इसका सबक मुझे मिल चुका था। अब तो प्राण निकलने ही वाले थे कि एक बूढ़ा झोपड़ी से बाहर आया और मुझे हेन्ड पंप के पास प्यास से तड़पता देखकर वह सब कुछ समझ गया।
वह झोपड़ी के अंदर गया और एक लोटा पानी लेकर आया। मैंने पानी पीकर अपनी प्यास बुझाई। अब मेरी आंखों में चमक लौटने लगी। मुझे पानी का मोल समझ आ गया था।
इस घटना के बाद मैंने प्रतिज्ञा ली की पानी की एक बूंद भी बेकार नहीं करूंगा और न ही करने दूंगा। अब मैं जहां भी पानी बर्बाद होते देखता हूं तो उस घर के सदस्यों को पानी की जरूरतों के बारे में बताता हूं। पानी बचाना मेरे जीवन का उद्देश्य बन चुका है।
*🙏 जल है तो ही जीवन है। जल के बिना सब सूना है। भव्य आत्माओं, हम भी प्रण करें कि पानी व्यर्थ नहीं करेंगे और लोगों को इसके बारे में जागरूक करेंगे । एक महत्वपूर्ण बात यह है कि जो व्यक्ति विशेष जितना अधिक पानी खर्च करेगा,उसका उतना अधिक पैसा खर्च होगा ।जो भी अत्याधिक पानी का अपव्यय करते है,उनका पैसा भी व्यर्थ के कार्यों में खर्च होता है।यह प्रकृति का नियम है। अतः हमसभी अपनी आवश्यकता के अनुसार ही पानी को खर्च करें।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजियें।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वों पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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