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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 कर्मो की पोटली ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️1. मार्गशीर्ष कृष्ण दशमी 19 नवंबर 2022 शनिवार को अंतिम तीर्थंकर वर्तमान में शासन नायक सभी के विघ्न हरता 1008 श्री महावीर भगवानजी का तप कल्याणक महोत्सव हैं। नोट: -यह तिथी जयपुर पंचांग जैन दर्शन के अनुसार ली गई है।आप सभी अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार तिथि निर्धारित करें।*
*👨👩👦👦आप सभी सपरिवार इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्तिनुसार उत्सव मनाकर जीवन सफल करें।*
*एक बार एक दुःखी भक्त अपने ईश्वर से शिकायत कर रहा था। "आप मेरा ख्याल नहीं रखते ,मै आपका इतना बड़ा भक्त हूं। आपकी सेवा करता हूं।रात-दिन आपका स्मरण करता हूं।फिर भी मेरी जिंदगी में ही सबसे ज्यादा दुःख क्यों?*
*परेशानियों का अम्बार लगा हुआ है।एक ख़तम होती नहीं कि दूसरी मुसीबत तैयार रहती है।दूसरो कि तो आप सुनते हो।उन्हें तो हर ख़ुशी देते हो।देखो आप ने सभी को सारे सुख दिए हैं, मगर मेरे हिस्से में केवल दुःख ही दिए।*
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से करें।✍️*
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भगवान् उसे समझाते हैं, *"नहीं ऐसा नहीं है बेटा सबके अपने-अपने दुःख -परेशानिया है। अपने कर्मो के अनुसार हर एक को उसका फल प्राप्त होता है। यह मात्र तुम्हारी गलतफहमी है।*
लेकिन नहीं। भक्त है कि सुनने को राजी ही नहीं।
आखिर अपने इस नादान भक्त को समझा -समझा कर थक चुके भगवान् ने एक उपाय निकाला वे बोले। *"चलो ठीक है मै तुम्हे एक अवसर और देता हूं, अपनी किस्मत बदलने का।*
*यह देखो यहां पर एक बड़ा सा , पुराना पेड़ है।इस पर सभी ने अपने -अपने दुःख-दर्द और तमाम परेशानियों,तकलीफे, दरिद्रता, बीमारियाँ तनाव, चिंता आदि सब एक पोटली में बांध कर उस पेड़ पर लटका दिए है।*
*जिसे भी जो कुछ भी दुःख हो , वो वहा जाए और अपनी समस्त परेशानियों की पोटली बना कर उस पेड़ पर टांग देता है। तुम भी ऐसा ही करो , इस से तुम्हारी समस्या का हल हो जाएगा।*
*"भक्त तो खुशी के मारे उछल पडा।"धन्य है प्रभु जी धन्य है। अभी जाता हूं मै। "*
तभी प्रभु बोले, *"लेकिन मेरी एक छोटी सी शर्त है।"*
*" कैसी शर्त भगवन ?"*
*"तुम जब अपने सारे दुखो की , परेशानियों की पोटली बना कर उस पर टांग चुके होंगे तब उस पेड़ पर पहले से लटकी हुई किसी भी पोटली को तुम्हे अपने साथ लेकर आना होगा। वो तुम्हारे लिए होगी .."*
*भक्त को थोड़ा अजीब लगा लेकिन उसने सोचा चलो ठीक है। फिर उसने अपनी सारी समस्याओं की एक पोटली बना कर पेड़ पर टांग दी।चलो एक काम तो हो गया अब मुझे जीवन में कोई चिंता नहीं। लेकिन प्रभु जी ने कहा था की एक पोटली जाते समय साथ ले जाना।*
*ठीक है। कौनसी वाली लू ...यह छोटी वाली ठीक रहेगी। दुसरे ही क्षण उसे ख्याल आया मगर पता नहीं इसमें क्या है। चलो वो वाली ले लेता हूं। अरे बाप रे! मगर इसमें कोई गंभीर बिमारी निकली तो। नहीं नहीं ..अच्छा यह वाली लेता हूं। मगर पता नहीं यह किसकी है और इसमें क्या क्या दुःख लिखे होंगे।"*
हे भगवान् इतना कन्फ्यूजन।वो बहुत परेशान हो गया सच में " *बंद मुट्ठी लाख की ..खुल गयी तो ख़ाक की।*
*जब तक पता नहीं है की दूसरो की पोटलियों में क्या दुःख -परेशानियां ,चिंता मुसीबतें है तब तक तो ठीक लग रहा था। मगर यदि इनमे अपने से भी ज्यादा दुःख निकले तो।*
*हे भगवान् कहाँ हो।*
*भगवान् तुरंत आ गए " क्यों क्या हुआ पसंद आए वो उठा लो ..."*
*"नहीं- नहीं प्रभु क्षमा कर दो ..में नादान था जो अपने को सबसे दुखी समझ रहा था .. यहां तो मेरे जैसे अनगिनत है , और मुझे यह भी नहीं पता की उनका दुःख -चिंता क्या है ....मुझे खुद की परेशानियों , समस्याए कम से कम मालुम तो है ..., नहीं अब मै निराश नहीं होउंगा ...सभी के अपने -अपने दुःख है , मै भी अपनी चिंताओं -परेशानियों का साहस से मुकाबला करूंगा , उनका सामना करूंगा न की उनसे भागूंगा .।*
*धन्यवाद प्रभु आप जब मेरे साथ है तो हर शक्ति मेरे साथ है।*
नोट:- इस पेड़ पर अनेक पोटली इसलिए थी कि आप जैसे बुध्दीमानों की विश्व में कमी नहीं होने से वह स्वयं के दु:खो की पोटली तो बांध गया किन्तु दूसरी पोटली नहीं ले गया। इस कारण से वह वर्तमान में जितना दुःखी था उससे अधिक इस समय दुःखी हैं।
भगवान् ने कहा यह *एक्सचेंज ऑफर* लौकिक नहीं। सदा के लिए सबके लिए खुला है।
*🎪⏰👪🔐✅विशेष: -भव्य आत्माओं, हमें विश्व की किसी भी शक्ति से नहीं डरना है। हमें मात्र एक ख्याल रखना है कि मेरे द्वारा किए गए कर्मो से मुझे व अन्य किसी भी जीव-अजीव को किसी प्रकार की तकलीफ ना हो। आपने इस नियम का जितना पालन करते जाओगे उतने सुखी होते जाओगे। यही प्रकृति का पहला व अंतिम नियम है।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजियें।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वों पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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