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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 मेरी असफलता का कारण ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️1. कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा कल 8 नवंबर 2022 मंगलवार को तीसरे तीर्थंकर 1008 श्री संभवनाथ भगवान जी का जन्म कल्याणक महोत्सव हैं।*
*👨👩👦👦आप सभी सपरिवार इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्तिनुसार उत्सव मनाकर जीवन सफल करें।*
अमर एक मल्टी नेशनल कंपनी का ग्रुप लीडर था। काम करते-करते उसे अचानक ऐसा लगा की उसके टीम में मतभेद बढने लगे हैं। और सभी एक-दूसरे को नीचा दिखाने में लगे हुए हैं। इससे निबटने के लिए उसने एक तरकीब सोची।
उसने एक मीटिंग बुलाई और टीम के सदस्यों से कहा –रविवार को आप सभी के लिए एक साइकिल रेस का आयोजन किया जा रहा है। कृपया सब लोग सुबह सात बजे अशोक नगर चौराहे पर इकठ्ठा हो जाइएगा।
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तय समय पर सभी अपनी-अपनी साइकलों पर इकठ्ठा हो गए।
अमर ने एक-एक करके सभी को अपने पास बुलाया और उन्हें उनका लक्ष्य बता कर स्टार्टिंग लाइन पर तैयार रहने को कहा। कुछ ही देर में पूरी टीम रेस के लिए तैयार थी, सभी काफी उत्साहित थे और रूटीन से कुछ अलग करने के लिए अमर को थैंक्स कर रहे थे।
अमर ने सीटी बजायी और रेस शुरू हो गयी।
बॉस को आकर्षित करने के लिए हर कोई किसी भी कीमत पर रेस जीतना चाहता था। रेस शुरू होते ही सड़क पर अफरा-तफरी मच गयी… कोई दाएं से निकल रहा था तो कोई बाएँ से… कई तो आगे निकलने की होड़ में दूसरों को गिराने से भी नहीं चूक रहे थे।
इस हो-हल्ले में किसी ने अमर के निर्देशों का ध्यान ही नहीं रखा और भेड़ चाल चलते हुए सबसे आगे वाले साइकिलिस्ट के पीछे-पीछे भागने लगे।
पांच मिनट बाद अमर ने फिर से सीटी बजायी और रेस ख़त्म करने का निर्देश दिया। एका -एक सभी को रेस से पहले दिए हुए निर्देशों का ध्यान आया और सब इधर-उधर भागने लगे। लेकिन अमर ने उन्हें रोकते हुए अपने पास आने का इशारा किया।
सभी बॉस के सामने मुंह लटकाए खड़े थे और रेस पूरी ना कर पाने के कारण एक-दूसरे को दोष दे रहे थे।
अमर ने मुस्कुराते हुए अपनी टीम की ओर देखा और कहा-
“अरे क्या हुआ? इस टीम में तो एक से एक चैंपियन थे पर भला क्यों कोई भी व्यक्ति इस अनोखी साइकिल रेस को पूरा नहीं कर सका?”
अमर ने बोलना जारी रखा- “मैं बताता हूँ क्या हुआ….दरअसल आप में से किसी ने भी अपने लक्ष्य की तरफ ध्यान ही नही दिया। अगर आप सभी ने सिर्फ अपने लक्ष्य पर ध्यान दिया होता तो आप सभी विजेता बन गये होते , क्योंकि सभी व्यक्ति का लक्ष्य अलग-अलग था। सभी को अलग-अलग गलियों में जाना था। हर किसी का लक्ष्य भिन्न था। आपस में कोई मुकाबला था ही नही।
लेकिन आप लोग सिर्फ एक दूसरे को नीचा दिखाने में लगे रहे, जबकि आपने अपने लक्ष्य को तो ठीक से समझा ही नही। ठीक यही माहौल हमारी टीम का हो गया है। आप सभी के अंदर वह अनोखी बात है, जिसकी वजह से टीम को आप की जरुरत है। लेकिन आपसी संघर्ष के कारण ना ही टीम और ना ही आप का विकास हो पा रहा है। आने वाला आपका कल, आपके हाथ में है। हम या तो एक-दूसरे की ताकत बन कर एक-दूसरे को विकास के पथ पर ले जा सकते है या आपसी संघर्ष के चक्कर में अपना और दूसरों का समय व्यर्थ कर सकते है।
मेरी आप सबसे यही निवेदन है कि एक अकेले की तरह नहीं बल्कि एक संगठन की तरह काम करिए…याद रखिए अकेला खिलाड़ी बनने से कहीं ज्यादा जरूरी एक टीम का खिलाड़ी बनना है।”
*🛕🌞⏰🔑👪विशेष :- भव्य आत्माओं, इस कहानी के माध्यम से हमें स्वयं को यह समझना आवश्यक है कि आज आपका लक्ष्य क्या है।आज का प्रत्येक व्यक्ति सोशल मीडिया, फिल्म व अन्य घरेलू वातावरण से अनेक प्रकार के समाचारों को ग्रहण करता है। उसके बाद वह उसी के अनुसार घर हो आफिस वहां पर वह लोगों के साथ नकारात्मक व्यवहार करता है। स्वयं को ही भगवान मानता है। वह व्यक्ति विशेष अपने लक्ष्य को भूलकर झूठी शान शौकत के चक्कर में अपना समय,धन व आयु के अनमोल पलों को खो देता है। अतः हमें अपने लक्ष्य को ध्यान में रखकर अपनी दैनंदिनी बनाना चाहिए। लोगों को देखकर आवश्यक सकारात्मकता को ग्रहण करना चाहिए।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन किजियें।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वों पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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