रविवार, 23 जनवरी 2022

मिथ्या गर्व का परिणाम

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒मिथ्या गर्व का परिणाम💐💐*
समुद्र तट के किसी नगर में एक धनवान वैश्य के पुत्रों ने एक कौआ पाल रखा था | वह उस कोए को बार-बार अपने भोजन से बचें अन्न देते थे | उनकी जूठन खाने वाला वह कौआ स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन खाकर खूब मोटा हो गया था | इससे उसका अहंकार बहुत बढ़ गया | वह अपने से श्रेष्ठ पक्षियों को भी तुच्छ समझने और उनका अपमान करने लगा |
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एक दिन समुद्र तट पर कहीं से उड़ते हुए आकर कुछ हंस उतरे | वैश्य के पुत्र उन हसों की प्रशंसा कर रहे थे | यह बात कौए से सही नहीं गई | वह उन हसों के पास गया और उसे उनमें जो सर्वश्रेष्ठ हंस प्रतीत हुआ | उससे बोला -” मैं तुम्हारे साथ प्रतियोगिता करके उड़ना चाहता हूं |”

हैंस ने उसे समझाया – ” भैया ! हम तो दूर-दूर उड़ने वाले हैं | हमारा निवास मानसरोवर यहां से बहुत दूर है | हमारे साथ प्रतियोगिता करने से तुम्हें क्या लाभ होगा | तुम हंसो के साथ कैसे उड़ सकते हो |”

कोए ने गर्व में आकर कहा – ” मैं उड़ने की सो गतियां जानता हूं | और प्रत्येक से सो योजन तक उड़ सकता हूं | उडीन, अवडीन, प्रडीन, डीन आदि अनेकों गतियों के नाम गिनाकर वह बकवादी कोआ बोला – ” बतलाओ ! इनमें से तुम किस गति से उड़ना चाहते हो |”

तब श्रेष्ठ हंस ने कहा – ” काक ! तुम तो बड़े निपुण हो | परंतु मैं तो एक ही गति जानता हूं | जिसे सब पक्षी जानते हैं, मैं उसी गति से उडूगा |

गर्वित कोए का गर्व और बढ़ गया – ” वह बोला अच्छी बात तुम जो गति जानते हो उसी से उड़ो |”

उस समय कुछ पंछी वहां और आ गए थे | उनके सामने ही हंस और कौआ दोनों समुद्र की ओर उड़े | समुद्र के ऊपर आकाश में वह कौआ नाना प्रकार की कलाबाजियां दिखाता, पूरी शक्ति से उड़ा और हस से कुछ आगे निकल गया | हंस अपनी स्वाभाविक मंद गति से उड़ रहा था | यह देखकर दूसरे कोए प्रसन्नता प्रकट करने लगे |

थोड़ी देर में ही कौए के पंख थकने लगे | वह विश्राम के लिए इधर-उधर वृक्ष युक्त द्वीपों की खोज करने लगा | परंतु उसे उस अनंत सागर के अतिरिक्त कुछ दिख नहीं पड़ता था | इतने समय में हंस उड़ता हुआ उससे आगे निकल गया था | कोए की गति मंद हो गई | वह अत्यंत थक गया, और ऊंची तरंगों वाले भयंकर जीवों से भरे समुंद्र की लहरों के पास गिरने की दशा में पहुंच गया |

हंस ने देखा कि कौआ बहुत पीछे रह गया है, तो रुक गया | उसने कौए के समीप आकर पूछा – ” काक ! तुम्हारी चौच और पंख बार-बार पानी में डूब रहे हैं | यह तुम्हारी कौन सी गति है |

हंस की व्यंग्य भरी बात सुनकर कौआ बड़ी दीनता से बोला – ” हंस ! हम कोए केवल कांव-कांव करना जानते हैं | हमें भला दूर तक उड़ना क्या आएगा | मुझे अपनी मूर्खता का दंड मिल गया | कृपया करके अब मेरे प्राण बचा लो |

जल से भीगे अचेत और अधमरे कोए पर हंस को दया आ गई | पैरों से उसे उठाकर हंस ने उसे पीठ पर रख लिया और उसे लादे हुए उड़कर वहां आया जहां से दोनों उड़े थे | हंस ने कौए को उसके स्थान पर छोड़ दिया |
*🕉️🌞▶️👨‍👩‍👧‍👦✍️विशेष सत्य :- आज वर्तमान में हममें से 90% लोग अपने पदों का व अन्य बातों का अभिमान करते हैं। अपने क्रियाकलापों से  आप स्वयं का आकलन करके  निर्धारित कर सबसे पहले अपना मनुष्य भव सार्थक करें। कोई भी व्यक्ति विशेष अपना कल्याण न करते हुए दुनिया को सुधारने की चिंता में प्रयास कर रहा है।बस यही असफलता व्यक्ति की सबसे बड़ी समस्या है।समस्या व्यक्ति स्वयं है, समाधान भी बाहर नहीं है।अतः इस समस्या का चिंतन अवश्य करें।स्वयं का सुधार ही विश्व का सुधार है।*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
*🕉️जैनम् जयतु शासनम्🕉️*
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