सोमवार, 17 जनवरी 2022

सतकर्मो की जीत

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒सतकर्मों की जीत💐💐*

वह दिल्ली के लोधी कॉलोनी में एक मध्यम वर्गीय परिवार में पले-बढ़ें।
उनके पिता एक सरकारी सेवक थे और उनका निवास स्थान भी सरकारी था।
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वह दयाल सिंह कॉलेज गए और पढ़ाई पूरी होने के बाद, अपना खुद का व्यवसाय शुरू किया। एक समय ऐसा भी था, जब वह 'रसना' ब्रांड के इकलौते वितरक थे। उनका लाजपत नगर में एक बड़ा गोदाम भी था, जिसमें 7-8 ऑटो थे, पूरे दिल्ली में रसना की डिलीवरी करते। उनका नाम, हर बाजार में लोग जानते थे। ज़िन्दगी खुशनुमा थी।
फिर वक्त ने करवट बदली और 1984 के दंगे हुए। उन्होंने अपना गोदाम, 8 ऑटो और यहां तक ​​कि डीलरशिप भी खो दी। कई खाद्य कंपनियों के साथ काम करने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी। इसलिए उन्होंने एक टैक्सी खरीदी,, और उसे चलाकर जीवन फिर से शुरू किया।
छह-सात साल बाद मसूरी से लौटते समय उनका एक भयानक एक्सीडेंट हो गया।
13 दिन से कोमा में थे। देहरादून के एक अस्पताल में होश आया, तो पता चला घुटने, रिब केज और एक हाथ की हालत बहुत बुरी थी।
सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों की कोशिश से, वह 3 महीने में ठीक हो गए। इसके बाद, 3.5 महीने तक फिजियो और व्यायाम चला। इतने महीनों की निरंतर कोशिशों के बाद वह अपने पैरों पर तो खड़े हो गए, लेकिन गाड़ी की हालत अब भी पंचर थी। इसलिए उन्होंने एक ऑटो खरीदी। लेकिन कुछ साल बाद फिर उन्हें दिल का दौरा पड़ा।
समय लगा, लेकिन वह पूरी तरह से ठीक हो गए। अब वह ऑटो चलाते हैं, कभी किसी यात्री को मना नहीं करते, कभी-कभी ग्राहकों से ठगे भी जाते हैं। लेकिन फिर भी मुस्कुराते हैं और विनम्रता से कहते हैं, "वाहे गुरु"!
उनकी कहानी को पढ़ने के बाद, मुझे यह एहसास हुआ, *चाहे आपका जीवन कितना भी कठिन क्यों न हो, हौसला रखिए और इच्छाशक्ति को मजबूत रखिए। क्योंकि अँधेरा चाहे कितना भी घना हो, बस एक रौशनी की किरण उसे मिटा सकती है।इसलिये जीवन में सतकर्म करते हुए जीवन व्यतीत किजिये, आपसभी का वर्तमान व भविष्य भी सुखमय होता जायेगा।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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