मंगलवार, 18 जनवरी 2022

निस्वार्थ सेवा का फल

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒निस्वार्थ सेवा का फल 💐💐*

कबीर नाम का मल्लाह नदी किनारे अपनी नाव ठीक कर रहा था। अचानक एक बच्चा उसके पास रोता हुआ आया और उससे बोला, “क्या तुम मेरी मदद कर सकते हो?” कबीर ने पूछा, “क्या हुआ है?” बच्चा बोला, “मेरी मां बहुत बीमार है, उस पार तक उसे ले जाना है।” कबीर को उस बच्चे पर दया आई और उसने उन दोनों को नदी पार पहुंचा दिया। बच्चे ने उसे धन्यवाद दिया। कबीर घर लौट आया।  
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शाम ढले जैसे ही वह खाना-खाने बैठा कि बाहर दरवाजे पर उसे आवाज आई, “भूखा हूं, कुछ खाने को दे दो।” कबीर ने अपनी पत्नी से कहा, “जाओ, उस भूखे को खाने को दे दो।” लेकिन वह गुस्से से बोली, “मेरी समझ में नहीं आता कि तुम लोगों के साथ जरूरत से ज्यादा हमदर्दी क्यों करते हो? अब बेटी की शादी आने वाली है, देखती हूं कौन मदद करता है तुम्हारी।”

कबीर मुस्कराते हुए बोला, “भाग्यवान ! मैं सोचता हूं कि मैं उनकी जगह होता, तो उनसे क्या उम्मीद करता।”

बात आई-गई हो गई। बेटी की शादी सिर पर आ गई। चार दिन रह गए थे। मन थोड़ा परेशान था। रोज की तरह सुबह कबीर नदी किनारे पहुंचा। जैसे ही वह नाव लेकर पानी की तरफ बढ़ा कि उसकी नजर नाव में पड़ी एक लाल कपड़े की थैली पर गई। उसने थैली खोली, तो हैरान रह गया उसमें सोने के सिक्के थे। वह सोच में पड़ गया, आख़िर इसे यहां कौन रख गया? तभी उसे आवाज आई, “कुछ दिन पहले जिस बच्चे की तुमने मदद की थी, उसी ने तुम्हें ईनाम भेजा है। वह बच्चा कोई आम इंसान नहीं था। बच्चे के रूप में एक अदृश्य शक्ति थी वह । वह जानना चाहती थी कि कितने दयालु हो तुम। प्रत्येक की परीक्षा होती है एक दिन ऐसी ही।” 

सच ही कहा है किसी ने, जिसका हृदय दया से भरा है, भगवान हर समय उसके साथ रहते हैं। उसकी सारी आवश्यकताए पूरी होती जाती हैं।
*🕉️👨‍👩‍👧‍👦🌐🌞✍️सीख:: - हमें अपने जीवन में सभी लोगों की आवश्यकताओं को देखते हुए अपनी शक्तिनुसार निस्वार्थ सेवा करना चाहिए।कब हमारा पुण्यप्रबल हो ओर हमें इस जीवन में सन्मार्ग मिल जाये या कोई सच्चा मार्ग बता दें।*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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