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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩🚒ईश्वर की पूजा💐💐*
मन को वश करके प्रभु चरणों मे लगाना बडा ही कठिन है ।शुरुआत मे तो यह इसके लिये तैयार ही नहीं होता है । लेकिन इसे मनाए कैसे?
एक शिष्य थे किन्तु उनका मन किसी भी भगवान की साधना में नही लगता था और साधना करने की इच्छा भी मन मे थी ।
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वे सतगुरु महाराज के पास गये और कहा कि गुरुदेव मेरा मन लगता नहीं और साधना करने का मन होता है ।कोई ऐसी साधना बताए जो मन भी लगे और साधना भी हो जाये ।
गुरु ने कहा तुम कल आना ।दुसरे दिन वह गुरु के पास पहुँचा तो गुरु ने कहा सामने रास्ते मे कुत्ते के छोटे बच्चे हैं उसमे से दो बच्चे उठा ले आओ और उनकी हफ्ताभर देखभाल करो ।
गुरु के इस अजीब आदेश सुनकर वह भक्त चकरा गया लेकिन क्या करे, गुरु का आदेश जो था।
उसने 2 पिल्लों को पकड कर लाया लेकिन जैसे ही छोडा वे भाग गये।उसने फिरसे पकड लाया लेकिन वे फिर भागे ।
अब उसने उन्हे पकड लिया और दुध रोटी खिलायी ।अब वे पिल्ले उसके पास रमने लगे।
हप्ताभर उन पिल्लो की ऐसी सेवा यत्न पूर्वक की कि अब वे उसका साथ छोड नही रहे थे ।वह जहा भी जाता पिल्ले उसके पीछे-पीछे भागते, यह देख गुरु ने दुसरा आदेश दिया कि इन पिल्लों को भगा दो।
भक्त के लाख प्रयास के बाद भी वह पिल्ले नहीं भागे तब गुरु ने कहा देखो बेटा शुरुआत मे यह बच्चे तुम्हारे पास रुकते नही थे लेकिन जैसेही तुमने उनके पास ज्यादा समय बिताया ये तुम्हारे बिना रहनें को तैयार नही है।
ठीक इसी प्रकार खुद जितना ज्यादा वक्त भगवान के पास बैठोगे, मन धीरे-धीरे भगवान की सुगन्ध,आनन्द से उनमे रमता जायेगा।
हम अक्सर चलती-फिरती पूजा करते है तो भगवान में मन कैसे लगेगा?
जितनी ज्यादा देर ईश्वर के पास बैठोगे उतना ही मन ईश्वर रस का मधुपान करेगा और एक दिन ऐसा आएगा कि उनके बिना आप रह नही पाओगे ।*
शिष्य को अपने मन को वश में करने का मर्म समझ में आ गया और वह गुरु आज्ञा से पंचपरमेष्ठी का भजन सुमिरन करने चल दिया।
*बिन सतगुरु सत्यज्ञान कहां से पाऊं*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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