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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩🚒निंदा करने का फल💐💐*
एक बार एक व्यक्ति ने फैसला लिया कि वह प्रतिदिन 100 अंधे लोगों को खीर खिलाया करेगा।
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एक दिन खीर वाले दूध में सांप ने मुंह डाला और दूध में विष डाल दी। ज़हरीली खीर को खाकर 100 के 100 अंधे व्यक्ति मर गए। व्यक्ति बहुत परेशान हुआ कि मुझे 100 आदमियों की हत्या का पाप लगेगा।
वह व्यक्ति परेशानी की हालत में अपने राज्य को छोड़कर जंगलों में भक्ति करने के लिए चल पड़ा, ताकि इस पाप की माफी मिल सके। रास्ते में एक गांव आया। व्यक्ति ने चौपाल में बैठे लोगों से पूछा कि क्या इस गांव में कोई भगवान की भक्ति भाव वाला परिवार है ताकि उसके घर रात्रि को विश्राम किया जा सके?
चौपाल में बैठे लोगों ने बताया कि इस गांव में दो बहन भाई रहते हैं जो नियम से रामजी भगवान की खूब पूजा करते हैं।समय के अनुसार रामभक्ति से सभी के कष्टों को दूर करने में सहयोगी भी बनते है। वह व्यक्ति उन दोनों की स्वीकृति लेकर उनके घर रात में ठहर गया।
सुबह जब वह व्यक्ति उठा तो लड़की पूजा पर बैठी हुई थी। इससे पहले लड़की का नित्य कर्म था कि वह दिन निकलने से पहले ही पूजापाठ करती थी और सूर्योदय होने पर ही जलपान तैयार करती थी।
लेकिन उस दिन वह लड़की बहुत देर तक पूजा पर बैठी रही। जब लड़की उठी तो उसके भाई ने कहा कि बहन तू इतनी देर से उठी है। अपने घर मुसाफिर आया हुआ है और उसे जलपान करके दूर जाना है।
लड़की ने जवाब दिया कि भैया ऊपर एक मामला उलझा हुआ था। धर्मराज को किसी उलझन भरी स्थिति पर कोई फैसला लेना था और मैं वह फैसला सुनने के लिए रुक गयी थी। इसलिए देर तक ध्यान करती रही।
तो उसके भाई ने पूछा ऐसी क्या बात थी? तो लड़की ने बताया कि फलां राज्य का व्यक्ति विशेष अंधे व्यक्तियों को खीर खिलाया करता था। लेकिन सांप के दूध में विष डालने से 100 अंधे व्यक्ति मर गए। अब धर्मराज को समझ नहीं आ रहा कि अंधे व्यक्तियों की मौत का पाप उस व्यक्ति विशेष को लगे, सांप को लगे या दूध बिना ढ़के छोड़ने वाले रसोइये को लगे।
व्यक्ति भी सुन रहा था। व्यक्ति को अपने से संबंधित बात सुन कर दिलचस्पी हो गई और उसने उस बहन से पूछा कि फिर क्या फैसला हुआ ?
लड़की ने बताया कि अभी तक कोई फैसला नहीं हो पाया था। तो व्यक्ति ने पूछा कि क्या मैं आपके घर एक रात के लिए और रुक सकता हूं ? दोनों बहन भाइयों ने खुशी से उसको हां कर दी।
व्यक्ति अगले दिन के लिए रुक गया, लेकिन चौपाल में बैठे लोग दिन भर यही चर्चा करते रहे कि कल जो व्यक्ति हमारे गांव में एक रात रुकने के लिए आया था और कोई भक्ति भाव वाला घर पूछ रहा था, उसकी भक्ति का नाटक तो सामने आ गया है।
रात काटने के बाद वह इसलिए नहीं गया क्योंकि जवान लड़की को देखकर उस व्यक्ति की नियत खोटी हो गई। इसलिए वह उस सुन्दर और जवान लड़की के घर पक्के तौर पर ही ठहरेगा या फिर लड़की को लेकर भागेगा।
दिनभर चौपाल में उस व्यक्ति विशेष की निंदा होती रही।
अगली सुबह लड़की फिर ध्यान पर बैठी और रूटीन के टाइम अनुसार उठ गई। तो व्यक्ति ने पूछा- "बेटी अंधे व्यक्तियों की हत्या का पाप किसको लगा ?"
तो लड़की ने बताया कि- "वह पाप तो हमारे गांव के चौपाल में बैठने वाले लोग बांट के ले गए।"
*शिक्षा:- आज वर्तमान में हमसभी दु:खी है।क्या इसका कारण हम किसी की निंदा करने में या निंदा सुनने में अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं।स्वयं इस बात का अंतरंग से विचार करें। निंदा करना कितना घाटे का सौदा है? निंदक हमेशा दूसरों के पाप अपने सर पर ढ़ोता रहता है। और दूसरों द्वारा किये गए उन पाप-कर्मों के फल को भी भोगता है। अतः हमें सदैव निंदाकरने व निंदा सुनने से बचना चाहिए।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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