*🕉️सलाह⏰*

🕉️एक लोमड़ी ने नहर के किनारे खड़े ऊँट से पूछा “नहर का पानी कहाँ तक आता है?”
😓उसने जवाब दिया “घुटनों तक!”
💪जैसे ही लोमड़ी ने छलांग लगायी, डूबने लगी.. कभी गोते खाती तो कभी सर बाहर निकालती,
😇बड़ी मुश्किल से किनारे की एक चट्टान तक पहुंची।
🐱दूसरों की सलाह बाहर आते ही ग़ुस्से से बोली “तुमने तो कहा था कि पानी घुटनों तक आता है, लेकिन मैं तो पूरा डूब गयी?” ✍ऊँट ने जवाब दिया “हाँ पानी घुटनों तक ही आता है, लेकिन मेरे। ”

➡️हर किसी का तजुर्बा अलग है और वो उसी मुताबिक जवाब देता है, संभव है जो बातें उसके लिए फायदेमंद हो, दूसरों को नुक़सान पहुंचाए।
😛सिर्फ दूसरों के तजुर्बे को देखकर चलना आपको डुबो सकता है।
😓दूसरों की सलाह पर भी विचार करिये।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें