
वसीयतनामा⏰*
*😇आज ही वसीयतनामा(Will)बनाकर अपने परिवार को भविष्य में आने वाली मुसीबतों से बचाये*
➡️यह बङी विडंबना है कि भरतीय लोग सीधे-सादे व अनुभव न होने के कारण चार में से तीन भारतीय वसीयत बनाते ही नहीं। हमारे यहां यह परम्परा है ही नहीं ऐसे में वसीयत का न होना कानूनी पचड़ों की वजह बनता है. अदालतों में कितने ही मृतकों के परिजन जमीन और प्रॉपर्टी के लिए आपस में लड़ रहे हैं. इसलिए जीवित रहते हुए वसीयत जरूर बना देनी चाहिए. इसके कर्इ फायदे हैं. यह परिवार के सदस्यों को बेवजह की कलह-क्लेश से बचाती है. वसीयत के बगैर मृतक के उत्तराधिकारियों को पैसे और *प्रॉपर्टी पर दावा करने के लिए अधिक समय और धन खर्च करना पड़ सकता है.* अतःआप अपनी वसीयत लिखकर अपने प्रियजनों को सुरक्षित रखें ताकि आपके रिश्तेदार या कोई अजनबी आपकी संपत्ति और धन में झूठी हिस्सेदारी का दावा न कर सकें। एक वसीयत की अनुपस्थिति में आपके परिवार के सदस्यों को आपकी संपत्ति पाने के लिए 5 साल तक का समय लग सकता है।

*👨👨👦👦बिना वसीयत* हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 के अनुसार, अगर पिता का स्वर्गवास बिना वसीयत बनाए हो जाता है। मृतक के सभी उत्तराधिकारी *पत्नी, बेटे, बेटीया, मां* की बराबर हिस्सेदारी होगी।
*🤗वह सब जो आपको वसीयत बनाने के लिए जानना चाहिए*
*🌝(1)* वसीयत(Will) का अर्थ है कि किसी व्यक्ति द्वारा अपनी संपत्ति के बंटवारे में (अपनी मृत्यु के बाद ) अपनी इच्छा की लिखित व वैधानिक घोषणा करना। वसीयत बनाना एक साधारण प्रक्रिया हैं। इसमें केवल एक कागज और पेन की जरूरत रहती हैं। बिना वकील आप स्वयं भी लिख सकते हैं।
*🌲(2)* नाबालिग या पागल व्यक्ति को छोड़कर कोई भी व्यक्ति वसीयत कर सकता है।
*😓(3)* सामान्य कागज पर लिखी गई वसीयत भी 100 फीसदी कानूनी रुप ये मान्य होती है। इसके लिए स्टाम्प नहीं लगता है क्योंकि ये स्टाम्प से मुक्त होता है किन्तु आजकल स्टाम्प की महत्ता इतनी बढ़ गयी है कि कहीं भी अगर बड़ों के स्थान पर अपना नाम चढ़वाना हो तो वहां स्टाम्प युक्त कागज को ही पक्के सबूत के रूप में लिया जाता है इसलिए सावधानी बरतते हुए वसीयतकर्ता अपने परिवारजन को आगे की परेशानियों से बचाने के लिए स्टाम्प का ही प्रयोग करते हैं। भारतीय कानून के तहत वसीयत लिखने का कोई तय फार्मेट(प्रारुप) नहीं है।
*☸(4)* अगर संपत्ति साझा नामों में हो, तो भी व्यक्ति अपने हिस्से के बारे में वसीयत कर सकता है।
*😛(5)* वसीयत करने वाले व्यक्ति को दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने चाहिए अथवा अपना अंगूठा लगाना चाहिए।
*🐱(6)* दो गवाहों द्वारा वसीयत सत्यापित की जानी चाहिए। पर यह ध्यान रहे कि जिनके नाम वसीयत कर रहे हैं वो गवाह नहीं होने चाहिए।
*👩🦰(7)* एक आदमी अपनी संपत्ति की कई बार वसीयत कर सकता है किन्तु जो वसीयत उसके जीवन में सबसे बाद की होती है वही महत्वपूर्ण होती है.
*✍(8)* अगर आपको भी अपने माता-पिता से विरासत में संपत्ति, जेवर या नकदी मिली है तो इस पर आपको *Income Tax नहीं चुकाना होता है.* अगर आपके नाम से किसी ने वसीयत किया था और आपको उससे संपत्ति या नकदी मिली है तो भी उस पर आपको इनकम टैक्स नहीं चुकाना पड़ता है. ऐसी संपत्ति से भविष्य में होने वाली कमाई या ब्याज से आमदनी पर आपको अपने Tax Slab के अनुसार टैक्स देना पड़ेगा.
*➡️(9)* वैसे वसीयत को पंजीकृत व नोटेरी कराना जरुरी नहीं है। इसकी सत्यता पर विवाद ना हो, इसके खोने की आशंका ना रहे अथवा इसके तथ्यों में कोई फेरबदल ना कर सके। यह संभावना हो तो रजिस्ट्रार/तहसीलदार से नोर्मल फीस देकर रजिस्टर्ड भी करा सकते हैं। भारत सरकार ने विल पर से स्टांप ड्यूटी हटा दी है।
🧘♀💪🧛♂*(10)* यदि कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति किसी बाहरी व्यक्ति के नाम लिख देता है यह भी पूर्णतया वैध रहेगी।
*👁(11)* ज्यादातर लोगों के बीच यह गलतफहमी है कि नॉमिनी ही वारिस होता है. दोनों में फर्क हैं.नॉमिनी आपकी संपत्ति की देखरेख करता है, जबकि वारिस के पास उसका मालिकाना अधिकार होता है.

*😃(12)* लॉयर्स और सीए के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म VAKILSEARCH व LAWRATO की ओर से लोगों को आसानी से वसीयत लिखने की किट मुहैया कराई जा रही है.आप ONLINE खरीद सकते हैं।
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*🌞मेरी सलाह🕉️*
➡️⏰यदि आपके पास समय नहीं हो तो आप अभी कागज और कलम ले और फटाफट एक बार तो अपनी समझ से वसीयत आज ही लिख दे। जब समय मिले तब Advocate/CA से सलाह वापस नई भी लिखा सकते हैं।
*🌞शुभम भवतु⏰*
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