मंगलवार, 14 फ़रवरी 2023

कर्म फल

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 कर्म फल ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🕉️1.फाल्गुन कृष्ण ग्यारस ,   गुरुवार दिनांक 16 फरवरी  2023 को प्रथम तीर्थंकर सभी को सुसंस्कार प्रदान करने वाले  ऋषभनाथ  भगवान जी का ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🪔2..फाल्गुन कृष्ण ग्यारस ,   गुरुवार दिनांक 16 फरवरी  2023 को  ग्यारवें तीर्थंकर सभी को परम पद प्रदान करने वाले  श्रेयांसनाथ  भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव फरवरी माह में आने वाली  14,16,17,19,22,24,26, व 27 तारीख को है।फरवरी माह में पांच तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*
*👨‍👩‍👦‍👦आप सभी सपरिवार इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्ति अनुसार उत्सव मनाकर अपने पापों को पुण्य में बदल कर जीवन सफल करें।*

एक बहेलियां ने तीर छोड़ा,  वह लता बल्लरियों की बाधाओं को चीरता, राजकुमार सुकर्णव के मस्तिष्क पर जा लगा। राजकुमार वही धराशाई हो गए। 
समस्त अंतापुर रो पड़ा अपने राजकुमार की याद में!ऐसा कोई प्रजाजन नहीं थी जिसने सुकर्णव की अर्थी देख आँसू ना बनाए हों। 

दाह संस्कार संपन्न हुआ। पुत्र शोक अब प्रतिशोध की ज्वाला में भड़क उठा और महाराज वेनुविकर्ण ने कारागृह से बंदी बहेलिया को उपस्थित करने का आदेश दिया। 
बहेरिया लाया गया। महाराज ने तड़पते हुए पूछा- दुष्ट बहेलियां! तूने राजकुमार का वध किया है, बोल तुझे मृत्युदंड क्यों न दिया जाए ?

बहेलिया ने एक बार सभा भवन में बैठे हर व्यक्ति पर दृष्टि दौड़ाई। फिर राजपुरोहित पर एक क्षण को उसकी दृष्टि ठहर गई। उसे कुछ याद आया -बहेलिए ने कहा -"महाराज मेरा इसमें क्या दोष?  मृत्यु ने राजकुमार को मारने का निश्चय किया था, मुझे माध्यम बनाया, मेरी बुद्धि भ्रमित की, और मैंने राजकुमार को कस्तूरी मृग समझकर तीर छोड़ दिया! जो दंड आप मुझे देना चाहते हैं, वही मृत्यु को दें। चाहे तो राजपुरोहित से पूछ ले! यह भी तो कहते हैं कि विधाता ने जितनी आयु लिख दी, उसे कोई घटा या बढ़ा नहीं सकता। घटनाएं तो मृत्यु के लिए मात्र माध्यम होती हैं।"

विकर्ण का क्रोध विस्मय में बदल गया। उन्होंने राजपुरोहित की ओर दृष्टि डाली तो लगा, कि सचमुच वे भी बहेलिया का मूक समर्थन कर रहे हैं। 

उन्होंने मृत्यु का आव्हान किया, मृत्यु उपस्थित हुई । महाराज ने उससे पूछा-" आपने राजकुमार को मारने का विधान क्यों रचा?"
"उनका काल आ गया था! मृत्यु बोली।"
तो फिर काल को बुलाया गया।
काल ने कहा,- "मैं क्या कर सकता था महामहिम ! राजकुमार के कर्मों का दोष था। कर्मफल से कोई बच नहीं सकता। राजकुमार ही उसके अपवाद कैसे हो सकते थे ?"
कर्म की पुकार की गई। 
उसने उपस्थित होकर कहा -"आर्य श्रेष्ठ!अच्छा हूँ या बुरा, मैं तो जड़ हूं। मुझे तो आत्म चेतना चलाती है, उसकी इच्छा ही मेरा अस्तित्व है । आप राजकुमार की आत्मा को ही बुला कर पूछ लें, उन्होंने मुझे क्रियान्वित ही क्यों किया? "

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और अंत में राजकुमार की आत्मा बुलाई गई ।दंड नायक ने प्रश्न किया-भन्ते! तुम कर्ता की स्थिति में थे, क्या यह सच है कि तुमने कोई ऐसा कार्य किया, जिसके फलस्वरूप तुम्हें अकाल, काल-कबलित होना पड़ा?

शरीर के बंधन से मुक्त, आकाश में स्थिर, 
राजकुमार की आत्मा थोड़ा मुस्कुराई ! फिर गंभीर होकर बोली -"राजन! पूर्व जन्म में, मैंने इसी स्थान पर मांस भक्षण की इच्छा से एक मृग का वध किया था। मृग में मरते समय प्रतिशोध का भाव था, उसी भाव ने व्याध को भ्रमित किया, इसीलिए व्याध का कोई दोष नहीं,ना मुझे काल ने मारा है। मनुष्य के कर्म ही उसे मारते और जलाते हैं, इसीलिए तुम मेरी चिंता छोडो़, कर्म की गति बड़ी गहन है। अपने कर्मों का हिसाब करो।भावी जीवन की प्रगति और उससे स्वर्ग मुक्ति, सब कर्म की गति पर ही आधारित है। सो तात!  तुम भी अपने कर्म सुधारो।

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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