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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒संत का मार्गदर्शन ✍️🐒*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव फरवरी माह में आने वाली 9,11, 13,14, 16,17, 19,22, 24,26, व 27 तारीख को है। पांच तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*
मैं एक सेठ के बारे में बहुत तो नहीं जानता, पर इतना तो जानता ही हूं कि वह पहले से ही सेठ नहीं था। वह तो एक गरीब आदमी था, झन्नु उसका नाम था।
झन्नु हमेशा झन्नाया रहता। बिना बात का झगड़ा करना तो उसके स्वभाव में ही था। किसी ने पूछ लिया कि झन्नु भाई टाईम क्या हुआ होगा? तो झन्नु झनझना जाता और कहता- यह घड़ी तेरे बाप ने ले कर दी है? यहाँ टाईम पहले ही खराब चल रहा है, तूं और आ गया मेरा टाईम खाने। भाग यहाँ से।
अब ऐसे आदमी के साथ कौन काम करे? न उसके पास कोई ग्राहक टिकता, न नौकर। यही कारण था कि वो जो भी काम करता था, उसमें उसे नुकसान ही होता था।
कहते हैं कि एक संत एक बार झन्नु के पास से गुजरे। वे कभी किसी से कुछ माँगते नहीं थे, पर न मालूम उनके मन में क्या आया, सीधे झन्नु के सामने आ खड़े हुए। बोले- बेटा! संत को भोजन करा देगा?
अब झन्नु तो झन्नु ही ठहरा। झन्ना कर बोला- मैं खुद भूखे मर रहा हूं, तू और आ गया। चल चल अपना काम कर।
संत मुस्कुराए और बोले- मैं तो अपना काम ही कर रहा हूं, बिल्कुल सही से कर रहा हूं। तुम ही अपना काम सही से नहीं कर रहे।
झन्नु झटका खा गया। उसे ऐसे उत्तर की उम्मीद नहीं थी। पूछने लगा- क्या मतलब?
संत उसके पास बैठ गए। बोले- बेटा! मालूम है तुम्हारा नाम झन्नु क्यों है? क्योंकि झन्नाया रहना और नुकसान उठाना, यही तुम करते आए हो।
अगर तुम अपना स्वभाव बदल लो, तो तुम्हारा जीवन बदल सकता है। मेरी बात मानो तो चाहे कुछ भी हो जाए, खुश रहा करो।
झन्नु बोला- महाराज! खुश कैसे रहूं? मेरा तो नसीब ही खराब है।
संत बोले- खुशनसीब वह नहीं जिसका नसीब अच्छा है, खुशनसीब वह है जो अपने नसीब से खुश है। तुम खुश रहने लगो तो नसीब बदल भी सकता है। तुम नहीं जानते कि कामयाब आदमी खुश रहे न रहे, पर खुश रहने वाला एक ना एक दिन कामयाब जरूर होता है।
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झन्नु बोला- महाराज! दुनिया बड़ी खराब है और मेरा ढंग ही ऐसा है कि मुझसे झूठ बोला नहीं जाता।
संत बोले- झन्नु! झूठ नहीं बोल सकते पर चुप तो रह सकते हो? तुम दो सूत्र पकड़ लो। मौन और मुस्कान। मुस्कान समस्या का समाधान कर देती है। मौन समस्या को आगे बढ़ने नहीं देती।
चाहे जो भी हो जाए, तुम चुप रहा करो, और मुस्कुराया करो। फिर देखो क्या होगा?
झन्नु को संत की बात जंच गई।
उसने जीवन में प्रथम बार किसी संत को भोजन पानी करवा कर उनसे बहुत कुछ ग्रहण किया।
भगवान की कृपा से व संत के मार्गदर्शन से उसका स्वभाव और भाग्य दोनों बदल गए।
*फल क्या मिला? समय बदल गया, झन्नु मौन और मुस्कान के सहारे चलते चलते नगर सेठ बन गया।अब वह अपने नगर में गरीबों के लिए मुफ्त शिक्षा व छोटे छोटे गृह उद्योगों का मुफ्त प्रशिक्षिण कर उन्हें शसक्त बना रहे है।*
आप टेलिविज़न नहीं हैं जो आपका रिमोट दूसरे के हाथ रहे। वह चाहे तो आप हंसें, वह चाहे तो रोएँ। हमारा चेहरा हमारा है। यह हंसेगा या रोएगा, इसका निर्णय दूसरा क्यों करे? अभी निर्णय करो, कि चाहे कुछ भी क्यों न हो जाए, हम सदा मुस्कुराएँगे। तब दुनिया में कोई भी आपके चेहरे की मुस्कान न छीन पाएगा। याद रहे-
"गुजरी हुई जिंदगी को कभी याद ना कर,
तकदीर में जो नहीं तो फ़रियाद ना कर।
जो होना होगा वो होकर ही रहेगा,
कल की फिक्र में आज हंसी बर्बाद न कर।"
*🎪🔔👪🪔⛳विशेष:-भव्य आत्माओं, आपको अपना जीवन सार्थक करना है तो जीवन में एक मार्गदर्शक गुरु निश्चित करना आवश्यक है। गुरु के निमित्त से हमें धनात्मक उर्जा प्राप्त होने से हमारा जीवन सुचारू रूप से चलता है।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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