सोमवार, 13 फ़रवरी 2023

गुरु की सीख

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 गुरु की सीख ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔नोट:-दिनांक 14 फरवरी  2023 को जयपुर पंचांग के अनुसार अष्टमी व नवमी तिथि है।*
*🕉️1.फाल्गुन कृष्ण नवमी,  मंगलवार दिनांक 14 फरवरी  2023 को  9 वें तीर्थंकर सभी को परम पद प्रदान करने वाले  पुष्पदंत  भगवान जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔⏰🎪 जैन तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव फरवरी माह में आने वाली  16,17,19,22,24,26, व 27 तारीख को है।फरवरी माह में पांच तीर्थंकर भगवन्तो के मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानी।*
*👨‍👩‍👦‍👦आप सभी सपरिवार इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्ति अनुसार उत्सव मनाकर अपने पापों को पुण्य में बदल कर जीवन सफल करें।*

एक बार की बात है -
संत तुकाराम अपने आश्रम में बैठे हुए थे। तभी उनका एक शिष्य, 
जो स्वभाव से  क्रोधी था
उनके समक्ष आया और बोला: गुरूजी, आप कैसे अपना व्यवहार इतना मधुर बनाये रहते हैं, ना आप किसी पे क्रोध करते हैं और ना ही किसी को कुछ भला-बुरा कहते हैं? 

कृपया अपने इस अच्छे व्यवहार का 
रहस्य बताइए?

संत बोले: मुझे अपने रहस्य के बारे में तो नहीं पता, पर मैं तुम्हारा रहस्य जानता हूं!

मेरा रहस्य! वह क्या है गुरु जी?: 
शिष्य ने आश्चर्य से पूछा।

तुम अगले एक हफ्ते में मरने वाले हो! 
संत तुकाराम दुखी होते हुए बोले।

कोई और कहता तो शिष्य ये बात मजाक में टाल सकता था, पर स्वयं संत तुकाराम के मुख से निकली बात को कोई कैसे काट सकता था? 
शिष्य उदास हो गया और गुरु का आशीर्वाद ले वहां से चला गया।

उस समय से शिष्य का स्वभाव बिलकुल बदल सा गया। वह हर किसी से प्रेम से मिलता और कभी किसी पे क्रोध न करता, अपना ज्यादातर समय ध्यान और पूजा में लगाता। वह उनके पास भी जाता जिससे उसने कभी गलत व्यवहार किया था और उनसे माफी मांगता। 
देखते-देखते संत की भविष्यवाणी को एक हफ्ते पूरे होने को आये।

शिष्य ने सोचा चलो एक आखिरी बार गुरु के दर्शन कर आशीर्वाद ले लेते हैं।

वह उनके समक्ष पहुंचा और बोला: गुरुजी, मेरा समय पूरा होने वाला है, 
कृपया मुझे आशीर्वाद दीजिए!

मेरा आशीर्वाद हमेशा तुम्हारे साथ है पुत्र। अच्छा, ये बताओ कि पिछले सात दिन कैसे बीते? क्या तुम पहले की तरह ही लोगों से नाराज हुए, उन्हें अपशब्द कहे?: संत तुकाराम ने प्रश्न किया।

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नहीं-नहीं, बिलकुल नहीं। मेरे पास जीने के लिए सिर्फ सात दिन थे, मैं इसे बेकार की बातों में कैसे गंवा सकता था? 
मैं तो सबसे प्रेम से मिला, 
और जिन लोगों का कभी दिल दुखाया था उनसे क्षमा भी मांगी शिष्य तत्परता से बोला।

संत तुकाराम मुस्कुराए और बोले, बस यही तो मेरे अच्छे व्यवहार का रहस्य है। मैं जानता हूं कि मैं कभी भी मर सकता हूं, इसलिए मैं हर किसी से प्रेम पूर्ण व्यवहार करता हूं, 
और यही मेरे अच्छे व्यवहार का रहस्य है।

शिष्य समझ गया कि संत तुकाराम ने उसे जीवन का यह पाठ पढ़ाने के लिए ही मृत्यु का भय दिखाया था।

वास्तव में हमारे पास भी 
सात दिन ही बचें हैं: 
रवि, सोम, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि, आठवां दिन तो बना ही नहीं है। अब परिवर्तन हमें आज से ही करनी चाहिए।

*🔔🪔⛳👪⏰विशेष:-भव्य‌‌‌ आत्माओं, इस कहानी से हमें यह समझना आवश्यक है कि अगर हम किसी योग्य गुरु के मार्गदर्शन में जीवन व्यापन करते है तो हमारे जीवन में आने वाली हर समस्याओं पर विजय प्राप्त करने की हमें शक्ति प्राप्त होती है। हमारा जीवन सकारात्मक बना रहता है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जीत कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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