शुक्रवार, 26 जुलाई 2019

Karma aur bhagya ka khel ratri vishram kitne ghante Hona chahie

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🌐✍️🔯🔯✍️🌐
*🔯कर्म और भाग्य का खेल ✍️*
*⏰ दैनिक पंचांग ⏰*
*✍️👨‍👩‍👧 रात्रि विश्राम कब वह कितने घंटे आवश्यक जानिए➡️🔯*

🕉  *ह्रीं नम:श्री ज्योतिष ऋषि सेवाव्रतीनित्यानंदस्वामीजी*
👪"सच्चा मित्र"👪
   *श्री सिध्दांत ज्योतिष , वास्तु व रेकी  शोध केन्द्र जयपुर*
(राजस्थान)

🌞श्री शान्तिसागराय नम:🌞

*🔯कर्म और भाग्य का खेल ✍️*

*एक ही घड़ी मुहूर्त में जन्म लेने पर भी सबके कर्म और भाग्य अलग अलग क्यों*
   एक प्रेरक कथा ...

*एक बार एक राजा ने विद्वान ज्योतिषियों की सभा बुलाकर प्रश्न किया-*

*मेरी जन्म पत्रिका के अनुसार मेरा राजा बनने का योग था मैं राजा बना, किन्तु उसी घड़ी मुहूर्त में अनेक जातकों ने जन्म लिया होगा जो राजा नहीं बन सके क्यों ..?*
इसका क्या कारण है ?
राजा के इस प्रश्न से सब निरुत्तर हो गये ..
अचानक एक वृद्ध खड़े हुये बोले - महाराज आपको यहाँ से कुछ दूर घने जंगल में एक महात्मा मिलेंगे उनसे आपको उत्तर मिल सकता है..

राजा ने घोर जंगल में जाकर देखा कि एक महात्मा आग के ढेर के पास बैठ कर अंगार ( गरमा गरम कोयला ) खाने में व्यस्त हैं..
राजा ने महात्मा से जैसे ही प्रश्न पूछा महात्मा ने क्रोधित होकर कहा “तेरे प्रश्न का उत्तर आगे पहाड़ियों के बीच एक और महात्मा हैं ,वे दे सकते हैं ।”

राजा की जिज्ञासा और बढ़ गयी, पहाड़ी मार्ग पार कर बड़ी कठिनाइयों से राजा दूसरे महात्मा के पास पहुंचा..
राजा हक्का बक्का रह गया ,दृश्य ही कुछ ऐसा था, वे महात्मा अपना ही माँस चिमटे से नोच नोच कर खा रहे थे..

राजा को महात्मा ने भी डांटते हुए कहा ” मैं भूख से बेचैन हूँ मेरे पास समय नहीं है...
आगे आदिवासी गाँव में एक बालक जन्म लेने वाला है ,जो कुछ ही देर तक जिन्दा रहेगा..
वह बालक तेरे प्रश्न का उत्तर दे सकता है..

राजा बड़ा बेचैन हुआ, बड़ी अजब पहेली बन गया मेरा प्रश्न..

उत्सुकता प्रबल थी..
राजा पुनः कठिन मार्ग पार कर उस गाँव में पहुंचा..
गाँव में उस दंपति के घर पहुंचकर सारी बात कही..

जैसे ही बच्चा पैदा हुआ दम्पत्ति ने नाल सहित बालक राजा के सम्मुख उपस्थित किया..

राजा को देखते ही बालक हँसते हुए बोलने लगा ..
राजन् ! मेरे पास भी समय नहीं है ,किन्तु अपना उत्तर सुन लो –
तुम,मैं और दोनों महात्मा सात जन्म पहले चारों भाई राजकुमार थे..
एक बार शिकार खेलते खेलते हम जंगल में तीन दिन तक भूखे प्यासे भटकते रहे ।
अचानक हम चारों भाइयों को आटे की एक पोटली मिली ।हमने उसकी चार बाटी सेंकी..

अपनी अपनी बाटी लेकर खाने बैठे ही थे कि भूख प्यास से तड़पते हुए एक महात्मा वहां आ गये..
अंगार खाने वाले भइया से उन्होंने कहा –
“बेटा ,मैं दस दिन से भूखा हूँ ,अपनी बाटी में से मुझे भी कुछ दे दो , मुझ पर दया करो , जिससे मेरा भी जीवन बच जाय ...
इतना सुनते ही भइया गुस्से से भड़क उठे और बोले..
**तुम्हें दे दूंगा तो मैं क्या खाऊंगा आग ...? चलो भागो यहां से ….।**
वे महात्मा फिर मांस खाने वाले भइया के निकट आये उनसे भी अपनी बात कही..

किन्तु उन भईया ने भी महात्मा से गुस्से में आकर कहा कि..
**बड़ी मुश्किल से प्राप्त ये बाटी तुम्हें दे दूंगा तो क्या मैं अपना मांस नोचकर खाऊंगा ?**
भूख से लाचार वे महात्मा मेरे पास भी आये..
मुझसे भी बाटी मांगी…
किन्तु मैंने भी भूख में धैर्य खोकर कह दिया कि
**चलो आगे बढ़ो मैं क्या भूखा मरुँ …?**

अंतिम आशा लिये वो महात्मा , हे राजन !..
आपके पास भी आये,दया की याचना की..
दया करते हुये ख़ुशी से आपने अपनी बाटी में से आधी बाटी आदर सहित उन महात्मा को दे दी ।
बाटी पाकर महात्मा बड़े खुश हुए और बोले..
**तुम्हारा भविष्य तुम्हारे कर्म और व्यवहार से फलेगा ।**
बालक ने कहा “इस प्रकार उस घटना के आधार पर हम अपना अपना भोग, भोग रहे हैं...
और वो बालक मर गया

**धरती पर एक समय में अनेकों फल-फूल खिलते हैं,किन्तु सबके रूप, गुण,आकार-प्रकार,स्वाद भिन्न होते हैं ..।**

राजा ने माना कि शास्त्र भी तीन प्रकार के हॆ--
**ज्योतिष शास्त्र, कर्तव्य शास्त्र और व्यवहार शास्त्र**

जातक सब अपना
**किया, दिया, लिया**

ही पाते हैं..
यही है जीवन...
"गलत पासवर्ड से एक छोटा सा मोबाइल नही खुलता..

तो सोचिये ..

**गलत कर्मो से जन्नत के दरवाजे कैसे खुलेंगे**

               🐚🐚🐚

*⏰ दैनिक पंचांग ⏰*

🕉वीर निर्वाण सं. 2545

☀ 27 - Jul - 2019
☀ Jaipur, India

☀ पंचांग   
🔅 तिथि  दशमी  19:48:05
🔅 नक्षत्र  कृत्तिका  19:30:39
🔅 करण :
           वणिज  07:58:58
           विष्टि  19:48:05
🔅 पक्ष  कृष्ण 
🔅 योग  गण्ड  07:54:13
🔅 वार  शनिवार 

☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ   
🔅 सूर्योदय  05:48:13 
🔅 चन्द्रोदय  25:52:59 
🔅 चन्द्र राशि  वृषभ 
🔅 सूर्यास्त  19:18:07 
🔅 चन्द्रास्त  14:41:59 
🔅 ऋतु  वर्षा 

☀ हिन्दू मास एवं वर्ष   
🔅 शक सम्वत  1941  विकारी
🔅 कलि सम्वत  5121 
🔅 दिन काल  13:29:53 
🔅 विक्रम सम्वत  2076 
🔅 मास अमांत  आषाढ 
🔅 मास पूर्णिमांत  श्रावण 

☀ शुभ और अशुभ समय   
☀ शुभ समय   
🔅 अभिजित  12:06:10 - 13:00:10
☀ अशुभ समय   
🔅 दुष्टमुहूर्त :
                    05:48:13 - 06:42:13
                    06:42:13 - 07:36:13
🔅 कंटक  12:06:10 - 13:00:10
🔅 यमघण्ट  15:42:08 - 16:36:08
🔅 राहु काल  09:10:42 - 10:51:56
🔅 कुलिक  06:42:13 - 07:36:13
🔅 कालवेला या अर्द्धयाम  13:54:09 - 14:48:09
🔅 यमगण्ड  14:14:24 - 15:55:38
🔅 गुलिक काल  05:48:13 - 07:29:28
☀ दिशा शूल   
🔅 दिशा शूल  पूर्व 

☀ चन्द्रबल और ताराबल   
☀ ताराबल 
🔅 भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशीर्षा, पुनर्वसु, आश्लेषा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढा, उत्तराषाढा, श्रवण, धनिष्ठा, पूर्वभाद्रपदा, रेवती 
☀ चन्द्रबल 
🔅 वृषभ, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु, मीन

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*✍️👨‍👩‍👧 रात्रि विश्राम कब वह कितने घंटे आवश्यक जानिए➡️🔯*

*रात्रि 11 से 3 के दौरान आपके रक्त संचरण का अधिक भाग लीवर की ओर केन्द्रित होता है | जब लीवर अधिक खून प्राप्त करता है तब उसका आकार बढ़ जाता है | यह महत्त्वपूर्ण समय होता है जब आपका शरीर विष हरण की प्रक्रिया से गुजरता है | आपका लीवर, शरीर द्वारा दिन भर में एकत्रित विषाक्त पदार्थों को निष्क्रिय करता है और खत्म भी करता है |*

*1- यदि आप 11बजे सो जाते हैं तो आपके पास अपने शरीर को विषमुक्त करने के लिए पूरे चार घण्टे होते हैं |*

*2-यदि 12 बजे सोते हैं तो 3 घण्टे |*

*3-यदि 1बजे सोते हैं  तो 2 घण्टे |*
*4-यदि 2 बजे सोते हैं तो केवल एक ही घण्टा विषाक्त पदार्थों की सफाई के लिए मिलता है |*
*5-अगर आप 3 बजे के बाद सोते हैं ? दुर्भाग्य से आपके पास शरीर को विषमुक्त करने के लिए कोई समय नहीं बचा | यदि आप इसी तरह से सोना जारी रखते हैं, समय के साथ ये विषाक्त पदार्थ आपके शरीर में जमा होने लगते हैं |*
*6-क्या आप कभी देर तक जागे हैं? क्या आपने महसूस किया है कि अगले दिन आपको बहुत थकान होती है, चाहे आप कितने भी घण्टे सो लें ?*
*7-शरीर को विषमुक्त करने का पूरा समय न देकर आप शरीर की कई महत्त्वपूर्ण क्रियाओं से भी चूक जाते हैं |*

*8-प्रात: 3 से 5 के बीच  रक्त संचरण का केन्द्र आपके लंग्स होते हैं |*
*इस समय आपको ताज़ी हवा में साँस लेना चाहिए और व्यायाम करना चाहिए | अपने शरीर में अच्छी ऊर्जा भर लेनी चाहिए, किसी उद्यान में बेहतर होगा | इस समय हवा एकदम ताज़ी और लाभप्रद अयनों से भरपूर होती है |*
*प्रात: 5 से 7 के बीच रक्त संचरण का केन्द्र आपकी बड़ी आँत की ओर होता है | आपको इस समय शौच करना चाहिए | अपनी बड़ी आँत से सारा अनचाहा मल बाहर कर देना चाहिए | अपने शरीर को दिन भर ग्रहण किए जाने वाले पोषक तत्वों के लिए तैयार करें |*
*सुबह 7 से 9 के बीच रक्त संचरण का केन्द्र आपका पेट या अमाशय होता है | इस समय आपको नाश्ता करना चाहिए | यह दिन का सबसे जरूरी आहार है | ध्यान रखें कि इसमें सारे आवश्यक पोषक तत्त्व हों | सुबह नाश्ता न करना भविष्य में कई स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं का कारण बनता है,*
*आपके पास अपने दिन की शुरुआत करने का आदर्श तरीका आ गया है l अपने शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी का अनुसरण करते रहें,अपनी प्राकृतिक दिनचर्या का पालन करें,स्वस्थ रहें, व्यस्त रहें, मस्त रहें*....

🐢🚩🕉👪 *आपसभी मंगलमय🍏☎🍭🔆आचरण को प्राप्त करकें यह जीवन सफल बनायें* ⚽🌲🌞🌍
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