शुक्रवार, 3 जून 2022

मूर्तिकार की विशेषता

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒मूर्तिकार की विशेषता🤝🔔*
एक मूर्तिकार एक रास्ते से गुजरा और उसने संगमरमर के पत्थर की दुकान के पास एक बड़ा अनगढ़ संगमरमर का पत्थर राह के किनारे पड़ा देखा। उसने दुकानदार से पूछा - और सब पत्थर सम्भाल के भीतर रखे गए हैं।
ये पत्थर बाहर क्यों डाला है ??
उसने कहा ये पत्थर बेकार है। इसे कोई मूर्तिकार खरीदने को राजी नहीं है।

आपकी इसमें उत्सुकता है क्या ??
मूर्तिकार ने कहा इसमें मेरी उत्सुकता है। उसने कहा। आप इसको मुफ्त ले जाएँ। ये निकले यहाँ से तो जगह खाली हो बस इतना ही काफी है। 

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ये आज दस वर्ष से यहाँ पड़ा है। कोई खरीददार नहीं मिलता। आप ले जाओ कुछ पैसे देने की जरूरत नहीं है। अगर आप कहो तो आपके घर तक पहुँचवाने का काम भी मैं कर देता हूँ।

दो वर्ष बाद मूर्तिकार ने उस पत्थर के दुकानदार को अपने घर आमंत्रित किया कि मैंने एक मूर्ति बनाई है। तुम्हें दिखाना चाहूँगा। वो तो उस पत्थर की बात भूल ही गया था। मूर्ति देखके तो दंग रह गया ऐसी मूर्ति शायद कभी बनाई नहीं गई थी। 
भगवान  की  रूप जैसा शास्त्रों में वर्णन है उस मूर्तिकार ने तराशा। 

 इतनी जीवंत कि उसे भरोसा नहीं आया।
उसने कहा ये पत्थर तुम कहाँ से लाए ??
इतना अद्भुत पत्थर तुम्हें कहाँ मिला ??

मूर्तिकार हँसने लगा उसने कहा। ये वही पत्थर है। जो तुमने व्यर्थ समझकर दुकान के बाहर फेंक रखा था और मुझे मुफ्त में दिया था। इतना ही नहीं। मेरे घर तक पहुँचा दिया था।
“वही पत्थर है” उस दुकानदार को तो भरोसा ही नहीं आया। उसने कहा तुम मजाक करते हो। उसको तो कोई लेने को भी तैयार नहीं था। दो पैसा देने को भी कोई तैयार नहीं था। तुमने उस पत्थर को इतना महिमा रूप, इतना लावण्य दे दिया।
तुम्हें पता कैसे चला कि ये पत्थर इतनी सुन्दर प्रतिमा बन सकता है ??
मूर्तिकार ने कहा आँखें चाहिए पत्थरों के भीतर देखने वाली आँख चाहिए।
अधिकतर लोगों के जीवन अनगढ़ रह जाते हैं। दो कौड़ी उनका मूल्य होता है। मगर वो तुम्हारे ही कारण। तुमने कभी तराशा नहीं। तुमने कभी छैनी नहीं उठाई। तुमने कभी अपने को गढ़ा नहीं। तुमने कभी इसकी फिकर न की कि ये मेरा जीवन जो अभी अनगढ़ पत्थर है एक सुन्दर मूर्ति बन सकती है। इसके भीतर छिपा हुआ भगवान प्रगट हो सकता है। इसके भीतर छिपा हुआ ईश्वर प्रगट हो सकता है।
वस्तुत: मूर्तिकार के जो शब्द थे। वो ये थे कि मैंने कुछ किया नहीं है। मैं जब रास्ते से निकला था। इस पत्थर के भीतर पड़े हुए भगवान को हमारी कला ने देख लिया ।हमने अपनी मेहनत व भक्ति से भगवान के उपर जो अनावश्यक पत्थर था उसे अलग कर दिया।  मैंने कुछ नहीं किया है, सिर्फ भगवान के आस-पास जो व्यर्थ के पत्थर थे। वो छाँट दिए हैं। भगवान प्रगट हो गए हैं।

*प्रत्येक व्यक्‍ति परमात्मा को अपने भीतर लिए बैठा है। थोड़े से पत्थर छाँटने हैं। थोड़ी छैनी उठानी है। उस छैनी उठाने का नाम ही भक्ति है।आज हमसभी जीवों के अंदर भी परमात्मा बनने की शक्ति विध्यमान हैं।हम उसे योग्य गुरु के सानिध्य मे व्रत नियम का पालन कर प्रकट कर सकते है।*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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