शुक्रवार, 10 जून 2022

संस्कार

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒गोपाल पर संस्कार🤝👨‍👩‍👧‍👦*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की सूचना🔔* *🕉️↔️ज्येष्ठ शुक्ल बारस  11 जून 2022   शनिवार  को सप्तम  तीर्थंकर 1008 श्री सुपार्श्वनाथजी भगवान का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव  हैं।इस महोत्सव पर आपसभी सपरिवार इष्टमित्रों के साथ अपनी शक्तिनुसार उत्सव कर जीवन सफल करें।*

दातादीन अपने लड़के गोपाल को नित्य शाम को सोने से पहले कहानियाँ सुनाया करता था। एक दिन उसने गोपाल से कहा—‘बेटा! एक बात कभी मत भूलना कि भगवान् सब कहीं हैं।’

गोपाल ने इधर-उधर देखकर पूछा—‘पिताजी! भगवान् सब कहीं हैं? वह मुझे तो कहीं दिखते नहीं।’
दातादीन ने कहा—‘हम भगवान् को देख नहीं सकते; किंतु वे हैं सब कहीं और हमारे सब कामों को देखते रहते हैं।’

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गोपाल ने पिता की बात याद कर ली। कुछ दिन बाद अकाल पड़ा। दातादीन के खेतों में कुछ हुआ नहीं। एक दिन गोपाल को लेकर रात के अँधेरे में वह नयासर गाँव से बाहर गया। वह दूसरे किसान के खेत में से चोरी से एक गट्ठा अन्न काटकर घर लाना चाहता था। 

गोपाल को मेड़ पर खड़ा करके उसने कहा—‘तुम चारों ओर देखते रहो, कोई इधर आवे या देखे तो मुझे बता देना।’

जैसे ही दातादीन खेत में अन्न काटने बैठा गोपाल ने कहा—‘पिताजी! रुकिये।’
दातादीन ने पूछा—‘क्यों, कोई देखता है क्या?’
गोपाल—‘हाँ, देखता है।’

दातादीन खेत से निकल कर मेड़ पर आया। उसने चारों ओर देखा। जब कोई कहीं न दिखा तो उसने पुत्र से पूछा—‘कहाँ,कौन देखता है?’

गोपाल—‘आपने ही तो कहा था कि ईश्वर सब कहीं है और सबके सब काम देखता है। तब वह आपको खेत काटते क्या नहीं देखेगा?’

 दातादीन पुत्र की बात सुनकर लज्जित हो गया। चोरी का विचार छोड़कर वह घर लौट आया..!!

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम*
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