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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩🚒सत्यकथा💐💐*
राजस्थान में अलवर जिले के एक राजा थे, जिनका नाम महाराजा जयसिंह प्रभाकर था।
घटना करीब 1920 के समय की है, तब महाराजा जय सिंह लंदन में थे।
*👨👩👧👦🤝👩🦰नोट:-महानुभावों आपने इस प्रकार की कहानियां हजारों बार पढ़ ली होगी।फिर भी इस प्रकार की कहानियां आपको बार बार भेजी जा रही है।इसका कारण यह है कि जिन महानुभावों ने कहानियां पढकर अपना आचरण सुधार लिया वे तो धन्य है।जिन महानुभावों ने कहानियां पढकर अपना आचरण नहीं सुधारा कोई बात नहीं, आपके आत्मा पर कुछ संस्कार तो पढगये जब वे उदय मे आयेंगे तो नियम से फल की प्राप्ति होगी।हाँ जितना हमारा समीचीन पुरषार्थ होगा उतना ही लाभदायक फल हमें प्राप्त होगा।अतः आप अपने किमती समय का सदुपयोग करते हुए स्वयं की आत्मा पर अच्छे संस्कार डालकर यह मनुष्य भव सफल करें।हाँ आप हमें अपने विचार अवश्य ही भेजे।*
एक बार की बात है जब वे राजा की पोशाक ना पहन कर साधारण वस्त्रों में ही लंदन घूमने हेतु चले गए थे। लन्दन में घूमते हुए उनकी दृष्टि Rolls Royce के शोरूम पर पड़ गयी। इस शोरूम के भीतर एक लक्ज़री गाड़ी खड़ी थी, जो कि राजा को बहुत पसंद आयी, तब वे उसे देखने के लिए शोरूम के भीतर चले गए अंदर चले गए लेकिन वह राजा आम कपड़ों में थे अतः उस शो रूम के कर्मचारियों ने उनको नहीं पहचाना तथा उन्हें कोई गरीब व्यक्ति जानकर शोरूम के बाहर निकल जाने को कह दिया।
राजा को उनके साथ हुआ यह तिरस्कृत व्यवहार बहुत बुरा लगा और यह बात उनके दिल में चुभ गई। फिर उन्होंने निश्चय कर लिया कि वह ‘रोल्स रॉयस’ से अपने इस अपमान का बदला लेकर रहेंगे इसलिए फिर महाराजा जय सिंह प्रभाकर पुनः अपने राजा की पोशाक में ही ‘रोल्स रॉयस’ शोरूम के-के भीतर गए।
शो-रूम के कर्मचारियों को पहले से ही बता दिया गया था कि अलवर के महाराजा इस शोरूम से गाड़ी खरीदने आ रहे हैं, अतः उन कर्मचारियों ने राजा जय सिंह का बहुत स्वागत सत्कार किया। राजा ने अपना समय व्यर्थ किए बिना ‘रोल्स रॉयस’ की कई सारी गाड़ियाँ एक साथ ख़रीदने का फरमान दे दिया।
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कहा जाता है कि राजा ने उन सभी गाड़ियों को नकद रुपये देकर खरीदा था। शोरूम के सारे कर्मचारी बहुत प्रसन्न हो गए क्योंकि आज इनको इतना बड़ा ऑर्डर मिला था लेकिन, वे कर्मचारी नहीं जानते थे कि महाराजा जय सिंह उनकी इन शाही गाड़ियों के साथ क्या करने वाले थे।
वे तो यही सोच रहे थे कि राजा को उन की गाड़ियाँ बहुत पसंद आई इसलिए उन्होंने उनकी गाड़ियाँ खरीदी। इसके बाद जैसे ही गाड़ियाँ भारत में पहुँची, महाराजा जय सिंह ने यह सभी गाड़ियाँ नगरपालिका को दे दी और उनको यह भी आदेश दिया कि आज से इन गाड़ियों में ही कचरा उठाने का कार्य किया जाएगा।
राजा ने जब नगरपालिका को इस तरह का आदेश दिया, तब इस के बाद ‘रोल्स रॉयस’ की गाड़ियों का सभी मज़ाक उड़ाने लगे। लोग इन खरीदना पसंद नहीं करते थे सब सोचते थे कि जिन गाड़ियों में भारत के लोग कचरा ढोते हैं ऐसी गाड़ियों को हम क्यों खरीदें।
ऐसा कहा जाता है कि बाद में इस कंपनी ने राजा जयसिंह को एक माफी पत्र लिखा और अपने कर्मचारियों द्वारा किए गए ऐसे बुरे व्यवहार के लिए उनसे माफी भी मांगी थी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी निवेदन किया कि रोल्स रॉयस कंपनी की गाड़ियों से कचरा उठाने का कार्य बंद करवा दिया जाए।
महाराजा जय सिंह ने कंपनी का यह निवेदन स्वीकार किया और उसे माफ़ कर दिया, साथ ही उन्होंने इन गाड़ियों से कचरा उठाने का कार्य भी बंद करवा दिया।
महाराजा जयसिंह के इस कार्य से ऐसे लोगों को अच्छा सबक मिला था जो मनुष्यों की पहचान उसके वस्त्रों से करते हैं।
किसी मनुष्य की पहचान उसके कपड़ों से नहीं होती है। किसी गरीब व्यक्ति का तिरस्कार करना भी ठीक नहीं है, हमें गरीब अमीर ऊंच-नीच जैसे भेद नहीं रखनी चाहिए।
आप सभी से अनुरोध की बच्चों तथा सभी पाश्चात्य प्रेरित परिचित लोगो को ये सत्य घटना अवश्य बताये जिससे कि भारतीयों में विदेशी ‘रोल्स रॉयस’ जैसे वाहनों के झूठे आडम्बर को मिटाया जा सके।
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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