मंगलवार, 1 फ़रवरी 2022

क्रोध से....

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*👨‍👩‍👧‍👦👩‍🦰सबसे बड़ा दुश्मन क्रोध👩‍🦰👨‍👩‍👧‍👦*

*स्वयं के विनाश का कारण जानियें 💐💐*
एक बार एक सेठ अपनी दुकान पर बेठे थे.. दोपहर का समय था इसलिए कोई ग्राहक भी नहीं था तो वो थोड़ा सुस्ताने लगे..

इतने में ही एक संत भिक्षक भिक्षा लेने के लिए दुकान पर आ पहुचे और सेठ जी को आवाज लगाई कुछ देने के लिए...

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सेठजी ने देखा की इस समय कोन आया है ?

जब उठकर देखा तो एक संत याचना कर रहा था..

सेठ बड़ा ही दयालु था वह तुरंत उठा और दान देने के लिए एक कटोरी चावल बोरी में से निकाला और संत के पास आकर उनको चावल दे दिया...

संत ने सेठ जी को बहुत बहुत आशीर्वाद और दुवाएं दी...
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तब सेठ जी ने संत से हाथ जोड़कर बड़े ही विनम्र भाव से कहा की..

हे गुरुजन, आपको मेरा प्रणाम ... मैं आपसे अपने मन में उठी शंका का समाधान पूछना चाहता हुं।

संत याचक ने कहा की जरुर पूछो...

तब सेठ जी ने कहा की.. लोग आपस में लड़ते क्यों है ?

संत ने सेठ जी के इतना पूछते ही.. शांत स्वभाव और वाणी में कहा की सेठ मैं तुम्हारे पास भिक्षा लेने के लिए आया हुं.. तुम्हारे इस प्रकार के मूर्खता पूर्वक सवालो के जवाब देने नहीं आया हुं।

इतना संत के मुख से सुनते ही सेठ जी को क्रोध आ गया और मन में सोचने लगे की यह केसा घमंडी और असभ्य संत है ?

ये तो बड़ा ही कृतघ्न है, एक तरफ मैंने इनको  दान दिया और ये मेरे को ही इस प्रकार की बात बोल रहे है..

इनकी इतनी हिम्मत...

और ये सोच कर सेठजी को बहुत ही क्रोध  आ गया और वो काफी देर तक उस संत को खरी खोटी सुनाते रहे।

और जब अपने मन की पूरी भड़ास निकाल चुके तब कुछ शांत हुए तब, संत ने बड़े ही शांत और स्थिर भाव से कहा की...

जैसे ही मैंने कुछ बोला आपको क्रोध  आ गया, और आप क्रोध  से भर गए और लगे जोर जोर से बोलने और चिलाने...

वास्तव में केवल क्रोध  (गुस्सा) ही सभी झगड़े का मूल होता है ...

यदि सभी लोग अपने क्रोध पर काबू रखना सीख जाये तो दुनिया में झगड़े ही कभी न होंगे !!
*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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