बुधवार, 27 अगस्त 2025

अनमोल फार्मूला

*🎪पंच कल्याणक महोत्सव की सूचना व उपयोगी कहानी🔔*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 अनमोल फार्मूला ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🐎भाद्रपद शुक्ल 06 , 29 अगस्त शुक्रवार 2025 कलि काल के  सप्तम  तीर्थंकर  सर्व सुखकारी उपसर्ग विजेता श्री सुपार्श्वनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से बौध्दिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री  सुपार्श्वनाथ भगवान जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🐎भाद्रपद शुक्ल अष्टमी , 31 अगस्त रविवार 2025 कलि काल के  9वें  तीर्थंकर  सर्व सुखकारी  श्री सुविधिनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से शुक्र की महादशा  अनुकूल हो  जाती है और सभी प्रकार से बौध्दिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर  दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री सुविधिनाथ  भगवान जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*🎪 अगस्त  2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 29 व 31 तारीख को है।*
*👉चतुर्दशी तिथि  23 अगस्त को है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 दिनांक  10 अगस्त से 08 सितंबर तक षोडश कारण महापर्व 🔔*
*👨‍👨‍👦‍👦✅ दस लक्षण महापर्व 28 अगस्त से 06 सितंबर तक 👉 अनंत चतुर्दशी 06 सितंबर को 🐎*

*✅🔔⏰🐎 नोट अगस्त  माह से अक्टूबर तक किसी भी प्रकार से विवाह आदि  शुभ कार्यों के मुहूर्त नहीं है।*
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

  *अनमोल फार्मूला*

स्वयं को करोड़पति बनाने के लिए इस कहानी में बताया है। किस्मत को बदलने का सबसे सरल और आसान तरीका।

 *"थोड़ी मदद, किसी की पूरी दुनिया बदल सकती है"*  यह तो मात्र कहावत है किंतु हमारा अनुभव है कि आप अपनी योग्यता अनुसार योग्य जीवों की जितनी मदद करते है उससे अधिक आप प्राप्त करते है।

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
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लोकल ट्रेन से उतरते ही मैंने घर फोन किया कि कुछ लाना है क्या? 
पत्नी ने कहा: "एक आध किलो वाला छोटा खरबूजा लेते आना।"
जैसे ही मैं स्टेशन से बाहर निकला, सड़क किनारे एक गरीब दिखने वाली बूढ़ी औरत को खरबूजे बेचते देखा। वैसे तो मैं हमेशा "फल" चौरासी घंटे वाले मंदिर के पास की दुकान से ही लेता हूँ, लेकिन आज कुछ अलग करने का मन हुआ।
मैं उसके पास गया और पूछा: "माई, खरबूजा कैसे दिए?" 
वह बोली: "बाबूजी, 50 रुपये किलो।" 
मैंने कहा: "40 रुपये दूँगा।" 
उसने कहा: "45 दे देना, दो पैसे मैं भी कमा लूंगी। 
"40 देने हैं तो बताओ!"
उसके चेहरे की मायूसी देखकर मैं बिना कुछ कहे आगे बढ़ गया और अपनी पसंदीदा दुकान पर पहुँच गया। वहाँ भाव पूछा तो दुकानदार बोला: "60 रुपये किलो।" मैंने कहा: "पाँच साल से फल तुमसे ही ले रहा हूँ, कुछ तो ठीक करो!" उसने बोर्ड की ओर इशारा कर दिया, जिस पर लिखा था: "मोलभाव करने वाले माफ़ करें।"
इस व्यवहार से मेरा मन खिन्न हो गया। मैंने तुरंत वापस मुड़कर उस बुढ़िया के पास जाने का निश्चय किया।
मैंने मुस्कराकर कहा: "माई, दो किलो दे दो। भाव की चिंता मत करो।"
बुढ़िया का चेहरा खुशी से दमक उठा। वह बोली: "बाबूजी, थैली नहीं है। एक वक्त था जब मेरा पति जिंदा था, तो हमारी छोटी सी दुकान थी। लेकिन उसकी बीमारी में सब चला गया — दुकान भी, आदमी भी। अब कोई सहारा नहीं है। जैसे-तैसे गुज़ारा कर रही हूँ।" कहते-कहते उसकी आंखों में आँसू आ गए।
मैंने 200 रुपये का नोट दिया तो वह बोली: "बाबूजी, छुट्टे नहीं हैं।" मैंने कहा: "रख लो माई, चिंता मत करो। कल मैं तुम्हें 1000 रुपये दूँगा, धीरे-धीरे चुकता कर देना। और मंडी से बाकी फल भी लेकर लाना। अब मैं तुमसे ही फल खरीदूँगा।"
वह कुछ कह पाती, उससे पहले ही मैं घर की ओर निकल पड़ा। रास्ते भर सोचता रहा — हम मोलभाव उन्हीं से क्यों करते हैं, जो दो वक्त की रोटी के लिए जूझ रहे होते हैं? और बड़ी दुकानों पर बिना झिझक पूरा पैसा दे आते हैं? 
शायद हमारी सोच ही विकृत हो चुकी है — हम चमक-दमक को गुणवत्ता मान बैठे हैं।
अगले दिन मैंने वादा निभाते हुए बुढ़िया को 1000 रुपये दिए और कहा: "माई, लौटाने की चिंता मत करना, जो फल लूंगा, उन्हीं में से कटता रहेगा।"
जब मैंने यह घटना अपने दोस्तों को सुनाई, तो उन्होंने भी उसी से फल खरीदना शुरू कर दिया। तीन महीने में उसने हाथ ठेला भी खरीद लिया, स्वास्थ्य सुधर गया, और वह अब आत्मनिर्भर हो गई है।
 *चिंतन मनन करने योग्य बातें:* 
- मोलभाव इंसान से मत करो, सामान से करो — गरीब दुकानदारों से मोलभाव कर हम उनकी जीविका छीनते हैं, जबकि बड़ी दुकानों पर चुपचाप पैसे दे आते हैं।
- हर मुस्कराता चेहरा खुश नहीं होता — थोड़ा समझने की कोशिश करें, कभी-कभी दर्द मुस्कान के पीछे छिपा होता है।
- छोटी मदद, बड़ा बदलाव — 1000 रुपये ने एक बेसहारा महिला को फिर से आत्मनिर्भर बना दिया।
- सच्चा संतोष, सेवा में है — दूसरों की भलाई में जो आत्मिक सुख है, वह किसी पुरस्कार से कम नहीं।
- बदलाव की शुरुआत आपसे होती है — एक छोटी सी मदद एक बड़ी प्रेरणा बन सकती है, अगर हम पहल करें। हर इंसान को एक मौका चाहिए — एक सहारा। और यह कोई एक नहीं कर सकता । समाज के लोग अगर थोड़ा संवेदनशील बनें, तो न जाने कितनी जिंदगियां बदल सकते हैं। थोड़ी मदद किसी के लिए पूरी दुनिया बन सकती है।

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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