*🎪पंच कल्याणक महोत्सव की सूचना व उपयोगी कहानी🔔*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒सच्ची मदद✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨👨👦👦⏰🔑भाद्रपद कृष्ण सप्तमी , 20 जून शुक्रवार 2025 कलि काल के 16 वें तीर्थंकर सर्व सुखकारी श्री शांतिनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से बौध्दिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री शांतिनाथ भगवान जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*
*🎪 अगस्त 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 15,29, व 31 तारीख को है।*
*👨👨👦👦🔔🐎 अगस्त माह में अष्टमी तिथि 16 तारीख को है।👉चतुर्दशी तिथि 23 अगस्त को है।*
*👨👨👦👦🔔👉 दिनांक 10 अगस्त से 08 सितंबर तक षोडश कारण महापर्व 🔔*
*👨👨👦👦✅ दस लक्षण महापर्व 28 अगस्त से 06 सितंबर तक 👉 अनंत चतुर्दशी 06 सितंबर को 🐎*
*🐎✍️ पंचक 10 से 14 अगस्त तक है।*
*✅🔔⏰🐎 नोट अगस्त माह से अक्टूबर तक किसी भी प्रकार से विवाह आदि शुभ कार्यों के मुहूर्त नहीं है।*
*🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
*कवि मैथिलीशरण गुप्त* की एक प्रसिद्ध कविता की पंक्तियाँ
*"अनर्थ है कि बंधु हो न बंधु की व्यथा हरे,*
*वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए जियें"*
परोपकार और सेवा की भावना का सार प्रस्तुत करती हैं। भारतीय संस्कृति में “वसुधैव कुटुम्बकम” का सिद्धांत हमें सिखाता है कि पूरे विश्व को अपना परिवार मानकर सभी की मदद करनी चाहिए, यही सच्ची मनुष्यता है। परोपकार, दया, सहानुभूति और दूसरों की मदद जैसे गुण मानवता की असली पहचान हैं। जो इंसान दूसरों के दुख को अपना समझकर आगे बढ़ता है, वही सच्चे अर्थों में इंसान कहलाता है।
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से कर सकते है ।✍️*
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_*सच्ची मदद*_
एक दिन घर लौटते समय मेरी नज़र एक खम्भे पर लगे हाथ से लिखे एक नोटिस पर पड़ी। उत्सुकतावश मैं पास गया और पढ़ा—"मेरे 50 रुपये इस सड़क पर कहीं गिर गए हैं। अगर किसी को मिलें तो कृपया इस पते पर दे दें। मुझे ठीक से दिखाई नहीं देता, कृपया मदद करें।"
.. अम्मा ।
यह पढ़कर मन में विचार आया कि देखो, दुनिया में ऐसे भी लोग हैं जिनके लिए 50 रुपये इतने मायने रखते हैं। मैं उस पते पर पहुँचा, जहाँ एक कमजोर-सी बुज़ुर्ग महिला टूटी झोंपड़ी के बाहर बैठी थी।
मेरे कदमों की आहट सुनकर वह बोली, "कौन है?" मैंने कहा, "अम्मा, आपके 50 रुपये मिले हैं, देने आया हूँ।"
यह सुनते ही वह रोने लगी और बोली, "बेटा, तुमसे पहले 30-40 लोग यही कहकर मुझे पैसे दे चुके हैं। लेकिन मैंने तो कोई नोटिस लिखा ही नहीं। मैं पढ़-लिख नहीं सकती और मुझे साफ दिखाई भी नहीं देता।"
मैं यह सुनकर स्तब्ध रह गया, पर मुस्कराकर कहा, "कोई बात नहीं अम्मा, आप यहां अकेली यहां रहती है आप मेरे साथ मेरे घर चलिए। फिर बार बार आग्रह से बुज़ुर्ग महिला ने मुझसे आग्रह स्वीकार कर लिया।
जब मैं अम्मा के साथ घर लौट रहा था, तो सोचने लगा—किसी ने जानबूझकर वह नोटिस लगाया होगा, ताकि इस बेसहारा अम्मा की मदद हो सके। लोगों ने पैसों से तो उनकी मदद कर दी किंतु यह नहीं सोचा कि इस जर्जर शरीर से वह अपने नित्य कार्यो को कैसे करेगी।
मैंने मन ही मन उस भले इंसान को धन्यवाद दिया, जिसने वो नोटिस लिखा और वहाँ चिपकाया। मुझे एहसास हुआ कि अगर हमारे भीतर मदद की सच्ची भावना हो, तो उसे पूरा करने के रास्ते खुद-ब-खुद निकल आते हैं। वह अनजान भला आदमी भी बस इस अम्मा की मदद करना चाहता होगा।
आज उस व्यक्ति विशेष के निमित्त से मुझे व मेरे परिवार के सभी सदस्यों को अम्मा की सेवा करने का मौका प्राप्त हुआ।
*🔔नोट भव्य आत्माओं यह एक सत्य घटनाओं पर आधारित है इसे मात्र कहानी समझकर भूल मत जाना।*
*👨👨👦👦💯◀️▶️🌞विशेष: - भव्य आत्माओं,दूसरों की मदद करने का सच्चा सुख किसी भी व्यक्तिगत इच्छा की पूर्ति से कहीं बड़ा होता है। इच्छाएँ तो बार-बार जन्म लेती हैं और पूरी होने के बाद भी संतोष नहीं देतीं, लेकिन किसी की सहायता कर जो संतोष मिलता है, वह जीवनभर सुकून देता है। अतः स्वयं की योग्यता अनुसार हमें जरुरतमंदो की सेवा करनी चाहिए।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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