रविवार, 24 जुलाई 2022

शेर की आपबिती

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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪🐅शेर की आपबिती🎪🔔* 

घने पेड़ों की छाया में शेरों का एक झुण्ड आराम कर रहा था। धूप तेज थी परन्तु मन्द मन्द हवा चल रही थी।इस विशाल जंगल में तरह - तरह के छोटे -बड़े जानवर थे पर जंगल पर राज तो शेरों का ही था।शेर के इस झुण्ड में कई शेरनियां थी।  तीन नन्हें शावक‌ झुण्ड के लिए खास थे।

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      पेड़ों की छाया में झुण्ड का मुखिया शेर लेटा था, शेरनियां भी ऊंघ रही थी पर चौकन्नी थी। नन्हा शावक बगल में मस्ती कर रहा था। कभी वह शेर की पीठ पर चढ़ जाता तो कभी शेर के कान खींच कर इठलाता।शेर अपनी बंद आंखें खोलकर एक नज़र उन्हें देखता फिर आंखें बंद कर सो जाता या फिर शावक को प्यार से आहिस्ता-आहिस्ता चाटकर दुलराता।

 बच्चों से उसे इतना प्यार था कि अपनी नींद में खलल पड़ने के बावजूद न तो वह उन पर गुर्राता और न ही पंजे से उन्हें दूर भगाने की कोशिश करता। अलबत्ता अपनी पूंछ उठाकर कुछ संकेत देने की असफल कोशिश जरूर करता।


     यूं तो जंगल में शेरनियां ही अधिकतर शिकार किया करती हैं लेकिन अपने नन्हें एवं प्रिय शावक के लिए  यह शेर हिरण का शिकार कर स्वदिष्ट और मुलायम गोस्त लाया करता। शावक को भी हिरण का गोस्त अत्यधिक पंसद था।

      दिन बीतते गये। शावक बड़े और जवान हो रहे थे,पर उनकी शोखियां अभी भी उनके पास बरकरार थी।शेर के साथ उनका खेलना उसी तरह अब भी बदस्तूर जारी था। उनकी बदमाशियां उम्र के साथ थोड़ी अवश्य बढ़ गयी थी।

 इधर शेर उम्र के ढलान पर था।
          एक दिन जब झुण्ड भरी दोपहर में पेड़ की छाया में आराम कर रहा था तो उनमें से एक शावक ने जिद की--- मुझे काले हिरण का गोस्त खाना है।

  ना चाहते हुए भी बूढ़ा शेर अपने जवान हो रहे शावक के लिए शिकार पर निकल पड़ा। काफी मशक्कत के बाद उसने हिरण का शिकार तो किया लेकिन काला हिरण उसके हाथ नहीं लगा । शेर अपने शिकार को मुंह में दबाए शावक के निकट आया परन्तु यह क्या? शिकार देखते ही शावक की त्योरियां चढ़ गयी, आंखें लाल हो गयीं। उसने गुर्राकर कहा--मैंने तुम्हें काले हिरण के लिए कहा था, न कि इसके लिए और तुम इस साधारण हिरण का शिकार कर आ गये।

  शेर को अपने जवान शावक, जिसे कभी वह दिल-ओ-जान से प्यार करता था,का यह लहजा जरा भी पसंद नहीं आया परन्तु परिस्थिति की नजाकत को समझकर वह चुप रहा।उसकी चुप्पी ने जवान शावक को और भी भड़का दिया। उसने बूढ़े हो रहे शेर पर हमला बोल दिया । जवान शेर बूढ़े शेर पर भारी पड़ रहा था। शेर काफी दुखी था।

 लहुलुहान हो कर वह एक किनारे जाकर बैठ गया । आंखों से आंसू बह रहे थे। आंखों में आंसू लिए वह सोचने लगा - जिन बच्चों के लिए मैं ने सब कुछ किया, उनकी खुशी में ही अपनी खुशी ढूंढता रहा सारी-उम्र,आज उसी ने मेरे साथ ऐसा सलूक किया।

      उसके दिल पर गहरी चोट लगी। वह दुःखी था।
  और एक दिन बूढ़ा शेर झुण्ड छोड़कर चुपचाप कहीं दूर जंगल में चला गया।

   जवान शेर अपनी जवानी के नशे में चूर उधम मचा रहा है अब पूरे जंगल में, शायद यह सोच कर कि कभी वह बूढ़ा नहीं होगा।

" जंगल की यह सच्चाई, इन्सानों के लिए सबक है "
आज हम भी इसी प्रकार अपने बच्चों की अनावश्यक मांगों को पूरा कर रहे है।जब हमारा शरीर बुढापे मे साथ नहीं देता।वर्तमान में हमें किसी वृध्दाश्रम या  घर के ही सर्वेंट क्वार्टर में रखा जाता है।कृपया अपने बच्चों में धार्मिक संस्कार देकर स्वयं का बुड़ापा व बच्चों का परिवार स्वर्ग बनायें।

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम*
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