शनिवार, 16 जुलाई 2022

मेरी पहचान

🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞🌞🕉️🌞🕉️🌞🕉️🌞
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩‍🚒मेरी पहचान👨‍👩‍👧‍👦↔️*

"आप मुझे पाँच रुपए उधार दे सकती हैं क्या?"

बस का टिकट तो पंद्रह रूपए का था और उस लड़के के हाथ में उस इकलौते दस के नोट के अलावा उसके बटुए से एक पाँच सौ का नोट भी झांँक रहा था।

*👨‍👩‍👧‍👦🤝👩‍🦰नोट:-महानुभावों आपने इस प्रकार की कहानियां हजारों बार पढ़ ली होगी।फिर भी इस प्रकार की कहानियां आपको बार बार भेजी जा रही है।इसका कारण यह है कि जिन महानुभावों ने कहानियां पढकर अपना आचरण सुधार लिया वे तो धन्य है।जिन महानुभावों ने कहानियां पढकर अपना आचरण नहीं सुधारा कोई बात नहीं, आपके आत्मा पर कहानियों से कुछ धर्म के संस्कार तो पढगये जब वे उदय मे आयेंगे तो नियम से शुभफल की प्राप्ति होगी।हाँ जितना हमारा समीचीन पुरषार्थ होगा उतना ही लाभदायक शुभफल हमें प्राप्त होगा।अतः आप अपने किमती समय का सदुपयोग करते हुए स्वयं की आत्मा पर अच्छे संस्कार डालकर यह मनुष्य भव सफल करें।हाँ आप हमें अपने विचार अवश्य ही भेजे।*

बस कंडक्टर पाँच रूपए के बदले पाँच सौ का छुट्टा देने को तैयार नहीं था।
बस कंडक्टर के इनकार करने के बाद उस लड़के ने बस के भीतर नजर दौड़ाकर आसपास के सीट पर बैठे सहयात्रियों से पाँच रूपए की मदद या पाँच सौ के छुट्टे की गुहार लगाई लेकिन किसी ने आगे बढ़कर उसकी मदद नहीं की। 

अंततः हार थककर वह पिछली सीट पर बैठी अपने मोबाइल पर नजरें गड़ाए सविता कि ओर उम्मीद भरी निगाहों से देख रहा था।
किसी और की तो पता नहीं लेकिन सविता के पर्स में सौ-पचास के कई नोटों के अलावा पाँच रूपए के दो सिक्के भी मौजूद थे लेकिन उस लड़के की गुहार को अनसुनी कर वह अपनी सीट पर बैठी मोबाइल की स्क्रीन पर नजरें गड़ाए रही।
⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्माबंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो संस्था से अवश्य ही जुड़े ।जो पुण्य को बढ़ाना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  करें।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवासस्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️

तभी बस एक हल्के झटके के साथ एक स्टॉप पर रुक गई कई सहयात्री उतर गए और साथ ही साथ कुछ यात्री  उस बस पर सवार भी हुए।

बस में अभी-अभी सवार हुए यात्रियों में एक बुजुर्ग महिला भी थी। बस में कोई खाली सीट ना देख वह बुजुर्ग महिला एक सीट का सहारा लिए चलती बस में अपने लड़खड़ाते कदमों पर टिक कर खड़े रहने की भरसक कोशिश कर रही थी।

उस बुजुर्ग अम्मा पर नजर पड़ते ही वह लड़का जो अभी-अभी बस में मौजूद सहयात्रियों से पांँच रुपए की मदद मांग रहा था अपनी सीट छोड़ उठ खड़ा हुआ..
"अम्मा!.आप यहांँ बैठ जाइए।"

आसपास सीट पर बैठे अन्य सहयात्री उस लड़के की दरियादिली देख कर भी अनदेखा किए अपनी-अपनी सीट पर जमे रहे।

सबसे पिछली सीट पर बैठी सविता भी उड़ती निगाहों से उस हमउम्र लड़के की दरियादिली को बेवकूफी का दूसरा रूप समझ मन ही मन यह सोच कर मुस्कुराई कि..
"आखिर टिकट लेकर बस में चढ़ा यात्री अपनी जमी-जमाई अच्छी भली सीट किसी को यूंँही कहीं दरियादिली में देता है भला!"

तभी आसमान में बिजली कड़कने की आवाज सुनकर सविता ने बस से बाहर नजर दौड़ाई,.बाहर बारिश शुरु हो चुकी थी।
अचानक अपने बड़े साइज के साइड बैग में हाथ डाल कुछ टटोलती सविता को याद हो आया कि उसकी छतरी तो ऑफिस में ही छूट गई है।

बाहर तेज बारिश शुरू हो गई थी और स्टॉप पर पहुंचकर बस रुक गई थी। 
हैरान-परेशान सविता अपने दुपट्टे का आंचल ओढ़े तेजी से बस से उतर कर बस स्टॉप के शेड़ के नीचे आ खुद को भींगने से बचाने का असफल प्रयास करने लगी।
वहां उस शेड़ के नीचे पहले से ही मौजूद अपने-अपने बस का इंतजार करते यात्रियों की भीड़ में राई रखने भर की जगह नहीं थी।

तभी सविता की नजर बस में उसके साथ ही सफर करने वाले उस हमउम्र सहयात्री पर गई।

अभी-अभी तेज हो चुकी बारिश में हाथ में छाता थामें वह भी उसके साथ ही उस बस से वहां उस नुक्कड़ पर उतारा था।

अचानक तेज बारिश और छतरी ऑफिस में ही छूट जाने के अहसास के साथ बस से उतर अपने दुपट्टे का आंचल ओढ़ उसे बारिश की बूंदों से बचने का असफल प्रयास करता देख वह लड़का अपनी छतरी उसकी ओर बढ़ाते हुए अचानक बोल उठा..
"सिस्टर!.आप हमारी छतरी में आ जाइए।" 
गलत-सही का विचार किए बिना वो बदन को सराबोर करती बारिश से बचने के लिए उसकी छतरी के भीतर आ गई।

वो दोनों उसी बस-स्टॉप से हर रोज अपने-अपने दफ्तर के लिए बस पकड़ते थे लेकिन दोनों एक दूसरे के लिए बिल्कुल अजनबी थे।

फिर भी उस हमउम्र लड़के ने बिना एक पल गंवाए उस भारी बारिश में भी अपनी छतरी उसे थमाकर कंधे पर लटके दफ्तर के बैग में से एक पन्नी निकाल उसमें झटपट अपने मोबाइल को लपेट यह कहते हुए उस छतरी से निकल गया की..
"मुझे यहां कुछ जरूरी काम है!.आप यह छतरी लेकर अपने घर जाइए।"

निश्चय ही सविता वह छतरी अगले दिन लौटा देती फिर भी उसके पर्स में मौजूद सिक्के आपस में खनक कर उसका मखौल उड़ा रहे थे और वह उस घनघोर बारिश में एक अजनबी द्वारा उसके एकमात्र छतरी को  पाकर स्तब्ध थी।

*🎪🔑ग्रहण करने योग्य➡️👨‍👩‍👧‍👦*
*🔔🤛भव्य आत्माओं,आप भी जीवन में अपनी शक्ति के अनुसार किसी भी परिचित व्यक्ति विशेष की आवश्यकता को जानते हुए मदत कर इंसानियत जिंदा रखें।शास्त्रों में ऐसे अनेक उदाहरण पढने मे आते है कि वह कर्म ही हमारे साथ रहकर हमें भविष्य में विपत्तियों से बचाता है।🤝🔯*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम् जयतु शासनम*
🌳🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें