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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩🚒अपने अपने मन की बात*
आज भी हर बार की तरह सोमवार को सब्जी मंडी आई थी। टहलते-टहलते निकल आती पर फल सब्जी से भरे दो-दो थैले लेकर चलना उसके बस का नहीं। रिक्शा लेना ही पड़ता। हर बार रिक्शे वालों से किच-किच भी जरुर होती,वो तीस माँगते ये बीस से ज्यादा देने को तैयार नहीं होती।
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आज भी यही सब हो रहा था। तीन रिक्शे जा चुके थे, चौथे की राह देख रही थी। एक रिक्शा नज़र आया। चलाने वाले के एकदम चट्टे बाल, झुर्रियों से भरा चेहरा, कृशकाय वृद्ध। रोका, पूछा "सेक्टर बारह जाना है, चलोगे?" वो बोला "तीस रुपये लेंगें।" ये सब्जी भाजी की तरह मोल भाव करने लगी और जीत गई। वो बीस रुपये में चलने को राज़ी हो गया, सवारी भी कम मिलती थी उसे।
बैठे-बैठे बोली "दादा कहाँ से हो?" उसने बताया "उन्नाव के हैं हम।"
"अच्छा वहाँ तो मेरा ननिहाल है।"चहक उठी।
"फिर तो जाती होंगी?"उसने पूछा।
"नहीं अब टाईम कहाँ वहाँ जाने का, बस-बस यहीं रोक दो।" घर आ गया था।
रिक्शा रुकते ही वृद्ध चालक फुर्ती से उतरा और दोनों थैले उठाने लगा। ये बोली " अरे रहने दो मैं रख दूँगी।" सोचने लगी, क्यूँ कर रहा है ये सब, अब जरुर कुछ ना कुछ मांगेगा, बेकार में ही पूछताछ करने बैठ गई।
उतरी और बीस रूपये देने लगी। वृद्ध ने पैसे लेने से मना कर दिया, बोला " तुम से पैसे नहीं ले सकते बिटिया, तुम्हारा तो ननिहाल है हमारे यहाँ। कभी घूम आना,खूब खुश रहो।"
लाख कहने पर भी उसने पैसे नहीं लिये और चला गया। ये खड़ी-खड़ी सोच रही थी अपनी और उस रिक्शेवाले की मन की बात को।
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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