*🌞✍️सच्चा राही ✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 सदुपयोग करना सिखों ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨👨👦👦🐎🔑 फाल्गुन कृष्ण 6, 7 फरवरी शनिवार 2025 कलि काल के सप्तम उपसर्ग विजेता तीर्थंकर सर्व सुखकारी श्री सुपार्श्वनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से मन के विकल्प शांत हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री सुपार्श्वनाथ भगवान जी का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔👨👨👦👦🐎🔑 फाल्गुन कृष्ण सप्तमी , 8 फरवरी शनिवार 2025 कलि काल के सप्तम उपसर्ग विजेता तीर्थंकर सर्व सुखकारी श्री सुपार्श्वनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से मन के विकल्प शांत हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री सुपार्श्वनाथ भगवान जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔👨👨👦👦🐎🔑 फाल्गुन कृष्ण सप्तमी , 8 फरवरी शनिवार 2025 कलि काल के अष्टम तीर्थंकर सर्व सुखकारी श्री चन्द्रप्रभ भगवान जी जिनकी आराधना से चंद्रमा की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से मन के विकल्प शांत हो जाते है और भव्य जीव उत्तम धर्म को धारण कर मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री चन्द्रप्रभ भगवान जी का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 फरवरी 2026 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 04,05,07,08,13,14,16,17,22,23 व 24 फरवरी (10 व11 को नवमी तिथि और 23 को षष्ठी तिथि का क्षय सप्तमी तिथि मान्य होगी )तारीख को कल्याणक महोत्सव है। 💯✅विशेष :- 5,8,14,17 व 22 को मोक्ष कल्याणक महोत्सव याने निर्वाण लाडू चढ़ाने का सुअवसर प्राप्त होगा।*
*👨👨👦👦🔔🐎इस जनवरी माह में अष्टमी तिथि 09 व 24 फरवरी को है। चतुर्दशी तिथि 16 फरवरी को है।*
*🔔🐎 अष्टान्हिका महापर्व 24 फरवरी से प्रारंभ है।*
*👨👨👦👦🔔👉 शुद्ध विवाह मुहूर्त 4,5,10,19,20,21 फरवरी माह में मुहूर्त है। 🔔👉 वाहन खरीद मुहूर्त 1,6,18, 26,27 फरवरी को है।🏠👉 प्रापर्टी मुहूर्त 1, 2, 12,13, 21,26,27 फरवरी को है।✅👉 गृह प्रवेश मुहूर्त 19,20, 21,26 को है।*
*🐎✍️ पंचक 23 से 26 जनवरी को है।*
*🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
💖 *सदुपयोग करना सिखों* 💖
यह मानव जीवन बटोरने के लिए नहीं, बल्कि सदुपयोग के लिए मिला है। प्रकृति स्वयं इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।
वृक्ष अपनी छाया, फल, फूल और लकड़ी—सब कुछ निःस्वार्थ देते हैं।
नदियाँ अपने जल से प्यास बुझाती हैं, खेतों को सींचती हैं और जीवन को गति देती हैं।
इस सृष्टि में शायद ही कुछ ऐसा हो जो अपने लिए जिए—सब दूसरों के लिए हैं।
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से कर सकते है ।✍️*
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स्वामी विवेकानंद जी का वाक्य यहाँ मन को छूता है—
“यह जीवन लेने के लिए नहीं, सदुपयोग करने के लिए है।”
जब देना, मधुर बोलना और सेवा करना जीवन का स्वभाव बन जाए, तभी मनुष्य जीवन अपनी पूर्णता को पाता है।
इसी सत्य को उजागर करती है यह कथा—
🌾 *गुरु, गेहूँ और जीवन का पाठ* 🌾
एक शांत आश्रम में एक वृद्ध गुरु रहते थे। आयु ढल चुकी थी और मन हिमालय की शांति में शेष जीवन बिताने को व्याकुल था। पर एक चिंता उन्हें घेरे रहती—
“मेरे बाद इस आश्रम को कौन संभालेगा?”
आश्रम में दो शिष्य थे—दोनों योग्य, दोनों प्रिय। गुरु ने दोनों को बुलाया और कहा,
“मैं तीर्थ यात्रा पर जा रहा हूँ। गुरु दक्षिणा में तुमसे बस इतना चाहता हूँ—ये दो मुट्ठी गेहूँ। एक-एक मुट्ठी तुम दोनों रखो। जब मैं लौटूँ, तब जो शिष्य इसे सुरक्षित लौटा देगा, वही आश्रम का उत्तराधिकारी होगा।”
पहला शिष्य गुरु को भगवान मानता था। उसने गेहूँ को पोटली में बाँधा, सुरक्षित रखा और प्रतिदिन उसकी पूजा करने लगा।
दूसरे शिष्य ने वही गेहूँ आश्रम के पीछे खेत में बो दिया।
महीनों बाद गुरु लौटे।
पहले शिष्य ने आदरपूर्वक पोटली खोली—पर भीतर के गेहूँ में घुन लग चुकी थी, निष्प्राण और अनुपयोगी।
गुरु मौन रहे।
फिर दूसरे शिष्य को बुलाया गया। वह गुरु को खेत के पास ले गया—जहाँ सुनहरी फसल लहलहा रही थी। उसने विनम्रता से कहा,
“गुरुदेव, जो गेहूँ आपने दिए थे, वे अब इस रूप में हैं। क्षमा करें, वही मुट्ठी मैं लौटा नहीं सकता।”
गुरु की आँखें चमक उठीं। उन्हें शिष्य पर गर्व हुआ कि उसने अपनी बुद्धि विवेक पूर्वक उन एक मुठ्ठी गेंहू का सदुपयोग किया।उन्होंने कहा “जो ज्ञान, साधन और आशीर्वाद का सदुपयोग करते है, वही उन्हें बढ़ाता है। जो रोककर रखता है, वह उन्हें नष्ट कर देता है। आश्रम का सच्चा उत्तराधिकारी तुम ही हो।”
*विशेष* :- जीवन में
सदुपयोग हमें बड़ा बनाता है, (आज हमारे पास समय के साथ बहुत कुछ उपलब्ध है। अगर इनका सदुपयोग नहीं किया जाएगा तो जीवन व्यर्थ है।)मधुर बोलना रिश्तों को सींचता है,और सेवा जीवन को अर्थ देती है। हां यहां पर सामने वाले की योग्यता अनुसार व्यवहार करना आवश्यक है।आज फ्री में सबकुछ लेने वालों की लाइन लगा दी जाएं तो कश्मीर से कन्याकुमारी तक भी जगह कम पड़ जाएंगी। अतः सबकुछ फ्री संभव नहीं है। आज जन्म से लेकर मृत्यु तक आवश्यक वस्तुओं का मूल्य चुकाना अनिवार्य है।
*ज्ञान, खुशी, प्रेम और करुणा—ये ऐसी संपत्तियाँ हैं जो सदुपयोग करने से घटती नहीं, बढ़ती हैं।जो जीवन को मुट्ठी में कैद करता है, वह उसे खो देता है;और जो जीवन को बो देता है, वही सच्ची फसल काटता है ।आज से निश्चय करें हम जीवन में सिर्फ अपने पास जो भी प्राप्त है उसका सदुपयोग करेंगे… बोलेंगे… और सेवा करेंगे। जिसकी योग्यता होगी वह लाभ प्राप्त कर जीवन सार्थक करेगा।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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