*🎪पंच कल्याणक महोत्सव की सूचना व उपयोगी कहानी🔔*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 हमारा दृष्टिकोण ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨👨👦👦🐎🔑 आश्विन कृष्ण 2, 09 सितंबर मंगलवार 2025 कलि काल के 21वें तीर्थंकर सर्व सुखकारी श्री नमिनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री नमिनाथ भगवान जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*
*🎪 सितंबर 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 09, 22, व 30 तारीख को है।*
*👨👨👦👦🔔🐎 सितंबर माह में अष्टमी तिथि 14 व 30 तारीख को है।👉चतुर्दशी तिथि 20 सितंबर को है।*
*🐎✍️ पंचक 06 से 10 सितंबर तक है।*
*✅🔔⏰🐎 नोट सितंबर माह से अक्टूबर तक किसी भी प्रकार से विवाह आदि शुभ कार्यों के मुहूर्त नहीं है।*
*🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
*🌞 हमारा दृष्टिकोण 🌞*
*👨👨👦👦आज इस कहानी के माध्यम से हम अपने मन को कंट्रोल करना सीख कर जीवन सुखमय बना सकते हैं।*
किसी भी परिस्थिति या घटना को देखने का तरीका यानी दृष्टिकोण हमारे जीवन को गहराई से प्रभावित करता है। दो व्यक्ति एक ही घटना को देखकर भिन्न निष्कर्ष पर पहुँच सकते हैं — यह इस बात पर निर्भर करता है कि वे उसे किस नज़र से देखते हैं।
सकारात्मक दृष्टिकोण जहाँ उम्मीद और समाधान देता है, वहीं
नकारात्मक दृष्टिकोण व्यक्ति को निराशा की ओर ले जाती है और वह जीव पतन को प्राप्त होता है।
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*दो दृष्टिकोण, एक घटना*
प्राचीन समय की बात है। एक गुरुकुल में कई बालक शिक्षा प्राप्त कर रहे थे। उनमें से गुर्वित और तन्विक नामक दो बालकों में गहरी मित्रता थी। दोनों ही बहुत मेधावी थे और गुरुकुल के प्रिय छात्र माने जाते थे।
एक दिन उनके आचार्य उन्हें सैर कराने के लिए बाहर ले गए। चलते-चलते वे तीनों एक सुंदर बाग में पहुँच गए। वहाँ की प्राकृतिक छटा अत्यंत मनोहारी थी। बाग में भ्रमण करते समय उनकी नज़र एक आम के पेड़ पर पड़ी। उन्होंने देखा कि एक बालक डंडा लेकर पेड़ के तने पर प्रहार करके आम तोड़ने की कोशिश कर रहा है।
आचार्य मुस्कुराए और अपने दोनों शिष्यों से बोले, "वत्सों, क्या तुमने यह दृश्य देखा?"
दोनों ने एक स्वर में उत्तर दिया, "हाँ गुरुदेव, वह बालक डंडे से आम तोड़ रहा है।"
आचार्य ने पहले गुर्वित से पूछा, "बताओ, इस दृश्य को देखकर तुम्हारे मन में क्या विचार आया?"
गुर्वित बोला, "गुरुदेव, मैं सोच रहा हूँ कि जब एक वृक्ष भी बिना डंडा खाए फल नहीं देता, तो मनुष्य से बिना दबाव डाले कोई काम कैसे लिया जा सकता है? यह दृश्य मुझे सिखाता है कि समाज को अपनी बात मनवाने के लिए दबाव की आवश्यकता होती है।"
गुरु ने फिर तन्विक की ओर देखा, "वत्स तन्विक, तुम्हें क्या प्रतीत हुआ?"
तन्विक ने शांत स्वर में उत्तर दिया, "गुरुदेव, मुझे यह दृश्य बिल्कुल भिन्न रूप में दिखाई दिया। आम का पेड़, डंडे खाकर भी उस बालक को मीठे फल दे रहा है।
इससे मुझे यह सीख मिलती है कि हमें भी दूसरों की कटुता, अपमान या आघात सहकर भी उन्हें प्रेम और उपकार देना चाहिए। यही सज्जनता का धर्म है।"
यह सुनकर आचार्य प्रसन्न हो गए और बोले, "बच्चों, यही है *दृष्टिकोण का अंतर।*
घटना एक ही थी, पर तुम दोनों की व्याख्या भिन्न रही, क्योंकि तुम दोनों की सोच अलग है। *मनुष्य जिस दृष्टिकोण से किसी घटना को देखता है, वह उसी के अनुसार प्रतिक्रिया करता है और जानते हो बच्चों वहपरिणाम भी उसी अनुरूप ही भोगता है।"*
आचार्य ने फिर कहा, "गुर्वित, तुम अधिकार और बल से काम निकालने की बात कर रहे हो, जबकि तुम्हारा मित्र तन्विक प्रेम और सहिष्णुता से। दोनों के विचारों में वही अंतर है, जो दृष्टिकोण में होता है। जीवन में सच्ची समझ उसी की होती है, जिसकी दृष्टि सकारात्मक और करुणामयी होती है।"
*सीख:* *"दृष्टिकोण बदलो, जीवन बदल जाएगा।"* यह कहानी हमें सिखाती है कि हमारे जीवन की दिशा इस बात पर निर्भर करती है कि हम परिस्थितियों को किस नज़र से देखते हैं। जब हम एक ही घटना को अलग-अलग तरीके से व्याख्यायित कर सकते हैं, तो हमें यह सोचने की ज़रूरत है कि हम अपने विचारों और दृष्टिकोण को कैसा बना रहे हैं।
कई बार हम विपरीत परिस्थितियों में घिर जाते हैं — तनाव, असफलता, अपमान या संघर्ष सामने खड़े हो जाते हैं। लेकिन कुछ लोग इन्हीं हालातों में भी शांत और प्रसन्न रहते हैं। ऐसा इसलिए नहीं कि उनके जीवन में समस्याएँ नहीं होतीं, बल्कि इसलिए कि वे उन्हें देखने और सुलझाने का तरीका जानते हैं।
वहीं कुछ लोग छोटी-छोटी बातों से विचलित होकर टूट जाते हैं, क्योंकि उनका दृष्टिकोण नकारात्मक होता है। जो व्यक्ति सकारात्मक दृष्टिकोण रखता है, वह हर परिस्थिति में समाधान खोजता है; और जो नकारात्मक सोचता है, वह हर समाधान में भी समस्या ढूँढ लेता है।
*👨👨👦👦🌞🐎🔔विशेष:- भव्य आत्माओं, अतः जीवन में सुखी और सफल रहना है तो अपनी सोच, अपना दृष्टिकोण बदलिए — क्योंकि वही आपकी वास्तविकता का निर्माण करता है। आज इस तीन लोक में सबसे खराब है हमारे मन की सोच। इसलिए अपने मन को सही करने के लिए हमें सच्चे देव शास्त्र गुरु की शरण लेना आवश्यक है।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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