*🎪पंच कल्याणक महोत्सव की सूचना व उपयोगी कहानी🔔*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 शिक्षा व शिक्षक का महत्व ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔👨👨👦👦🐎🔑 आश्विन शुक्ल अष्टमी , 30 सितंबर मंगलवार 2025 कलि काल के 10वें तीर्थंकर सर्व सुखकारी श्री शीतलनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से मांगलिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री शीतलनाथ भगवान जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*✅🔔⏰🐎 नोट सितंबर माह से अक्टूबर तक किसी भी प्रकार से विवाह आदि शुभ कार्यों के मुहूर्त नहीं है।*
*🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
*शिक्षा और शिक्षक का महत्व*
शिक्षा ही वह प्रकाश है जो अज्ञान के अंधकार को दूर कर समाज और देश की उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है। आज हमारे देश की बहुत-सी समस्याएँ – भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी, अंधविश्वास और नेताओं की झूठी राजनीति – तभी कम होंगी जब जनता सचेत और शिक्षित होगी।
एक जागरूक नागरिक ही सही-गलत का निर्णय कर सकता है और समाज को सही दिशा दे सकता है।
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से कर सकते है ।✍️*
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अब इस कहानी के माध्यम से सच्चाई समझते है।
आरव एक छोटे से गाँव का लड़का था, जो शिक्षा की अहमियत को समझता था। उसके गाँव में ज्यादातर लोग खेतों में काम करते थे और पढ़ाई को व्यर्थ समझते थे। लेकिन आरव बचपन से ही मानता था कि जीवन की सच्ची सफलता और समस्याओं से समाधान का मार्ग केवल शिक्षा से ही निकलता है।
आरव का आदर्श उसके शिक्षक सागर गुरुजी थे। वे केवल किताबों तक सीमित शिक्षा नहीं देते थे, बल्कि बच्चों को जीवन जीने का सही ढंग भी सिखाते थे।
एक दिन उन्होंने बच्चों को बताया – “शिक्षा वह ताक़त है जो हमें ठग नेताओं के बहकावे से बचाती है, भ्रष्टाचार को पहचानने की बुद्धि देती है और सच्चे लोकतंत्र की रक्षा करती है। अगर जनता शिक्षित होगी तो कोई भी नेता हमें झूठे वादों से भ्रमित नहीं कर पाएगा।”
इन बातों ने आरव के मन को गहराई से छू लिया। उसने समझ लिया कि शिक्षा केवल रोजगार पाने के लिए ही नहीं, बल्कि समाज को बदलने और देश को मजबूत बनाने का सबसे बड़ा साधन है।
धीरे-धीरे परिस्थितियाँ कठिन हुईं। पिता बीमार हो गए और घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई। लेकिन सागर गुरुजी ने आरव को समझाया – “कठिनाइयाँ स्थायी नहीं होतीं। अगर तुम्हारे पास ज्ञान है, मेहनत है और शिक्षा का साथ है, तो कोई मुश्किल तुम्हें रोक नहीं सकती।”
आरव ने इन शब्दों को आत्मसात किया और निरंतर पढ़ाई में जुटा रहा।
उसकी मेहनत रंग लाई। वह न केवल पढ़ाई में सफल हुआ, बल्कि उसने गाँव के बच्चों को भी शिक्षा के महत्व के बारे में प्रेरित किया।
समय बीतने के साथ गाँव में भी बदलाव आया – लोग समझने लगे कि शिक्षा ही गरीबी, अंधविश्वास और अन्याय से लड़ने का असली हथियार है।
आज जब आरव पीछे मुड़कर देखता है, तो उसे अपने शिक्षक सागर गुरुजी की बातें याद आती हैं। उसने महसूस किया कि एक सच्चा शिक्षक न केवल जीवन बदल देता है, बल्कि पूरे समाज की दिशा भी तय कर सकता है। शिक्षा सचमुच देश की रीढ़ है, जो राष्ट्र को मजबूत खड़ा रखती है। यह वह नींव है, जिस पर भविष्य की इमारत खड़ी होती है। यदि जनता शिक्षित होगी तो कोई भी समस्या बड़ी नहीं होगी, और कोई भी नेता जनता को भ्रमित नहीं कर पाएगा।
*👨👨👦👦⏰🌞✅विशेष:- भव्य आत्माओं, आज वर्तमान में भ्रष्टाचार युक्त राजनेताओं ने शिक्षा को व्यापार बना लिया है। शिक्षा में बहुत कुछ अपने मनमानी से फेरबदल कर शिक्षा के स्वरुप को बदल दिया है। अंग्रेज तो भारत छोड़कर चले गए किंतु वर्तमान के राजनेताओं ने शिक्षा में अंग्रेजी आवश्यक कर दी। अंग्रेजी यह भाषा अधूरे 26 वर्णों की होने से इसमें अनेक प्रकार की गलतियां है। हिंदी यह 52 वर्णों की होने से पूर्ण है। हिंदी में सभी को सम्मान पूर्वक बोलने के लिए शब्दों का समावेश है। हिंदी भाषा में कोई भी शब्द का उच्चारण करने पर एक विशेष ध्वनि निर्माण होती है वह ध्वनि ही हमारे लिए उपयोगी है।उस ध्वनि के माध्यम से हम सबकुछ समझ जाते है।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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