*सुखी रहने का उपाय*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 *सुखी रहने का उपाय*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 माघ कृष्ण पक्ष, रविवार , 19 जनवरी 2025 कलिकाल के 6 छठवें तीर्थंकर श्री पद्मप्रभ भगवान जी जिनकी आराधना से सूर्य की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से बौध्दिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री पद्मप्रभ भगवान जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 जनवरी 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 19, 26,28,29,31 तारीख को कल्याणक महोत्सव है। 🔔षोडश कारण व्रत,14 जनवरी से 13 फरवरी तक*
*👨👨👦👦🔔👉 जनवरी माह में अष्टमी तिथि 07 व 22 को है। चतुर्दशी तिथि 12 व 28 जनवरी को है।🔔▶️ जनवरी माह में शुद्ध विवाह मुहूर्त 17, 18 ,19 ,21 व 24 जनवरी को है।*
*🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
🔔कई बार आपने अपनों से सुना होगा यार पहले इनकम भले ही कम थी लेकिन एक संतोष था।
कभी-कभी ऐसा होता है कि अभाव में भी मन में संतोष और खुशी बनी रहती है, लेकिन उसके उल्टे जब सब कुछ हासिल हो जाता है, तब भी खुशी का एहसास खो जाता है।
वास्तव में मन में संतोष होने से ही जीवन सुखी बनता है।
इस कहानी के माध्यम से समझें कि संतोषी जीवन ही सुखी रहने का आधार है।
*🔔सुखी रहने का उपाय 👨👨👦👦*
पुराने समय की बात है, एक सम्राट था। उसका एक नाई रोज़ उसकी मालिश और हजामत करता था। इसके बदले में सम्राट उसे रोज़ एक रुपया दिया करता था। उस समय एक रुपया बहुत कीमती हुआ करता था। नाई उस एक रुपए से अपना पेट भरता, दोस्तों को खिलाता और हमेशा संतुष्ट और प्रसन्न रहता। उसकी यह खुशी देखकर सम्राट को बड़ा अचरज होता था।
नाई रोज़ अपना सारा पैसा खर्च कर देता था, और रात को चैन की नींद सोता था। अगली सुबह उसे फिर एक रुपया मिल जाता और वह खुशी-खुशी अपना दिन बिताता। उसकी यह सरल और आनंद मयी दिनचर्या सम्राट के लिए एक रहस्य बन गई, क्योंकि खुद सम्राट अपने राजपाठ और चिंताओं के कारण इतना सुखी नहीं था।
⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️⬇️
*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨👩👧👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 789191325 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️
एक दिन सम्राट ने नाई से पूछा, "तुम हमेशा इतने खुश कैसे रहते हो?"
नाई ने मुस्कराते हुए कहा, "महाराज, मेरे पास कुछ भी नहीं है, लेकिन मैं आज में जीता हूँ और कल की चिंता नहीं करता।"
सम्राट इस उत्तर से संतुष्ट नहीं हुआ। उसने अपने वजीर से नाई की खुशी का रहस्य जानने का उपाय पूछा। वजीर ने कहा, "महाराज, इसका एक हल है। मुझे इसे आज़माने दीजिए।"
वजीर ने एक रात निन्यानबे रुपए एक थैली में रखकर नाई के घर के बाहर छोड़ दिए। सुबह जब नाई ने थैली देखी, तो वह चकित रह गया। उसने रुपए गिने और पाया कि उसमें निन्यानबे रुपए हैं। नाई ने तुरंत सोचा, "अगर मैं आज एक रुपया बचा लूं, तो मेरे पास पूरे सौ रुपए हो जाएंगे।"
उस दिन नाई ने खाना कम कर दिया और खर्चे में कटौती करने लगा। धीरे-धीरे वह पैसे बचाने की चिंता में खो गया। पहले जो नाई हर दिन प्रसन्न रहता था, वह अब हमेशा उदास और चिंतित रहने लगा।
सम्राट ने एक दिन उससे पूछा, "तुम आजकल खुश नहीं दिखते, क्या बात है?"
नाई ने अनमने भाव से कहा, "महाराज, सब ठीक है।"
सम्राट को समझ आ गया कि निन्यानबे रुपए वाली थैली ने नाई का चैन छीन लिया है। उसने वजीर से इसका कारण जानने को कहा। वजीर ने पूरी बात बताई।
अगले दिन सम्राट ने नाई को बुलाया और कहा, "सच-सच बताओ, क्या हुआ है?"
नाई ने कहा, "महाराज, मुझे एक दिन निन्यानबे रुपए मिले। तब से मैं उन्हें सौ में बदलने की कोशिश में लगा हूँ। इसी चिंता ने मेरी नींद और खुशी दोनों छीन ली हैं।"
सम्राट ने मुस्कराते हुए कहा, "यह निन्यानबे का फेर है, जो तुम्हारी शांति छीन चुका है। पहले तुम संतुष्ट थे, क्योंकि तुम्हारे पास कोई लालच नहीं था। लेकिन अब तुम्हारी इच्छाओं ने तुम्हें परेशान कर दिया है।"
*🎪👨👨👦👦🔔⏰✍️भव्य आत्माओं:- पहले साधारण सी नौकरी में भी खुशी थी आज बच्चों के बड़े बड़े पैकेज गाड़ी बंगला के बावजूद लोग दुखी है। वास्तव में संतोष ही सच्चा सुख है। जब हम लालच और इच्छाओं का पीछा करते हैं, तो हम अपनी वर्तमान खुशी खो देते हैं। जीवन का आनंद उन्हीं चीज़ों में है, जो हमारे पास हैं, न कि और अधिक पाने की चिंता में।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌳
*जैनम जयतु शासनम*
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें