*जीवन का शाश्वत सत्य*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 जीवन का शाश्वत सत्य ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 पौष शुक्ल दशमी , गुरुवार , 9 जनवरी 2025 कलिकाल के 16 वें तीर्थंकर श्री शान्तिनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से बौध्दिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री शान्तिनाथ भगवान जी का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 पौष शुक्ल ग्यारस , शुक्रवार , 10 जनवरी 2025 कलिकाल के द्वितीय तीर्थंकर श्री अजितनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से बौध्दिक संपदा प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री अजित नाथ भगवान जी का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 जनवरी 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 09,10,12,13 19, 26,28,29,31 तारीख को कल्याणक महोत्सव है। 🔔षोडश कारण व्रत,14 जनवरी से13 फरवरी तक*
*👨👨👦👦🔔👉 जनवरी माह में अष्टमी तिथि 22 को है। चतुर्दशी तिथि 12 व 28 जनवरी को है।🔔▶️ जनवरी माह में शुद्ध विवाह मुहूर्त 17, 18 ,19 ,21 व 24 जनवरी को है।*
*🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
👉 *मृत्यु क्यों आवश्यक है?*
*हर कोई मृत्यु से डरता है, लेकिन जन्म और मृत्यु सृष्टि के नियम हैं... यह स्वयं के कर्मों के अनुसार ही सबकुछ निर्धारित है। इसे विश्व की कोई भी शक्ति बदल नहीं सकती।*
एक बार, एक राजा एक संत के पास गया, जो राज्य के बाहर एक पेड़ के नीचे बैठे थे। राजा ने पूछा, "हे स्वामी! *क्या कोई औषधि है जो अमरता दे सके? कृपया मुझे बताएं।"*
संत ने कहा, "हे राजा! आपके सामने जो दो पर्वत हैं, उन्हें पार कीजिए। वहाँ एक झील मिलेगी। उसका पानी पीने से आप अमर हो जाएंगे।"
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राजा ने पर्वत पार कर झील पाई। जैसे ही वह पानी पीने को झुके, उन्होंने कराहने की आवाज सुनी। आवाज का पीछा करने पर उन्होंने एक बूढ़े और कमजोर व्यक्ति को दर्द में देखा।
राजा ने कारण पूछा, तो उस व्यक्ति ने कहा, *"मैंने इस झील का पानी पी लिया और अमर हो गया*। जब मेरी उम्र सौ साल की हुई, तो मेरे बेटे ने मुझे घर से निकाल दिया। मैं पचास साल से यहाँ पड़ा हूँ, बिना किसी देखभाल के। मेरा बेटा मर चुका है, और मेरे पोते अब बूढ़े हो चुके हैं। मैंने *खाना-पीना बंद कर दिया है, फिर भी जीवित हूँ।"*
राजा ने सोचा, *"बुढ़ापे के साथ अमरता का क्या फायदा?* अगर मैं अमरता के साथ यौवन भी प्राप्त कर सकूँ तो?" राजा वापस संत के पास गए और समाधान पूछा, "कृपया मुझे अमरता के साथ यौवन प्राप्त करने का उपाय बताएं।"
संत ने कहा, "झील पार करने के बाद, आपको एक और पर्वत मिलेगा। उसे पार करिए, और एक पेड़ मिलेगा जिस पर पीले फल लगे होंगे। उन फलों में से एक खा लीजिए, *और आपको अमरता के साथ यौवन भी मिल जाएगा।"*
राजा ने दूसरा पर्वत पार किया और एक पेड़ देखा, जिस पर पीले फल लगे थे। जैसे ही उन्होंने फल तोड़ने के लिए हाथ बढ़ाया, उन्हें तेज बहस और लड़ाई की आवाजें सुनाई दीं। उन्होंने सोचा, इस सुनसान जगह में कौन झगड़ सकता है?
*राजा ने चार जवान आदमियों को ऊंची आवाज़ में झगड़ते देखा।* राजा ने पूछा, "तुम लोग क्यों झगड़ रहे हो?" उनमें से एक बोला, "मैं 250 साल का हूँ और मेरे दाहिने वाले व्यक्ति की उम्र 500 साल है। वह मुझे मेरी संपत्ति का हिस्सा नहीं दे रहा।"
जब राजा ने दाहिने वाले व्यक्ति से पूछा, उसने कहा, "मेरा पिता, जो 750 साल का है, *अभी भी जीवित है और उसने मुझे मेरा हिस्सा नहीं दिया। तो मैं अपने बेटे को कैसे दूं?"*
उस आदमी ने अपने 400 साल के पिता की ओर इशारा किया, जिन्होंने भी वही शिकायत की। उन्होंने राजा से कहा कि संपत्ति के इस अंतहीन झगड़े की वजह से गांववालों ने उन्हें गांव से निकाल दिया है।
राजा हैरान होकर संत के पास लौटे और बोले, *"धन्यवाद, आपने मुझे मृत्यु का महत्व समझाया।"*
संत ने कहा, *"मृत्यु के कारण ही इस संसार में प्रेम है।"*
*"मृत्यु के बारे में चिंता करने के बजाय, हर दिन और हर पल को अपने धर्म के अनुसार कर्तव्यों का पालन करते हुए जियो। खुद को बदलो, दुनिया बदल जाएगी।"*
1. जब आप स्नान करते समय भगवान का नाम लेते हैं, तो वह एक पवित्र स्नान बन जाता है।
2. जब आप भोजन बनाते समय नाम लेते हैं, तो वह भोजन अमृत बन जाता है।
3. जब आप चलते समय नाम लेते हैं, तो वह एक तीर्थ यात्रा बन जाती है।
4. जब आप भोजन करते समय नाम लेते हैं, तो वह भोजन दिव्य औषधि बन जाता है।
5. जब आप सोने से पहले नाम लेते हैं, तो वह ध्यानमय नींद आ जाती है।
6. जब आप काम करते समय नाम लेते हैं, तो वह भक्ति बन जाती है।
7. जब आप घर में नाम लेते हैं, तो वह घर मंदिर बन जाता है।
8. बस आप जब भी कोई कार्य करने से पहले यह विचार अवश्य करें कि क्या इस कार्य में आपके प्रभु की आज्ञा है।
मस्त रहो। खुशियां बिखेरते हुए जीवन सार्थक करें।
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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