*🎪पंच कल्याणक महोत्सव की सूचना व उपयोगी कहानी🔔*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 मौन का महत्व ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 आषाढ़ शुक्ल 6 , 1 जुलाई मंगलवार 2025 कलि काल के शासन नायक अंतिम तीर्थंकर उपसर्ग विजेता श्री महावीर भगवान जी जिनकी आराधना से बुध की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से बौध्दिक शक्ति प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करवाने वाले श्री महावीर भगवान जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 आषाढ़ शुक्ल सप्तमी , 2 जुलाई बुधवार 2025 कलि काल के 22 वें तीर्थंकर श्री नेमिनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से राहू की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से बौध्दिक शक्ति प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करवाने वाले श्री नेमिनाथ भगवान जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*🎪 जुलाई 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 12, 20, 26 , 30 व 31 तारीख को है।*
*👨👨👦👦🔔🐎 जुलाई माह में अष्टमी तिथि 3 व 18 तारीख को है।👉चतुर्दशी तिथि 09 व 23 जुलाई को है।*
*⛱️🪔जुलाई माह में 09 से 15 जुलाई तक वर्षायोग महोत्सव स्थापना होगी सभी अपनी शक्ति अनुसार लाभ प्राप्त करें🔐🔑*
*👨👨👦👦🔔👉 दिनांक 03 से 10 जुलाई तक अष्टान्हिका महापर्व 🔔*
*🐎✍️ पंचक 11 से 17 जुलाई तक है।*
*✅🔔⏰🐎 नोट जुलाई माह से अक्टूबर तक किसी भी प्रकार से विवाह + वाहन व प्रापर्टी खरीदने का शुभ मुहूर्त नहीं है।*
*🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
*एक चुप, सौ सुख*
“ईश्वर ने हमें दो आँखें, दो कान, दो नासिकाएँ दी हैं—पर जीभ केवल एक। क्यों?”
इस प्रश्न का उत्तर आपको इस प्रेरक कहानी में मिलेगा।
एक दिन एक मछुआरा तालाब के किनारे बैठा, अपने काँटे से मछलियाँ पकड़ने की कोशिश कर रहा था। काफी देर हो गई, पर कोई भी मछली काँटे में नहीं फँसी। वह हैरान हुआ—तालाब में तो बहुत-सी मछलियाँ थीं, फिर भी कोई फँस क्यों नहीं रही?
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उसी समय एक राहगीर वहाँ से गुज़रा। उसने देखा कि मछुआरा निराश बैठा है, तो उसने कहा,
“भैया, लगता है आप बहुत दिन बाद मछली पकड़ने आए हो। अब इस तालाब की मछलियाँ काँटे में नहीं फँसती।”
मछुआरा चकित हो उठा, “ऐसा क्यों?”
राहगीर मुस्कुराकर बोला,
“कुछ दिन पहले यहाँ एक संत ठहरे थे। उन्होंने मौन की महिमा पर इतना प्रभावशाली प्रवचन दिया कि जब वे बोलते थे, तब तालाब की मछलियाँ भी उन्हें ध्यान से सुनती थीं। संत की वाणी का असर ऐसा हुआ कि अब ये मछलियाँ भी मौन साध चुकी हैं। जब मुँह ही नहीं खोलेंगी, तो काँटे में फँसेंगी कैसे?”
मछुआरा स्तब्ध रह गया। वह समझ चुका था कि असली जाल हमारी बोलने की आदत है।
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*शब्दों का संयम, जीवन का सार*
ईश्वर ने हमें अनेक इंद्रियाँ दोहरी दी हैं—पर जीभ एक ही दी है। क्योंकि यही एक इंद्रिय सबसे अधिक समस्याओं का कारण बन सकती है। संत की बात याद कीजिए—“जब खोलोगे ही नहीं, तो फँसोगे कैसे?”
अगर आप सभी इंद्रियों पर संयम चाहते हैं, तो सबसे पहले जीभ पर नियंत्रण रखिए। तभी बाकी इंद्रियाँ भी अनुशासित रहेंगी।
कई बार व्यक्ति के अनुचित, कटु या व्यर्थ बोल किसी बने-बनाए कार्य को बिगाड़ देते हैं। एक वाक्य रिश्तों में जीवनभर की कड़वाहट घोल सकता है। समाज में प्रतिष्ठा गिर सकती है। आज की दुनिया में अनेक समस्याओं की जड़—“बिना सोचे-समझे बोलना” ही है।
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*मीठे बोल का चमत्कार*
ईश्वर कहते हैं:
*“कम बोलो, धीरे बोलो, और मीठा बोलो।”*
एक मधुर वाणी, जहाँ मन को शांति देती है, वहीं दूसरों को भी आपकी ओर आकर्षित करती है। हमारी वाणी हमारे व्यक्तित्व का आईना होती है।
*जिसके भीतर जितना अधिक ज्ञान, समझ और आत्म-संयम होता है, उसकी वाणी उतनी ही विनम्र और सारगर्भित होती है। मौन कभी-कभी सबसे गहरी बात कह देता है।*
*👪🎪⏰🌞विशेष:- भव्य आत्माओं,बोलने से पहले सोचो, और जहाँ जरूरी न हो, वहाँ मौन ही सबसे बड़ी बुद्धिमानी है।"*एक चुप सौ सुख, बोलने से पहले सोचें कि वह ज़रूरी, सत्य और प्रिय है या नहीं।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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