*🎪पंच कल्याणक महोत्सव की सूचना व उपयोगी कहानी🔔*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 ज्येष्ठ शुक्ल 12, 07 जून शनिवार 2025 कलि काल के सातवें तीर्थंकर उपसर्ग विजेता सुपार्श्वनाथ सर्व सुखकारी सुख प्रदाता श्री सुपार्श्वनाथ भगवान जी जिनकी आराधना से गुरु की महादशा अनुकूल हो जाती है और सभी प्रकार से सुखकारी बौद्धिक शक्ति प्राप्ति कर उत्तम धर्म को धारण कर भव्य जीव मोक्ष मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक विचरण करता है। मोक्ष प्रशस्त करने वाले श्री सुपार्श्वनाथ भगवान जी का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🎪 जून 2025 में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 07,13, 17, 20 को ( नवमी व दसमीं समाहित तिथि है।)तारीख को है।*
*👨👨👦👦🔔🐎 जून माह में अष्टमी तिथि 3 व 19 तारीख को है।👉चतुर्दशी तिथि 10 व 24 जून को है।*
*👨👨👦👦🔔👉 जून माह में शुद्ध विवाह मुहूर्त 02,03,04 को है।🔔*
*🐎✍️ पंचक 16 से 20 जून तक है।*
*👨👨👦👦🚙🚗 वाहन खरीदने का मुहूर्त 5,6,15,16,20,23,26 व 27 जून को है।*
*🏫🛖 प्रापर्टी खरीदने का मूहूर्त 01,10,11,12,20,24,25,26,29 व 30 जून को है।*
*✅🔔⏰🐎 नोट जुलाई माह से अक्टूबर तक किसी भी प्रकार से विवाह + वाहन व प्रापर्टी खरीदने का शुभ मुहूर्त नहीं है।*
*🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी तिथियां जयपुर जैन पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
*मेरे कर्मों का लेखा-जोखा*
भव्य आत्माओं आज इस कहानी के माध्यम से हम समझ सकते है कि आज हमारे कर्म ही हमारा भाग्य बना सकते है।
एक मुल्क का बादशाह बीमार हो गया, जब बादशाह ने देखा के उसके बचने की कोई अब उम्मीद नहीं तो उसने अपने मुल्क में ऐलान करवा दिया कि- *_"वो अपनी बादशाहत उस शख्स के नाम कर देगा जो उसके मरने के बाद उस की जगह एक रात क़ब्र में गुज़ारेगा।"_*
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सब लोग बहुत ख़ौफ़ज़दा हुए और कोई भी ये काम करने को तैयार ना था। इसी दौरान एक कुम्हार जिस ने अपनी सारी ज़िंदगी में कुछ भी जमा न किया था। उसके पास सिवाए एक गधे के और कुछ भी न था। उस ने सोचा कि अगर वो ऐसा करले तो वो बादशाह बन सकता है और हिसाब किताब में क्या जवाब देना पड़ेगा ? क्यूँकि उस के पास था ही क्या ? *सिर्फ एक गधा!*
और उसने ऐलान कर दिया कि वो एक रात बादशाह की जगह क़ब्र में गुज़ारेगा। बादशाह के मरने के बाद लोगों ने बादशाह की क़ब्र तैयार की और वादे के मुताबिक़ कुम्हार ख़ुशी ख़ुशी इसमें जाकर लेट गया,और लोगों ने क़ब्र को बंद कर दिया।
कुछ वक़्त गुज़रने के बाद फ़रिश्ते आए और उससे कहा उठो और अपना हिसाब दो।
*_उसने कहा भाई हिसाब किस चीज़ का, मेरे पास तो सारी ज़िन्दगी था ही कुछ नहीं सिवाए एक मात्र गधे के !!!_*
फ़रिश्ते उसका जवाब सुनकर जाने लगे लेकिन फिर एकदम रुके और बोले ज़रा इसका नामा- ए-आमाल खोल कर देखें इस में क्या है ? बस फिर क्या था, सबसे पहले उन्होंने पूछा कि हाँ भई ! *_फंला फंला दिन तुम ने गधे को एक वक़्त भूखा रखा था।_*
इसने जवाब दिया- *हाँ, फ़ौरी तौर पर हुक्म हुआ कि उसको सौ कोड़े मारे जाएं, उसकी ख़ूब धुनाई शुरू हो गई।*
इसके बाद फिर फ़रिश्तों ने सवाल किया अच्छा ये बताओ- _*फंला फंला दिन तुमने ज़्यादा वज़न लादकर उसको मारा था।*_
उसने कहा कि- *हाँ ,फिर हुक्म हुआ कि उस को दो सौ कोड़े मारे जाएं, फिर मार पड़ना शुरू हो गई। इस तरह उसे अन्य कार्यों के कारण से सुबह तक उसको मार पड़ती रही।*
सुबह सब लोग एकत्र हुए और क़ब्र की ख़ुदाई की ताकि अपने नए बादशाह को रस्मों रिवाज के अनुसार गद्दी पर बैठा सकें। जैसे ही उन्होंने क़ब्र खोली तो उस कुम्हार ने बाहर निकल कर दौड़ लगा दी। लोगों ने पूछा-
*बादशाह सलामत किधर जा रहे हो?*
तो उस ने जवाब दिया- _*ओ भाईयो पूरी रात में एक गधे का हिसाब नहीं दे पाया ,तो पूरी रियासत और मुल्क का हिसाब कौन देता फिरेगा...*_
भव्य आत्माओं,कभी आपने सोचा है कि हमें भी हिसाब देना पड़ेगा और पता नहीं किस किस चीज़ का हिसाब देना पड़ेगा जो शायद हमें याद भी नहीं.......
अतः हमें कुछ भी बोलने से या करने से पहले स्व बुध्दि विवेक पूर्वक विचार अवश्य ही करना चाहिए कि हमारे कर्म हमें शुभ फल या अशुभ फल देने वाले हैं। अगर हम इसका विचार करना प्रारंभ कर दें तो हमारा वर्तमान व भविष्य सुखमय हो सकता है।
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*👨👨👦👦🔔⏰✅ इस कहानी से सकारात्मक सीख प्राप्त होती है तो इस कहानी को अन्य लोगों को शेयर कर जीवन सुखमय बना सकते है।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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