शनिवार, 31 अगस्त 2024

बचपन की यादें

*जीवन की बचपन की यादें*
⛳🕉️🌞🕉️🪔⛳
*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨‍👩‍👧‍👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩‍🚒 जीवन की बचपन की  यादें ✍️🐒*

*🔔👨‍👩‍👧‍👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*

*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 सितम्बर माह में  अष्टमी तिथि 11व  25 सितम्बर को है।*
*👨‍👨‍👦‍👦🔔👉 सितम्बर माह में  चतुर्दशी तिथि 1 व  17 सितम्बर को है।*
*🎪इस सितंबर माह में  ▶️ 🎪 18 सितंबर तक षोडश कारण व्रत ⛳ ।*
🎪सितंबर माह के महत्वपूर्ण धार्मिक कार्यक्रम निम्न प्रकार है 
▶️ 6 सितंबर को रोट तीज व तीन चौबीसी व्रत 
▶️8 से 17 में दश लक्षण व्रत 
▶️8 से 12 में मेरु स्थापना व पुष्पांजलि व्रत 
▶️ 9 को सुपार्श्वनाथ जी का गर्भ कल्याणक 
▶️ 11 को पुष्पदंत जी का मोक्ष कल्याणक 
▶️ 13  को धूप दशमी, सुगंध दशमी 
▶️15 से 17 तक रत्नत्रय व्रत 
▶️ 17 को श्री वासुपूज्य जी का मोक्ष व अनंत चतुर्दशी व्रत 
▶️ 18 को क्षमावाणी पर्व 
▶️19 को श्री नमिनाथ जी का गर्भ कल्याणक 
 *🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी  तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*

*जीवन के कुछ गूढ़ रहस्य जो हमें जब भी याद आते है तो मन.......*

*पांचवीं* तक *स्लेट पर लिखने वाली कलम*  को *जीभ* से चाटकर *कैल्शियम* की कमी पूरी करना हमारी स्थाई आदत थी
*लेकिन*
इसमें *पापबोध* भी था कि कहीं *विद्यामाता* नाराज न हो जायें ...!!!

*पढ़ाई* के *तनाव* हमने *पेन्सिल* का पिछला हिस्सा चबाकर मिटाया था ...!!!
*👨‍👨‍👦‍👦 मात्र पांच पैसे से एक रुपए जेब खर्च प्रतिदिन मिलता था।*

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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक  पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से  कर सकते है ।✍️*
*✍️➡️👨‍👩‍👧‍👦अगर कोई भी पुण्यात्मा श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां + शुभनाम+ 【गांव शहर】निवास स्थान  लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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*चंद पैसों के लिए घर के बड़े बुजुर्ग के हाथ पैर दबाते या अन्य कार्य खुशी से कर देते थे*

*पुस्तक* के बीच *पौधे की पत्ती* और *मोरपंख* रखने से हम *होशियार* हो जाएंगे ... ऐसा हमारा *दृढ़ विश्वास* था

*कपड़े* के *थैले* में *किताब-कॉपियां* जमाने का *विन्यास* हमारा *रचनात्मक कौशल* था ...!!!

हर साल जब नई *कक्षा* के *बस्ते बंधते* तब *कॉपी किताबों* पर *जिल्द* चढ़ाना हमारे जीवन का *वार्षिक उत्सव* मानते थे ...!!!

*माता - पिता* को हमारी *पढ़ाई* की कोई *फ़िक्र* नहीं थी, न हमारी *पढ़ाई* उनकी *जेब* पर *बोझा* थी ...
*सालों साल* बीत जाते पर *माता - पिता* के *कदम* हमारे *स्कूल* में न पड़ते थे ...!!!

एक *दोस्त* को *साईकिल* के बिच वाले *डंडे* पर और *दूसरे* को *पीछे कैरियर* पर *बिठा* हमने कितने रास्ते *नापें* हैं, यह अब याद नहीं बस कुछ *धुंधली* सी *स्मृतियां* हैं ...!!!
*मात्र तीन सौ रुपए में नई साईकिल मिल जाती थी।*

*स्कूल* में *पिटते* हुए और *मुर्गा* बनते हमारा *ईगो* हमें कभी *परेशान* नहीं करता था दरअसल हम जानते ही नही थे कि, *ईगो* होता क्या है❓️

*पिटाई* हमारे *दैनिक जीवन* की *सहज सामान्य प्रक्रिया* थी
*पीटने वाला* और *पिटने वाला* दोनो *खुश* थे,
*पिटने वाला* इसलिए कि हमे *कम पिटे* और *पीटने वाला* इसलिए *खुश* होता था कि *हाथ साफ़* हुआ ...!!!

हम अपने *माता - पिता* को कभी नहीं बता पाए कि हम उन्हें कितना *प्यार* करते हैं, क्योंकि हमें *"आई लव यू"* कहना आता ही नहीं था ...!!!

आज हम *गिरते - सम्भलते*, *संघर्ष* करते दुनियां का हिस्सा बन चुके हैं, कुछ *मंजिल* पा गये हैं तो कुछ न जाने *कहां खो* गए हैं ...!!!

हम दुनिया में कहीं भी हों लेकिन यह सच है, हमे *हकीकतों* ने *पाला* है, हम सच की दुनियां में थे ...!!!

*कपड़ों* को *सिलवटों* से बचाए रखना और *रिश्तों* को *औपचारिकता* से बनाए रखना हमें कभी आया ही नहीं ... इस मामले में हम सदा *मूर्ख* ही रहे ...!!!

अपना अपना *प्रारब्ध* झेलते हुए हम आज भी *ख्वाब* बुन रहे हैं, शायद *ख्वाब बुनना* ही हमें *जिन्दा* रखे है वरना जो *जीवन* हम *जीकर* आये हैं उसके सामने यह *वर्तमान* कुछ भी नहीं ...!!!

हम *अच्छे* थे या *बुरे* थे पर हम सब साथ थे *काश* वो समय फिर लौट आए ...!!!

"एक बार फिर अपने *बचपन* के *पन्नो* को पलटिये, सच में फिर से जी उठेंगे”...
  
और अंत में ...

हमारे *पिताजी* के समय में *दादाजी* गाते थे ...

*मेरा नाम करेगा रोशन जग में मेरा राज दुलारा*

हमारे *ज़माने* में हमने गाया ...

*पापा कहते है बड़ा नाम करेगा*

अब *हमारे बच्चे* गा रहे हैं …

*बापू सेहत के लिए ... तू तो हानिकारक है*

*सही / वास्तव* में हम *कहाँ से कहाँ* आ गए ...???

*एक बार मुड़ कर तो सोचिए कहा गए वें हमारे आजादी के दिन ..*

*👨‍👩‍👧‍👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा  पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता  करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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