*👨👨👦👦 स्वयं की पहचान🔔*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒 स्वयं की पहचान ✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 जेष्ठ शुक्ल 04, सोमवार , 10 जून 2024 कलिकाल के 15 वें तीर्थंकर धर्मनाथ भगवान बुध की महादशा को अनुकूल बनाने वाले सभी प्रकार के अरिष्टों को समाप्त करने की शक्ति प्रदान कर उत्तम धर्म को धारण करवा कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने वाले श्री धर्मनाथ भगवान जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔 जून माह में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 18, 23, 27 को कल्याणक महोत्सव है।*
*👨👨👦👦🔔👉 जून माह में अष्टमी तिथि 29 जून को है। चतुर्दशी तिथि 20 जून को है।*
*🙆इस जून माह कोई भी विवाह मुहूर्त नहीं है। विवाह मुहूर्त 9 जुलाई से प्रारंभ होकर 15 जुलाई तक ही है।*
*🌞यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
👨👨👦👦आज हम सभी समझें की हमारी स्वयं की पहचान क्या है ✍️
*एक मक्खी एक हाथी के ऊपर बैठ गयी। हाथी को पता न चला मक्खी कब बैठी। मक्खी बहुत भिनभिनाई आवाज की और कहा, ‘भाई! तुझे कोई तकलीफ हो तो बता देना।*
*वजन मालूम पड़े तो खबर कर देना, मैं हट जाऊंगी।’ लेकिन हाथी को कुछ सुनाई न पड़ा। फिर हाथी एक पुल पर से गुजरने लगा बड़ी पहाड़ी नदी थी,भयंकर गङ्ढ था, मक्खी ने कहा कि ‘देख, दो हैं, कहीं पुल टूट न जाए! अगर ऐसा कुछ डर लगे तो मुझे बता देना। मेरे पास पंख हैं, मैं उड़ जाऊंगी।’*
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*🕉️🌞✍️पुण्य वृद्धि के इच्छुक पुण्यात्माओं से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को भेजकर स्वयं के व उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें। धर्मात्मा बंधु पापों को पुण्य मे बदलना चाहते है तो आज ही संस्था से जुड़कर अपना मोक्ष मार्ग को सुरक्षित करें ।जो स्वयं के पुण्य को शीघ्रातिशीघ्र वृद्धिगत करना चाहते है वे सभी अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग संस्था के माध्यम से कर सकते है ।✍️*
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*हाथी के कान में थोड़ी-सी कुछ भिनभिनाहट पड़ी, पर उसने कुछ ध्यान न दिया। फिर मक्खी के बिदा होने का वक्त आ गया। उसने कहा, ‘यात्रा बड़ी सुखद* *हुई,साथी-संगी रहे,मित्रता बनी,अब मैं जाती हूं,कोई काम हो, तो मुझे कहना, तब मक्खी की आवाज थोड़ी हाथी को सुनाई पड़ी, उसने कहा, ‘तू कौन है कुछ पता नहीं, कब तू आयी,कब तू मेरे शरीर पर बैठी,कब तू उड़ गयी, इसका मुझे कोई पता नहीं है। लेकिन मक्खी तब तक जा चुकी थी।*
*सन्त कहते हैं - ‘हमारा होना भी ऐसा ही है। इस बड़ी पृथ्वी पर हमारे होने,ना होने से कोई फर्क नहीं पड़ता। हाथी और मक्खी के अनुपात से भी कहीं छोटा,हमारा और ब्रह्मांड का अनुपात है । हमारे ना रहने से क्या फर्क पड़ता है? लेकिन हम बड़ा शोरगुल मचाते हैं। वह शोरगुल किसलिये है? वह मक्खी क्या चाहती थी? वह चाहती थी हाथी स्वीकार करे,तू भी है; तेरा भी अस्तित्व है, वह पूछ चाहती थी। हमारा अहंकार अकेले तो नहीं जी सकता है। दूसरे उसे मानें, तो ही जी सकता है। इसलिए हम सब उपाय करते हैं कि किसी भांति दूसरे उसे मानें,ध्यान दें,हमारी तरफ देखें; उपेक्षा न हो।*
*हम वस्त्र पहनते हैं तो दूसरों को दिखाने के लिये, स्नान करते हैं सजाते-संवारते हैं ताकि दूसरे हमें सुंदर समझें। धन इकट्ठा करते, मकान बनाते, तो दूसरों को दिखाने के लिये। दूसरे देखें और स्वीकार करें कि तुम कुछ विशिष्ट हो, ना की साधारण।*
*तुम मिट्टी से ही बने हो और फिर मिट्टी में मिल जाओगे, तुम अज्ञान के कारण खुद को खास दिखाना चाहते हो वरना तो तुम बस एक मिट्टी के पुतले हो और कुछ नहीं। अहंकार सदा इस तलाश में है–वे आंखें मिल जाएं, जो मेरी छाया को वजन दे दें।*
*याद रखना आत्मा के निकलते ही यह मिट्टी का पुतला फिर मिट्टी बन जाएगा इसलिए अपना झूठा अहंकार छोड़ दो और सभी का उनकी योग्यता अनुसार सम्मान करो क्योंकि भव्य जीवों में स्वयं की आत्मा को परमात्मा बनाने की शक्ति विद्यमान है।यह मनुष्य भव हम सभी को अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए अपने कर्मों को समाप्त करने के लिए प्राप्त हुआ है। प्रतिदिन जागने के बाद व रात्रि विश्राम के पहले पांच मिनट चिंतन करें मुझे मनुष्य भव क्यों प्राप्त हुआ?*
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*जो प्राप्त है- उसे ही पर्याप्त मानकर जीवन सार्थक करें*
*जिसका मन में विकार नहीं*
*उसके पास समस्त है!!*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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