*समर्पण से सत्कार और मद (घमंड) से तिरस्कार*
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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी सभी के काम की*
*💪👩🚒समर्पण से सत्कार और मद (घमंड) से तिरस्कार✍️🐒*
*🔔👨👩👧👦↔️ जैन तीर्थंकर प्रभु के पंच कल्याणक महोत्सव की अग्रिम सूचना🔔*
*🔔🪔 फाल्गुन कृष्ण ग्यारस, बुधवार , 06 मार्च 2024 कलिकाल के प्रथम तीर्थंकर गुरु की महादशा को अनुकूल बनाने वाले मन के सभी विकल्पों को शांत कर जगत में सर्व सुखकारक संस्कार प्रदाता 1008 श्री ऋषभनाथ भगवान का केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव है।*
*🔔🪔 फाल्गुन कृष्ण ग्यारस, बुधवार , 06 मार्च 2024 कलिकाल के ग्यारवें तीर्थंकर गुरु की महादशा को अनुकूल बनाने वाले मन के सभी विकल्पों को शांत कर जगत में सर्व सुखकारक सर्वश्रेष्ठ शक्ति प्रदाता 1008 श्री श्रेयांसनाथ भगवान का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव है।*
*🎪17 से 25 तक आष्टान्हिका शाश्वत पर्व*
*🕉️22 मार्च आचार्य श्री चैत्यसागर मुनिराज का दीक्षा दिवस*
*🎪 31 मार्च निर्यापक समय सागर जी का मुनि दीक्षा दीवस*
*⛳षोडषकारण व्रत 26 मार्च से प्रारंभ*
*🌞मार्च माह में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव 7 को मुनिसुब्रतनाथ भगवान जी का मोक्ष कल्याणक , 9, ,12, 14, 16, 17 ,29, 30 दिनांकों में तीर्थंकर भगवन्तों के पंच कल्याणक महोत्सव है। यह सभी पंच कल्याणक तिथियां उत्तर पुराण के अनुसार है इन तिथियों से सम्पूर्ण विश्व में कल्याणक महोत्सव मनाए जाते है।यह सभी तिथियां जयपुर पंचांग के अंतर्गत है।विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहे शिक्षाप्रद कहानियां ।*
*🔔आज हम सभी इस कहानी के माध्यम से समझते है कि हमारी वर्तमान स्थिति परिस्थिति कैसी है।समर्पण से सत्कार और मद (घमंड) से तिरस्कार*
⏰एक कुशल शिल्पकार लंबी यात्रा के बाद किसी छायादार वृक्ष के नीचे विश्राम के लिये बैठ गया। कुछ समय विश्राम करने के बाद अचानक उसे सामने एक पत्थर का टुकड़ा पड़ा दिखाई दिया। उसने उस सुंदर पत्थर के टुकड़े को उठा लिया, सामने रखा और औजारों के थैले से छेनी-हथौड़ी निकालकर उसे तराशने के लिए जैसे ही पहली चोट की, पत्थर जोर से चिल्ला पड़ा, "उफ मुझे मत मारो।" दूसरी बार वह रोने लगा, "मत मारो मुझे, मत मारो... मत मारो।
शिल्पकार ने उस पत्थर को छोड़ दिया, अपनी पसंद का एक अन्य टुकड़ा उठाया और उसे हथौड़ी से तराशने लगा। वह टुकड़ा चुपचाप वार सहता गया और देखते ही देखते कुछ समय में उसमें से एक देवी की मूर्ति उभर आई। मूर्ति वहीं पेड़ के नीचे उच्चासन पर विराजमान कर वह अपनी राह पकड़ आगे चला गया।
कुछ वर्षों बाद उस शिल्पकार को फिर से उसी पुराने रास्ते से गुजरना पड़ा, जहाँ पिछली बार विश्राम किया था। उस स्थान पर पहुँचा तो देखा कि वहाँ उस मूर्ति की पूजा अर्चना हो रही है, जो उसने बनाई थी। भीड़ है, भजन आरती हो रही है, भक्तों की पंक्तियाँ लगीं हैं, जब उसके दर्शन का समय आया, तो पास आकर देखा कि उसकी बनाई मूर्ति का कितना सत्कार हो रहा है! जो पत्थर का पहला टुकड़ा उसने, उसके रोने चिल्लाने पर फेंक दिया था वह भी एक ओर में पड़ा है और लोग उसके सिर पर नारियल फोड़ फोड़ कर मूर्ति पर चढ़ा रहे हैं।
शिल्पकार ने मन ही मन सोचा कि जीवन में कुछ बन पाने के लिए शुरू में अपने शिल्पकार को पहचानकर, उनका सत्कार कर कुछ कष्ट झेल लेने से जीवन बन जाता हैं। बाद में सारा विश्व उनका सत्कार करता है। जो डर जाते हैं और बचकर भागना चाहते हैं वे बाद में जीवन भर कष्ट झेलते हैं, उनका सत्कार कोई नहीं करता।
*👨👨👦👦🎪⛳🔔▶️विशेष :- भव्य आत्माओं, आज विश्व का प्रत्येक जीव अपने मन के अनुसार धर्म कर्म कर रहा है। जिसके कारण वह न चाहते हुए भी अनेकों प्रकार की समस्याओं में फंसा हुआ है।इन सभी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए उसे सच्चे देव शास्त्र गुरु के प्रति मन से वचनों से व शरीर के साथ अपनी स्व कमाई के धन से समर्पण होना होगा। जिस प्रकार हमारा समर्पण होगा उसी प्रकार की हमें उपलब्धि प्राप्त होगी। यही प्रकृति का शाश्वत नियम है।✍️*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️ प्रति समय प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें ) का पालन कीजिये।*
*➡️जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हम सभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा पूर्वो पार्जित कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के मोक्ष मार्ग में सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने पूर्वो पार्जित कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम जयतु शासनम*
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