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*🌞🕉️वसुनंदी गुरुवे नमः🕉️🌞*
*🌞✍️सच्चा साथी✍️🌞*
*👨👩👧👦✍️कहानी बड़े काम की*
*💪👩🚒भगवान का वास ..*
*👨👩👧👦🤝👩🦰नोट:-महानुभावों आपने इस प्रकार की कहानियां हजारों बार पढ़ ली होगी।फिर भी इस प्रकार की कहानियां आपको बार बार भेजी जा रही है।इसका कारण यह है कि जिन महानुभावों ने कहानियां पढकर अपना आचरण सुधार लिया वे तो धन्य है।जिन महानुभावों ने कहानियां पढकर अपना आचरण नहीं सुधारा कोई बात नहीं, आपके आत्मा पर कुछ संस्कार तो पढगये जब वे उदय मे आयेंगे तो नियम से फल की प्राप्ति होगी।हाँ जितना हमारा समीचीन पुरषार्थ होगा उतना ही लाभदायक फल हमें प्राप्त होगा।अतः आप अपने किमती समय का सदुपयोग करते हुए स्वयं की आत्मा पर अच्छे संस्कार डालकर यह मनुष्य भव सफल करें।हाँ आप हमें अपने विचार संस्था के नंबर पर व्हाट्सएप करते हुए अवश्य ही भेजे।संस्था का एकमात्र उद्देश्य यह है कि इस भव मे आपसभी के रत्नत्रय मे दिन दुगुनी रात चौगुनी वृद्धि हो ओर समाधि मरण हो।*
*एक सन्यासी घूमते-फिरते एक दुकान पर आये । दुकान में अनेक छोटे-बड़े डिब्बे थे ।*
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*🕉️🌞✍️पुण्यवृद्धि के इच्छुक श्रावकों से निवेदन है कि इस पोस्ट को परिवार, मित्रों और अन्य परिचितों तक इस पोस्ट को पहुचाकर उनके पुण्य मे भी वृद्धि करें।✍️*
*✍️➡️👨👩👧👦अगर कोई भी श्रावक इस प्रकार की पोस्ट को व्हाट्सएप पर प्राप्त करना चाहते है तो श्री शांति सागर समाधि साधना सेवा केंद्र जयपुर रजिस्टर संस्था के 📲 9461956111 नंबर पर व्हाट्सएप पर कहानियां लिखकर व्हाट्सएप करें,काल ना करें।*
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*सन्यासी ने एक डिब्बे की ओर इशारा करते हुए* *दुकानदार से पूछा, "इसमें क्या है?"*
*दुकानदार ने कहा, "इसमें नमक है।"*
*सन्यासी ने फिर पूछा, "इसके* *पास वाले में क्या है ?"*
*दुकानदार ने कहा, "इसमें हल्दी है।"*
*इसी प्रकार सन्यासी पूछ्ते गए और दुकानदार बतलाता रहा।*
*अंत में पीछे रखे डिब्बे का नंबर आया, सन्यासी ने पूछा,* *"उस अंतिम डिब्बे में क्या है?"*
*दुकानदार बोला, "उसमें भगवान हैं।"*
*सन्यासी ने हैरान होते हुये पूछा, "भगवान !! भला यह* *"भगवान" किस वस्तु का नाम है भाई? मैंने तो इस नाम के* *किसी सामान के बारे में कभी नहीं सुना !"*
*दुकानदार सन्यासी के भोलेपन पर हंस कर बोला,* *"महात्मन ! और डिब्बों मे तो* *भिन्न-भिन्न वस्तुएं हैं | पर यह* *डिब्बा खाली है| हम खाली को खाली नहीं कहकर* *भगवान कहते हैं !"*
*संन्यासी की आंखें खुली की* *खुली रह गई ! जिस बात के* *लिये मैं दर-दर भटक रहा था, वो बात मुझे आज एक व्यापारी से समझ आ रही है।*
*वो सन्यासी उस छोटे से किराने के दुकानदार के आगे नतमस्तक हो गया , ओह, तो खाली में भगवान रहता है !*
*सत्य है ! भरे हुए में भगवान को स्थान कहाँ ?*
*काम, क्रोध, लोभ, मोह, लालच, अभिमान, ईर्ष्या, द्वेष और भली-बुरी, सुख-दुख की बातों से जब दिल-दिमाग भरा रहेगा तो उसमें ईश्वर का वास कैसे होगा ?*
*भगवान यानी 'महावीर' तो खाली यानी साफ-सुथरे मन में ही निवास करते है।अतः हमसभी को पांच इंद्रियों के विषयों को क्रमशः शक्ति अनुसार छोड़ते हुए व्रत-संयम को अंगीकार करके मोक्षमार्ग मे आगे बढ़ना चाहिए।*
*एक छोटी सी दुकान वाले ने सन्यासी को बहुत बड़ी बात समझा दी थी।*
✋ *मन जब खाली होगा यानि भूतकाल की यादों से मुक्त, भविष्य की कल्पनाओं , कामनाओं, विकारों से रिक्त ..तभी ईश्वर का वास होगा ..तभी ईश्वर के दर्शन होगें।*
*👨👩👧👦✍️➡️🕉️सदैव प्रसन्न रहते हुए अपने सच्चे कर्तव्यों ( वह कार्य जो हमें 84 लाख योनियों से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें )का पालन किजिये।*
*जैसा हमारा कर्म होगा वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा।आज वर्तमान में जो भी हमसभी को प्राप्त हो रहा है वह हमारे द्वारा किये गए कर्मो का ही फल है।आप किसी भी जीव के सहयोगी नहीं बन सकते तो विरोधी बनकर पाप का संचय मत करो। ना ही किसी बात चिंता करो, अच्छे कर्म करो जो हमसे कोई छुड़ा भी नहीं सकता और चुरा भी नहीं सकता।कर्म यह ऐसी संपत्ति है जो मरने के बाद भी हमारे साथ रहती है।जब जीव जन्म लेता है तो केवल अपने किये हुए कर्मों के साथ ही जन्म लेता है।*
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*जैनम् जयतु शासनम्*
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